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भारतीय आतिथ्य और समान अवसरों की मिसाल बनता ‘द ललित’

देश भर में लग्जरी होटल चलाने वाला द ललित सूरी हॉस्पिटैलिटी ग्रुप किस तरह से अपने होटलों में सेवा व्यापार को भारतीयता और मानवीय संवेदनाओं के साथ जोड़ रहा है, पढ़िए इस कहानी में.

भारतीय आतिथ्य और समान अवसरों की मिसाल बनता ‘द ललित’
नई दिल्ली:

आज के दौर में जब हॉस्पिटैलिटी उद्योग को अक्सर होटल के आकार, कमरों की ऑक्यूपेंसी और विस्तार के आधार पर आंका जाता है, ऐसे समय में द ललित सूरी हॉस्पिटैलिटी ग्रुप एक अलग कहानी लिख रहा है. यह कहानी समान अवसर और सामुदायिक विकास जैसे भारतीय मूल्यों पर आधारित है. यह हॉस्पिटैलिटी का एक ऐसा स्वदेशी मॉडल है, जो भारतीय भावना से गहराई से जुड़ा हुआ है. यह लोगों को प्राथमिकता देता है और व्यवसाय के साथ-साथ राष्ट्र निर्माण को भी महत्व देता है.

पिछले कुछ वर्षों में द ललित सूरी हॉस्पिटैलिटी ग्रुप ने कौशल विकास, शिक्षा, रोजगार, स्वास्थ्य और सामाजिक भागीदारी से जुड़ी पहलों के जरिए 10 लाख से अधिक लोगों के जीवन को सकारात्मक रूप से प्रभावित किया है. इनमें से 3 लाख से अधिक लोगों को प्रत्यक्ष रूप से सहयोग मिला है. हर व्यक्ति को बिना किसी पक्षपात के अवसर और सम्मान देने की यही सोच आज 'दिल से मेहमाननवाजी' के रूप में द ललित की पहचान बन चुकी है.

ट्रांसजेंडरों को रोजगार

आज यह समूह भारत में निजी क्षेत्र के उन प्रमुख संस्थानों में शामिल है, जो ट्रांसजेंडर समुदाय को बड़े पैमाने पर रोजगार उपलब्ध करा रहे हैं. यहां 250 से अधिक ट्रांसजेंडर कर्मचारी विभिन्न पदों पर कार्यरत हैं. इसके अलावा, समूह ने 13 LGBTQIA+ जॉब फेयर आयोजित किए हैं, जिनके माध्यम से नौकरी की तलाश कर रहे 10 हजार से अधिक लोगों तक पहुंच बनाई गई है. इन प्रयासों के जरिए 1,500 से अधिक लोगों को रोजगार मिला है. साथ ही, ग्रुप ने 500 से अधिक दिव्यांग व्यक्तियों और 50 से अधिक एसिड अटैक सर्वाइवर्स को रोजगार दिया और संस्थान में उन्हें समान अधिकार प्रदान किए.

ललित ग्रुप में 250 से अधिक ट्रांसजेंडर विभिन्न पदों पर काम करते हैं.

ललित ग्रुप में 250 से अधिक ट्रांसजेंडर विभिन्न पदों पर काम करते हैं.

ग्रुप की इस सोच में यह विश्वास है कि भारत के हॉस्पिटैलिटी सेक्टर की प्रगति केवल बड़े शहरों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि छोटे शहरों और स्थानीय समुदायों तक भी पहुंचनी चाहिए. इसी उद्देश्य से खजुराहो, बेकल, मांगर और गोवा जैसे क्षेत्रों में पर्यटन और हॉस्पिटैलिटी से जुड़े कौशल विकास कार्यक्रम चलाए गए. इन कार्यक्रमों का उद्देश्य स्थानीय युवाओं को उनके अपने क्षेत्र में रोजगार के अवसर उपलब्ध कराना है, ताकि उन्हें काम की तलाश में पलायन न करना पड़े.

भविष्य की चुनौतियों से निपटने की तैयारी

यह प्रतिबद्धता द ललित सूरी हॉस्पिटैलिटी स्कूल में भी स्पष्ट रूप से दिखाई देती है, जहां भविष्य की चुनौतियों का सामना करने में सक्षम हॉस्पिटैलिटी वर्कफोर्स तैयार की जा रही है. यहां केवल तकनीकी प्रशिक्षण ही नहीं, बल्कि संवाद कौशल, पेशेवर व्यवहार, सहानुभूति और वास्तविक कार्य अनुभव पर भी विशेष जोर दिया जाता है. यह आज के आधुनिक हॉस्पिटैलिटी उद्योग के लिए बेहद आवश्यक है.
द ललित सूरी हॉस्पिटैलिटी ग्रुप के हॉस्पिटैलिटी मॉडल में कौशल विकास और समान अवसरों को विशेष महत्व दिया गया है. इसी सोच के तहत द ललित सूरी हॉस्पिटैलिटी स्कूल, होटल एसोसिएशन ऑफ इंडिया यानी HAI के साथ मिलकर युवाओं को उद्योग की जरूरतों के अनुरूप तैयार करने का काम कर रहा है. इस साझेदारी के तहत प्रशिक्षण, ग्रूमिंग और व्यावहारिक अनुभव पर विशेष जोर दिया जा रहा है.
समूह का स्किल डेवलपमेंट नेटवर्क PrideKraft कार्यक्रम के माध्यम से अब तक 3,000 से अधिक LGBTQIA+ लोगों को प्रशिक्षण दे चुका है. वहीं, Emerging Queer Leaders in Hospitality कार्यक्रम के जरिए 70 से अधिक युवाओं को प्रशिक्षित किया गया है.

केशव सूरी फाउंडेशन के सहयोग से 350 से अधिक लोगों को व्यावसायिक और रचनात्मक कार्यशालाओं में प्रशिक्षण दिया गया, जबकि 200 से अधिक लोगों को रोजगार दिलाने में मदद की गई. इसके अलावा, LGBTQIA+ युवाओं, दिव्यांग व्यक्तियों और न्यूरोडाइवर्जेंट छात्रों सहित विभिन्न समुदायों के 75 से अधिक छात्रों को छात्रवृत्ति भी प्रदान की गई है.

द ललित भारतीय आतिथ्य की उस परंपरा से जुड़ा है, जहां सेवा केवल व्यवसाय नहीं, बल्कि मानवीय संवेदनाओं से भी जुड़ा है.

द ललित भारतीय आतिथ्य की उस परंपरा से जुड़ा है, जहां सेवा केवल व्यवसाय नहीं, बल्कि मानवीय संवेदनाओं से भी जुड़ा है.

जब डॉक्टरों के लिए खोल दिए होटल के दरवाजे

द ललित की सोच केवल होटल संचालन तक सीमित नहीं रही है. कोविड महामारी के दौरान समूह ने अपने होटलों को फ्रंटलाइन हेल्थकेयर वर्कर्स और डॉक्टरों के सहयोग हेतु उपलब्ध कराया. इसके साथ ही भोजन वितरण, PPE किट सहायता और वैक्सीनेशन अभियानों में भी सक्रिय योगदान दिया.

द ललित सूरी हॉस्पिटैलिटी ग्रुप के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर केशव सूरी का कहना है कि द ललित में सबको साथ लेकर चलना केवल एक नीति नहीं, बल्कि एक गहरा विश्वास है. यही विश्वास तय करता है कि संस्थान कैसे काम करेगा, कैसे आगे बढ़ेगा और समाज से कैसे जुड़ा रहेगा. उनका मानना है कि जब लोगों को सही मंच और आगे बढ़ने का अवसर मिलता है, तो वे न केवल अपनी पहचान बनाते हैं, बल्कि समाज में सकारात्मक बदलाव लाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं.

कई मायनों में द ललित की यात्रा भारतीय आतिथ्य की उस परंपरा को दर्शाती है, जहां सेवा केवल व्यवसाय नहीं, बल्कि मानवीय संवेदनाओं से जुड़ा भाव है. यहां सफलता केवल मुनाफे से नहीं, बल्कि लोगों को रोजगार देने और उनके जीवन को बेहतर बनाने से मापी जाती है. आज तेजी से वैश्विक होते लग्जरी हॉस्पिटैलिटी बाजार में द ललित का यही स्वदेशी और मानवीय दृष्टिकोण उसे एक अलग पहचान देता है.(ए़डवटोरियल)

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