Gold Loan vs Personal Loan: हमारे घरों की तिजोरी या लॉकर में रखा सोना अब सिर्फ शादी-ब्याह या त्योहारों पर पहनने के काम नहीं आ रहा. आज के समय में लोग जरूरत पड़ते ही घर के सोने को इमरजेंसी फंड की तरह इस्तेमाल कर रहे हैं. जब भी अचानक पैसों की जरूरत पड़ती है, लोग बिना ज्यादा सोचे सोने को गिरवी रखकर आसानी से लोन ले रहे हैं. महंगे पर्सनल और बिजनेस लोन की जगह अब काफी लोग गोल्ड लोन लेना पसंद कर रहे हैं.
JPMorgan की भविष्यवाणी: 3गुना बढ़ेगा गोल्ड लोन का दबदबा
JPMorgan का मानना है कि भारत में गोल्ड लोन का क्रेज अभी और बढ़ने वाला है. ब्रोकरेज के मुताबिक, अगले 5 साल में देश के कुल क्रेडिट सिस्टम में गोल्ड लोन की हिस्सेदारी करीब 10% तक पहुंच सकती है. वित्त वर्ष 2024 में यह हिस्सेदारी सिर्फ 2% थी, जबकि फिलहाल यह करीब 5% है. यानी आने वाले सालों में गोल्ड लोन का दबदबा करीब 3 गुना तक बढ़ सकता है.

पर्सनल लोन से 3 से 6% तक सस्ता पड़ रहा गोल्ड लोन
गोल्ड लोन की बढ़ती पॉपुलैरिटी के पीछे सबसे बड़ी वजह ये है कि इसमें ब्याज दर कम है. JPMorgan के मुताबिक, गोल्ड लोन लेने वालों को पर्सनल लोन मुकाबले ब्याज में 3 से 6 प्रतिशत तक का फायदा मिल सकता है.
इसे ऐसे समझिए कि पहले लोग पर्सनल लोन लेना पसंद कर रहे थे भले उसपर ज्यादा ब्याज देना पड़े. लेकिन अब वही लोग अपना सोना गिरवी रखकर उससे सस्ता गोल्ड लोन ले सकते हैं. यही वजह है कि छोटा कारोबार शुरू करना हो या अचानक पैसों की जरूरत पड़ जाए या फिर कोई दूसरी जरूरी काम के लिए भी लोग तेजी से गोल्ड लोन ले रहे हैं.
पर्सनल और बिजनेस लोन पर भारी पड़ रहा गोल्ड लोन
JPMorgan ने आंकड़ों के साथ ये बताया कि FY23 में रिटेल क्रेडिट डिस्बर्समेंट में गोल्ड लोन की हिस्सेदारी 18% थी, जो FY26 में बढ़कर 41% पहुंच गई है. दूसरी तरफ, पर्सनल और छोटे बिजनेस लोन की हिस्सेदारी इसी दौरान 55% से घटकर 41% रह गई है. इससे साफ है कि लोग अब धीरे-धीरे महंगे अनसिक्योर्ड लोन की जगह अपने पास मौजूद सोने के बदले सस्ता लोन लेना पसंद कर रहे हैं.
पढ़ाई, इलाज, ट्रैवल से लेकर बिजनेस तक के लिए लोन
लोग पैसों की जरूरत पूरी करने के लिए भी गोल्ड लोन का इस्तेमाल कर रहे हैं. इसमें बच्चों की पढ़ाई, मेडिकल इमरजेंसी, ट्रैवल और दूसरी जरूरी चीजें शामिल हैं. वहीं, छोटे कारोबारी अपने बिजनेस के लिए भी सोने के बदले लोन ले रहे हैं. JPMorgan के मुताबिक, लोग अब घर में पड़े गहनों को जरूरत के समय पैसा जुटाने के ऑप्शन के तौर पर देख रहे हैं. यह खासतौर पर खराब या कम क्रेडिट स्कोर वाले ग्राहकों के बीच ज्यादा देखने को मिल रहा है. ऐसे लोगों के लिए पर्सनल या दूसरे अनसिक्योर्ड लोन महंगे पड़ सकते हैं, जबकि गोल्ड लोन की ब्याज दर कम होने से यह उन्हें बेहतर लग रहा है.
देश में अभी भी बहुत कम सोना गिरवी
गोल्ड लोन में बंपर ग्रोथ के बावजूद JPMorgan का मानना है कि इस मार्केट में अभी काफी बड़ी संभावना है. अनुमान के मुताबिक, इनकम के हिसाब से नीचे के 60% परिवारों के पास मौजूद सोने का सिर्फ 11% हिस्सा ही कर्ज लेने के लिए गिरवी रखा गया है. वहीं, इस सोने का सिर्फ 3% हिस्सा ही NBFC के पास गिरवी है.
सोने की कीमतों में उतार-चढ़ाव के बाद भी कम रिस्क क्यों?
JPMorgan के मुताबिक, सोने की कीमतों में तेज उतार-चढ़ाव के बावजूद गोल्ड लोन की एसेट क्वालिटी मजबूत बनी हुई है. इसकी वजह यह है कि लोन देने वाली कंपनियां गिरवी रखे सोने की पूरी कीमत के बराबर कर्ज नहीं देती हैं.आमतौर पर लोन-टू-वैल्यू यानी LTV करीब 55-65% के लेवल पर रहता है. यानी सोने की कीमत के मुकाबले लोन कम दिया जाता है. इससे कीमतों में गिरावट आने पर भी कंपनियों के पास अच्छा मार्जिन बना रहता है.
अप्रैल से बदले नियम, बड़ी कंपनियों पर ज्यादा असर नहीं
गोल्ड के बदले लोन देने से जुड़े नियमों में अप्रैल 2026 से कुछ बदलाव लागू हुए हैं. नए नियमों में LTV की अधिकतम सीमा को अलग-अलग लेवल पर बढ़ाया गया है, लेकिन गिरवी रखे सोने की वैल्यू तय करने के तरीके को ज्यादा सख्त किया गया है.
JPMorgan का मानना है कि इन बदलावों का Muthoot Finance, Manappuram Finance और IIFL Finance जैसी गोल्ड लोन कंपनियों पर बड़ा असर नहीं पड़ेगा.
सबसे कम NPA, कंपनियों के लिए भी फायदे का सौदा
गोल्ड लोन की सबसे बड़ी खासियत ये है कि इसमें बैंकों का रिस्क न के बराबर होता है. जेपी मॉर्गन के मुताबिक, हर तरह के रिटेल लोन में गोल्ड लोन सबसे सेफ है, क्योंकि गोल्ड लोन का NPA रेशियो सबसे कम सिर्फ 0.2% है.
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