मिडिल ईस्ट में तनाव और युद्ध के बीच पूरी दुनिया की नजरें फिलहाल खाड़ी देशों (Gulf Countries) पर टिकी हैं. इसकी वजह बहुत साफ है दुनिया की अर्थव्यवस्था का पहिया घुमाने वाला 'तेल' इन्हीं मुल्कों के पास है. अगर खाड़ी देशों में कोई सुप्रीम पावर है, तो वो है तेल और गैस का भंडार. लेकिन क्या आप जानते हैं कि दुनिया की प्यास बुझाने में इन देशों का कितना बड़ा हाथ है और मौजूदा लड़ाई का इन पर क्या असर पड़ रहा है?
युद्ध का असर, सऊदी अरब ने शुरू की तेल में कटौती
मिडिल ईस्ट में चल रही लड़ाई 11 दिनों से जारी है और इसका असर सीधे उत्पादन पर दिखने लगा है. खबर है कि सऊदी अरब ने अपने तेल उत्पादन में कटौती शुरू कर दी है. इसकी बड़ी वजह 'होर्मुज स्ट्रेट' (Hormuz Strait) का लगभग पूरी तरह बंद होना है. रास्ता बंद होने के कारण स्टोरेज टैंक पूरी तरह भर गए हैं, जिससे नया तेल निकालने की जगह नहीं बची है. सऊदी से पहले UAE, कुवैत और इराक भी स्टोरेज भरने के कारण उत्पादन कम करने का फैसला ले चुके हैं.
दुनिया के कुल उत्पादन में खाड़ी देशों की हिस्सेदारी
खाड़ी देशों (सऊदी अरब, इराक, यूएई, कुवैत, ओमान, बहरीन) की ताकत का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि दुनिया का लगभग 23% से 30% कच्चा तेल अकेले इन्हीं इलाकों से आता है. ये देश हर दिन करीब 1.7 करोड़ बैरल (17 मिलियन बैरल) से ज्यादा तेल पैदा करते हैं.
इतना ही नहीं, दुनिया में जितना भी कच्चा तेल जमीन के नीचे मौजूद है, उसका लगभग आधा हिस्सा इन्हीं खाड़ी देशों के पास है. सऊदी अरब आज भी दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा तेल उत्पादक (12 मिलियन BPD) बना हुआ है.
किस देश में कितना होता है तेल का उत्पादन?
जनवरी 2026 तक के ट्रेडिंग इकोनॉमिक्स के ताजा आंकड़ों के अनुसार, इन देशों का रोजाना का उत्पादन (बैरल प्रति दिन) कुछ इस तरह है...
- इराक: 4,443,457 बैरल
- ईरान: 4,376,194 बैरल
- संयुक्त अरब अमीरात (UAE): 3,772,788 बैरल
- कुवैत: 2,990,544 बैरल
- कतर: 1,987,193 बैरल (नवंबर 2025 तक के आंकड़े)
- ओमान: 1,015,512 बैरल (नवंबर 2025 तक के आंकड़े)
- सऊदी अरब: 12,402,761 बैरल
GCC देशों का दबदबा, 22% पर कब्जा
अगर हम सिर्फ गल्फ कॉपरेशन काउंसिल (GCC) के छह देशों सऊदी अरब, यूएई, कुवैत, कतर, ओमान और बहरीन को मिला दें, तो इनका कुल ग्लोबल ऑयल प्रोडक्शन का करीब 22% बैठता है.यानी ग्लोबल मार्केट में इन देशों की पकड़ काफी मजबूत है.
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