सरकारी बैंकों के भविष्य और उनके मर्जर को लेकर सोशल मीडिया और खबरों में चल रही अटकलों पर अब विराम लग गया है. वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने खुद सामने आकर स्थिति साफ कर दी है कि फिलहाल बैंकों को आपस में जोड़ने का सरकार का कोई इरादा नहीं है.
सरकारी बैंकों के मर्जर को लेकर अभी कोई रोडमैप नहीं: वित्त मंत्री
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने सोमवार को आरबीआई (RBI) के साथ बैठक के बाद साफ शब्दों में कहा कि सरकार के पास सरकारी बैंकों के मर्जर को लेकर अभी कोई तय योजना या रोडमैप नहीं है. उन्होंने बताया कि बजट से पहले या बजट के दौरान भी बैंकों के मर्जर जैसे कोई विषय चर्चा में नहीं था.
इस बयान से उन अटकलों पर ब्रेक लगा गया है जिनमें कहा जा रहा था कि सरकार बैंकों की संख्या कम करने के लिए मर्जर की तैयारी कर सकती है.
बैंकिंग सेक्टर की मजबूती के लिए बनेगी हाई लेवल कमेटी
भले ही अभी बैंकों के मर्जर का कोई प्लान न हो, लेकिन सरकार भारतीय बैंकिंग को दुनिया के बेहतरीन सिस्टम के बराबर लाने की तैयारी जरूर कर रही है. वित्त मंत्री ने बजट 2026-27 में एक 'हाई लेवल कमेटी ऑन बैंकिंग फॉर विकसित भारत' बनाने का प्रस्ताव दिया है. यह कमेटी इस बात पर गहराई से विचार करेगी कि भारतीय बैंकों को कैसे और मजबूत बनाया जाए ताकि वे देश की बढ़ती जरूरतों को पूरा कर सकें. यह कमेटी ग्राहकों की सुरक्षा, वित्तीय स्थिरता और सबको बैंकिंग सुविधाओं से जोड़ने जैसे पहलुओं पर भी काम करेगी.
PFC और REC में होगा बड़ा बदलाव
बैंकिंग सेक्टर के साथ-साथ सरकार ने सरकारी एनबीएफसी (NBFC) कंपनियों को और बेहतर बनाने के लिए एक अहम कदम उठाया है. बजट में पावर फाइनेंस कॉर्पोरेशन (PFC) और रूरल इलेक्ट्रिफिकेशन कॉर्पोरेशन (REC) को फिर से रीस्ट्रक्चर करने का प्रस्ताव दिया गया है. आपको बता दें कि आरईसी (REC) पहले से ही पीएफसी (PFC) की सहायक कंपनी है और दोनों मिलकर देश में बिजली से जुड़े प्रोजेक्ट्स को पैसा मुहैया कराने का बड़ा काम करती हैं. सरकार का मकसद इन संस्थाओं की कार्यक्षमता को बढ़ाना है.
RBI गवर्नर ने दी गुड न्यूज, बैंकों के पास है पर्याप्त पैसा
आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने देश की आर्थिक स्थिति पर अच्छी खबर दी है. उन्होंने बताया कि भारतीय बैंकों के पास अपनी पूंजी का पर्याप्त भंडार है और वे अगले 4-5 साल तक बिना किसी परेशानी के लोन देने की क्षमता रखते हैं. उन्होंने यह भी कहा कि अब बैंकों में पैसा जमा करने की रफ्तार (Deposit Growth) भी कर्ज देने की रफ्तार के बराबर आ गई है, जो कि एक बहुत अच्छा संकेत है. विदेशी निवेश (FDI) के मुद्दे पर उन्होंने बताया कि भले ही नेट एफडीआई कम दिख रहा हो, लेकिन देश में आने वाला कुल निवेश (Gross FDI) लगातार बढ़ रहा है.
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