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मौसम की मार से बढ़ सकती है महंगाई! वित्त मंत्रालय ने अपनी रिपोर्ट में और किस मोर्चे पर किया सावधान?

वित्त मंत्रालय ने अपनी मई 2026 मंथली इकोनॉमिक रिपोर्ट में तेल की बढ़ती कीमतों, थोक महंगाई में उछाल और सामान्य से कम मानसून की वजह से देश में महंगाई बढ़ने की चेतावनी दी है.

मौसम की मार से बढ़ सकती है महंगाई! वित्त मंत्रालय ने अपनी रिपोर्ट में और किस मोर्चे पर किया सावधान?

वित्त मंत्रालय की मई 2026 की रिपोर्ट के अनुसार देश की अर्थव्यवस्था के सामने कई चुनौतियां खड़ी हो रही हैं. दुनिया में बढ़ती टेंशन, महंगे होते कच्चे तेल, गिरता हुआ रुपया, कमजोर मानसून और एल नीनो का असर मिलकर भारत की अर्थव्यवस्था पर दबाव डाल सकते हैं. मंत्रालय की ये मंथली इकोनॉमिक रिपोर्ट आरबीआई की जून के पहले हफ्ते में होने वाली एमपीसी बैठक से ठीक पहले आई है. ऐसे में अब ये उम्मीद करना मुश्किल है कि ब्याज दरों में जल्दी राहत मिलेगी, बल्कि महंगाई को काबू में रखने के लिए कड़े फैसले लिए जा सकते हैं.

मानसून पर एल नीनो का साया

मौसम विभाग ने बताया कि इस साल मानसून सामान्य से कमजोर रह सकता है और ये औसत का करीब 92% रहने का अनुमान है. वित्त मंत्रालय ने भी अपनी रिपोर्ट में एल नीनो के असर को लेकर चिंता जताई है. भारत में खेती और गांवों की अर्थव्यवस्था काफी हद तक मानसून पर निर्भर करती है, इसलिए कम बारिश का सीधा असर फसलों और खाने-पीने की चीजों पर पड़ता है. अगर बारिश कम हुई, तो धान, दाल और तिलहन जैसी खरीफ फसलों की बुआई, और कुल उत्पादन घट सकता है. 

थोक महंगाई में जबरदस्त इजाफा

वित्त मंत्रालय ने खुदरा महंगाई और थोक महंगाई के बीच बढ़ते फर्क पर चिंता जताई है. अप्रैल 2026 में खुदरा महंगाई तो करीब 3.48% रही, यानी अभी कंट्रोल में दिख रही है, लेकिन थोक महंगाई तेजी से बढ़कर 8.30% पहुंच गई है. इसका सीधा मतलब कंपनियों के लिए सामान बनाना महंगा हो गया है. फिलहाल कंपनियों ने ये पूरा बोझ ग्राहकों पर नहीं डाला है, लेकिन ज्यादा दिन तक रुक पाना संभव नहीं है. इसलिए आने वाले समय में रोजमर्रा के सामान की कीमतें बढ़ सकती हैं, जिससे आम लोगों की जेब पर असर पड़ेगा.

कच्चा तेल हुआ महंगा, रुपया हुआ कमजोर

महंगाई बढ़ने की एक बड़ी वजह पेट्रोल, डीजल और गैस के दाम बढ़ना भी है. एक सिंपल बात है जब तेल महंगा होता है, तो इसका असर सीधे लोगों के खर्च पर पड़ता है और बाकी चीजें भी महंगी हो जाती हैं. इसी बीच रुपया भी डॉलर के मुकाबले कमजोर होकर करीब 97 तक गिर गया. मतलब भारत जो चीजें बाहर से खरीदता है, जैसे तेल और इलेक्ट्रॉनिक सामान, वो अब पहले से ज्यादा महंगे हो गए हैं. यही वजह है कि बाहर से आने वाली महंगाई भी बढ़ रही है और इसका असर देश की अर्थव्यवस्था के साथ आम लोगों पर भी साफ दिख रहा है.

स्ट्रैट ऑफ हॉर्मुज ने बिगाड़ा खेल

दुनिया में चल रहे हालात भी भारत के लिए परेशानी बढ़ा रहे हैं. सरकार ने बताया कि अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता तनाव एक बड़ा खतरा बन सकता है. खासकर स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज के मौर्चे पर, जहां से दुनिया का बड़ा हिस्सा तेल गुजरता है. भारत भी अपनी ज्यादातर कच्चे तेल की जरूरत इसी रास्ते से पूरी करता है. ऐसे में यहां रुकावट आने से कच्चे तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल चली गईं. इसका सीधा असर भारत की अर्थव्यवस्था और आम लोगों पर देखने को मिला.

आरबीआई के सामने दोहरी चुनौती

रिपोर्ट में वित्त मंत्रालय ने साफ कहा है कि वित्त वर्ष 2026-27 को बेहतर तरीके से संभालने और देश की अर्थव्यवस्था की रफ्तार बनाए रखने के लिए सरकार और रिजर्व बैंक को कई मौर्चों पर काम करना होगा. एक तरफ आरबीआई को महंगाई कम करने और रुपये को मजबूत बनाए रखने के लिए सख्त कदम उठाने पड़ सकते हैं, वहीं दूसरी तरफ सरकार को ऐसे फैसले लेने होंगे जिससे लोगों के ऊपर महंगाई का असर ज्यादा ना पड़े.

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