15,000 से 25,000 रुपये के बीच की सैलरी पर नौकरी करनेवाले कर्मचारी अब कानूनी तौर पर EPFO से जुड़ी योजनाओं और लाभ के दायरे में आएंगे. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में आज बुधवार को हुई कैबिनेट की मीटिंग में ये फैसला लिया गया है. कैबिनेट ने कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) के तहत अनिवार्य कवरेज के लिए मासिक वेतन सीमा (Wage Ceiling) को 15,000 से बढ़ाकर 25,000 रुपये करने की मंजूरी दे दी है.
यहां सैलरी से मतलब बेसिक सैलरी+DA से है, न कि ग्रॉस सैलरी या CTC से.
यानी कि अब जो युवा 15,000 से 25,000 रुपये के बीच की सैलरी पर नौकरी की शुरुआत कर रहे हैं तो उन्हें भी EPFO से जुड़े फायदे होंगे. कर्मचारियों के लिए बचत और सोशल सिक्योरिटी के लिहाज से इसे बड़ कदम बताया जा रहा है.
कर्मचारियों को तत्काल ये 3 फायदे
- पहला- उन्हें कर्मचारी भविष्य निधि (EPF) के तहत नियमित बचत का लाभ मिलेगा. अब 25,000 रुपये की सैलरी वाले भी इस दायरे में आएंगे.
- दूसरा- कर्मचारी पेंशन योजना (EPS) के जरिए रिटायरमेंट के बाद पेंशन सुरक्षा मिलेगी. न्यूनतम 10 साल की सेवा पूरी करने पर 58 वर्ष की आयु के बाद आजीवन मासिक पेंशन मिलेगी.
- तीसरा- कर्मचारी जमा-संबद्ध बीमा योजना (EDLI) के तहत बीमा सुरक्षा भी उपलब्ध होगी. ये स्कीम नौकरी में रहने के दौरान किसी तरह की अनहोनी होने पर परिवार का सहारा बनती है.
भविष्य के लिए फंड तैयार होगा
EPFO के मुताबिक, कर्मचारी के वेतन का 12% हिस्सा EPF में जाता है और इतना ही (12%) हिस्सा नियोक्ता (कंपनी) खाते में डालती है. अब तक अधिकतम 15,000 रुपये की सीलिंग की वजह से कंपनी का अनिवार्य अंशदान सीमित रहता था. सीलिंग 25,000 होने से PF खाते में हर महीने नियोक्ता और कर्मचारी दोनों की ओर से जमा होने वाली कुल राशि बढ़ जाएगी, जिससे भविष्य के लिए बड़ा फंड तैयार होगा.
टेक-होम सैलरी और बचत में संतुलन
जिन कर्मचारियों का अब तक PF नहीं कट रहा था, उनकी टेक-होम सैलरी में PF अंशदान (12%) के रूप में हल्की कटौती दिखेगी. हालांकि, इसके बदले कंपनी भी अपनी जेब से 12% अतिरिक्त अंशदान जोड़ेगी, जिससे कर्मचारी की कुल बचत और सामाजिक सुरक्षा दोगुनी रफ्तार से बढ़ेगी.
सामाजिक सुरक्षा का दायरा कैसे बढ़ेगा?
15,000 की पुरानी सीमा की वजह से कई एंट्री-लेवल कर्मचारी भी सुरक्षा दायरे से बाहर हो रहे थे. अब सरकार के फैसले से तत्काल रूप से अभी 51 लाख से अधिक कर्मचारियों को संगठित सामाजिक सुरक्षा का लाभ मिलेगा.
बताया जा रहा है कि इस योजना में केंद्र सरकार के बजटीय समर्थन का वार्षिक खर्च लगभग 10,250 करोड़ रुपये से बढ़कर 11,339 करोड़ हो जाएगा. यानी 5 वर्षों में सरकारी खजाने पर करीब 56,696 करोड़ रुपये का प्रावधान करना होगा.
क्या कहता है EPFO का नियम और कहां था पेच?
सरकार के नियमों के अनुसार, जिस कंपनी में 20 से ज्यादा कर्मचारी हैं, वहां भी सिर्फ 15,000 तक की सैलरी वालों का PF काटना अनिवार्य होता है. 15,000 से ज्यादा सैलरी वालों के लिए कंपनी को PF काटना कानूनी रूप से जरूरी नहीं होता है. अब यही लिमिट बढ़ाकर 25,000 रुपये की गई है.
अब आप सोचेंगे कि आपकी या जिसकी सैलरी 15,000 या 25,000 रुपये से ज्यादा है, उसका भी तो PF कट रहा है. तो इसके पीछे 2 कारण हैं.
पहली बात ये कि आप PF में पुराने हैं. यानी आप जिस दिन नौकरी में आए थे, उस दिन आपकी सैलरी 15,000 से कम रही होगी, तो आप PF में आ गए. दूसरी बात कि एक बार PF में आ गए तो सैलरी बढ़ने पर भी आप बाहर नहीं निकल सकते.
बहुत सी बड़ी कंपनियां 15,000 से ज्यादा सैलरी वालों का भी PF काटती हैं ( भले ही कानूनी तौर पर जरूरी न हो) ताकि कर्मचारी को फायदा मिले. इसे वॉलेंटरी PF कहते हैं.
आप सोच सकते हैं कि PF तो सबका कटता ही होगा... पर असल में देश के 90% असंगठित मजदूरों और 15,000 से ऊपर की कई प्राइवेट नौकरियों में आज भी PF नहीं कटता. सरकार ने इसी गैप को भरने के लिए सैलरी सीमा को 25,000 रुपये करने का फैसला लिया.
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