- पीएफ में हर महीने जमा राशि पर ब्याज की गणना मासिक क्लोजिंग बैलेंस के आधार पर की जाती है
- कर्मचारी और कंपनी दोनों की ओर से कुल 12 प्रतिशत बेसिक सैलरी और डीए पीएफ खाते में जमा होता है
- पीएफ की राशि महीने की पंद्रह तारीख से पहले खाते में जमा होनी चाहिए, नहीं तो ब्याज का नुकसान हो सकता है
नौकरी पेशा लोगों के लिए PF केवल एक सरकारी सेविंग स्कीम नहीं है, बल्कि ये रिटायरमेंट के बाद का सबसे अहम सपोर्ट है. हर महीने जब सैलरी स्लिप हाथ में आती है, तो पीएफ डिडक्शन वाले कॉलम पर नजर जरूर जाती है. बहुत से लोग सोचते हैं कि अगर उनका हर महीने 10,000 रुपये पीएफ कट रहा है, तो साल के आखिर में सीधे टोटल अमाउंट पर सरकार पहले से फिक्स ब्याज दर, जैसे 8.25% या जो भी उस साल के लिए ऐलान किया हो, के हिसाब से पैसा मिल जाएगा. पर ऐसा कतई नहीं है. पीएफ का गणित इतना सीधा नहीं है. पीएफ खाते में ब्याज की कैलकुलेशन हर महीने के रनिंग बैलेंस पर तो होती है, लेकिन ये खाते में जमा साल के आखिर में यानी 31 मार्च को ही होता है.
ऐसे में अगर आप भी जानना चाहते हैं कि हर महीने कटने वाले 10,000 रुपये पर साल भर में कितना ब्याज बनेगा और 31 मार्च को आपके एनुअसल कॉर्पस में कितना अमाउंट जुड़ेगा, तो इस खब में हम आपको बहुत ही आसान भाषा में पूरा फॉर्मूला और कैलकुलेशन समझाने जा रहे हैं.
PF का बेसिक नियम समझें
कैलकुलेशन पर जाने से पहले ये समझना जरूरी है कि आपके पीएफ खाते में पैसा जाता कैसे है. आपकी बेसिक सैलरी और डीए का 12% हिस्सा आपके पीएफ खाते में जाता है. इतना ही हिस्सा यानी 12% आपकी कंपनी भी देती है. लेकिन कंपनी के 12% हिस्से में से 8.33% हिस्सा कर्मचारी पेंशन योजना में चला जाता है. सिर्फ 3.67% हिस्सा ही आपके ईपीएफ खाते में जमा होता है.
ब्याज कैसे कैलकुलेट होता है?
भले ही ब्याज साल के आखिर में 31 मार्च को क्रेडिट होता है, लेकिन ईपीएफओ इसकी कैलकुलेशन हर महीने के क्लोजिंग बैलेंस पर करता है. अब क्योंकि सरकार सालाना ब्याज दर का ऐलान करती है, इसलिए हर महीने का ब्याज निकालने के लिए इस को 12 से भाग देना होता है.
मंथली ब्याज दर का फॉर्मूला:
- मंथली ब्याज दर= 12×100/सालाना ब्याज दर
- ब्याज दर 8.25% है, तो मंथली ब्याज दर होगी= 12×100/8.25 =0.006875 (यानी 0.6875%)
हर महीने 10,000 रुपये कटने पर कैलकुलेशन
मान लेते हैं कि आप 1 अप्रैल से एक नए वित्त वर्ष से शुरुआत करते हैं और मार्च के आखिर तक आपका कुल कॉपर्स क्या होगा, आइए देखते हैं. समझने में आसानी हो, इसलिए हम मान लेते हैं कि ओपनिंग बैलेंस जीरो है और कर्मचारी और कंपनी का मिलाकर कुल 10,000 रुपये महीना आपके EPF खाते में जमा हो रहा है.
- अप्रैल का महीना
जमा रकम: 10,000 रुपये
मंथली क्लोजिंग बैलेंस: 10,000 रुपये
अप्रैल का ब्याज: 10,000×(12×100/8.25)= 68.75 रुपये
- मई का महीना
पुराना बैलेंस: 10,000 रुपये
मई का क्लोजिंग बैलेंस: 20,000 रुपये
मई का ब्याज: 20,000×(12×100/8.25)= 137.50 रुपये
- जून का महीना
जून का क्लोजिंग बैलेंस: 30,000 रुपये
जून का ब्याज: 30,000×(12×100/8.25)=206.25 रुपये
इसी तरह हर महीने क्लोजिंग बैलेंस 10-10 हजार रुपये बढ़ता जाएगा और उस पर ब्याज की राशि भी बढ़ती जाएगी। आइए पूरे 12 महीनों का चार्ट देखते हैं:
- अप्रैल- 68.75 रुपये
- मई- 137.50 रुपये
- जून- 206.25 रुपये
- जुलाई- 275.00 रुपये
- अगस्त- 343.75 रुपये
- सितंबर- 412.50 रुपये
- अक्टूबर- 481.25 रुपये
- नवंबर- 510.00 रुपये
- दिसंबर- 618.75 रुपये
- जनवरी- 687.50 रुपये
- फरवरी- 756.25 रुपये
- मार्च- 825.00 रुपये
कुल ब्याज: 5,362.50 रुपये'
31 मार्च को एनुअसल कॉर्पस पर क्या असर होगा?
जैसा कि आपने कैलकुलेशन में देखा, हर महीने कैलकुलेट हुए ब्याज टोटल 5,362.50 रुपये बनती है. अब आता है आपके सवाल का सबसे अहम हिस्सा यानी साल के आखिर में मिली ब्याज. 31 मार्च को ईपीएफओ पूरे साल में मिली ब्याज को आपके टोटल पीएफ कॉपर्स में जोड़ देता है.
- 31 मार्च तक आपका कुल जमा- 1,20,000 रुपये
- सालभर का कुल ब्याज- 5,362.50 रुपये
- 31 मार्च को टोटल क्लोजिंग कॉपर्स- 1,20,000+5,362.50=1,25,362.50 रुपये
अब 1 अप्रैल के लिए ये 1,25,362.50 रुपये आपका ओपनिंग बैलेंस बन जाएगा. यानी अगले साल आपको इस पूरी रकम पर भी ब्याज मिलेगा. इसी को कहते हैं कंपाउंडिंग का फायदा.
पीएफ का पैसा बढ़ाते समय इन बातों का रखें ध्यान
ईपीएफओ अनुसार, हर महीने की 15 तारीख से पहले पीएफ का पैसा खाते में जमा हो जाना चाहिए. अगर कंपनी लेट करती है, तो उस महीने के ब्याज का नुकसान कर्मचारी को हो सकता है. ईपीएफओ की ऑफिशियली वेबसाइट या उमंग ऐप की मदद से आप हर महीने अपनी पासबुक अपडेट देख सकते हैं, जिससे आपको पता रहेगा कि कितना कॉपर्स इकट्ठा हो चुका है.
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