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Gold ETF से कितना अलग है EGR, कहां पैसे लगाना है फायदे का सौदा? टैक्स और रिटर्न की पूरी डिटेल

EGR vs Gold ETF: सवाल यह है कि Gold ETF और EGR में किसमें पैसा लगाना ज्यादा फायदे का सौदा है? EGR की खास बात यह है कि निवेशक 100 मिलीग्राम से लेकर 1 किलोग्राम तक सोना खरीद सकते हैं. जरूरत पड़ने पर इसे बाद में फिजिकल गोल्ड यानी बार या सिक्कों में भी बदला जा सकता है.

Gold ETF से कितना अलग है EGR, कहां पैसे लगाना है फायदे का सौदा? टैक्स और रिटर्न की पूरी डिटेल
ETF में निवेशक सीधे सोना नहीं खरीदते, बल्कि सोने की कीमत में होने वाली तेजी या गिरावट से फायदा लेते हैं.

भारत में सोने (Gold) को हमेशा से सबसे सुरक्षित और पसंदीदा निवेश माना गया है. लेकिन अब सोने में निवेश करने के तरीके बदल चुके हैं. आज के समय में सोने में निवेश करने वालों  के लिए सिर्फ फिजिकल गोल्ड यानी ज्वेलरी , सिक्के या  डिजिटल गोल्ड ETF ही एकमात्र ऑप्शन नहीं  हैं. बाजार में इलेक्ट्रॉनिक गोल्ड रिसिप्ट (Electronic Gold Receipt) यानी EGR एक नया ऑप्शन बनकर सामने आया है, जिसे आप स्टॉक एक्सचेंज पर बिल्कुल शेयरों की तरह खरीद और बेच सकते हैं.

लेकिन एक आम निवेशक के लिए सबसे बड़ा कन्फ्यूजन यह है कि Gold ETF और EGR में से आखिर किसमें पैसा लगाना ज्यादा फायदे का सौदा है? टैक्स, खर्च, लिक्विडिटी और रिटर्न के पैमाने पर कौन आगे है और कौन किस पर भारी है? अगर आप सोने में स्मार्ट निवेश की सोच रहे हैं, तो यह खबर आपके लिए बेहद जरूरी है. 

क्या है EGR और कैसे करता है काम?

इलेक्ट्रॉनिक गोल्ड रिसिप्ट (EGR) असल में एक डिजिटल सर्टिफिकेट है, जो पूरी तरह से असली सोना (Physical Gold)होता है. यह सोना सेबी (SEBI) द्वारा रेगुलेटेड वॉल्ट्स में पूरी तरह सुरक्षित रखा जाता है. निवेशक इसे अपने डीमैट अकाउंट (Demat Account) में होल्ड कर सकते हैं और स्टॉक एक्सचेंज के जरिए शेयरों की तरह खरीद-बेच सकते हैं यानी इसकी ट्रेडिंग कर सकते हैं. EGR की सबसे बड़ी खूबी यह है कि इसमें आप 100 मिलीग्राम से लेकर 1 किलोग्राम तक की छोटी-बड़ी मात्रा में सोना खरीद सकते हैं. सबसे मजेदार बात यह है कि भविष्य में जरूरत पड़ने पर आप EGR को सरेंडर करके असली सोने के बार या सिक्कों में भी बदला जा सकता है.

Gold ETF क्या है और इसके फायदे?

गोल्ड ईटीएफ (Exchange Traded Fund) एक ऐसा म्यूचुअल फंड है जो सीधे तौर पर सोने की कीमतों को ट्रैक करता है. इसमें निवेश करने का मतलब यह नहीं है कि आप सीधे तौर पर सोना खरीद रहे हैं, बल्कि आप सोने की कीमतों में होने वाले उतार-चढ़ाव से मुनाफा कमाते हैं. यह भी शेयर बाजार पर ट्रेड होता है और इसे डीमैट खाते में रखा जाता है. Gold ETF का सबसे बड़ा फायदा यह है कि इसमें आपको सोने की शुद्धता या उसके फिजिकल स्टोरेज या चोरी होने की कोई चिंता नहीं करनी पड़ती और बाजार में इसकी लिक्विडिटी काफी बेहतर मानी जाती है.

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टैक्स के मामले में कौन है बेहतर? 

EGR पर टैक्स के नियम

अगर आप EGR को खरीदने के 12 महीने के भीतर बेचते हैं, तो होने वाले मुनाफे को शॉर्ट टर्म कैपिटल गेन (STCG) माना जाएगा और इस पर टैक्स आपकी इनकम टैक्स स्लैब के अनुसार लगेगा. वहीं, 12 महीने से अधिक होल्ड करने पर इस पर बिना इंडेक्सेशन के 12.5% की दर से लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन (LTCG) टैक्स लागू हो सकता है. राहत की बात यह है कि EGR को फिजिकल गोल्ड में बदलने पर मौजूदा नियमों के तहत कोई अलग से कैपिटल गेन टैक्स नहीं लगता है.

Gold ETF पर के नियम

गोल्ड ईटीएफ भी पूरी तरह से कैपिटल गेन नियमों के दायरे में आता है. यानी टैक्स के मोर्चे पर दोनों में कोई बहुत बड़ा अंतर नहीं है, लेकिन फिजिकल गोल्ड में कन्वर्जन पर टैक्स छूट मिलना EGR के पक्ष में एक प्लस पॉइंट है.

EGR vs Gold ETF : किसमें जेब पर पड़ेगा ज्यादा बोझ?

स्टॉक एक्सचेंज के माध्यम से सीधे EGR खरीदने पर पारंपरिक सोने की तरह तुरंत 3% GST नहीं देना पड़ता, लेकिन इसमें कुछ अन्य छिपे हुए खर्च शामिल होते हैं, जैसे ब्रोकरेज, डीमैट चार्ज, एक्सचेंज फीस और वॉल्टिंग व स्टोरेज चार्ज. इसके अलावा, यदि आप भविष्य में इसकी फिजिकल डिलीवरी लेते हैं, तो आपको डिलीवरी चार्ज के साथ 3% GST भी चुकाना होगा.

दूसरी तरफ, Gold ETF के खर्चों की बात करें तो इसमें आपको मुख्य रूप से ब्रोकरेज, डीमैट चार्ज और फंड को मैनेज करने की फीस यानी एक्सपेंस रेशियो देना होता है. केवल  निवेश के लिहाज से देखें तो गोल्ड ईटीएफ कई मायनों में कम खर्चीला और ज्यादा सरल साबित होता है.

रिटर्न और लिक्विडिटी में कौन मारता है बाजी?

चूंकि दोनों ही प्रोडक्ट सोने की कीमतों से जुड़े हैं, इसलिए दोनों का रिटर्न बाजार में सोने के भाव पर ही निर्भर करता है. हालांकि, एंट्री और एग्जिट के समय रिटर्न में थोड़ा फर्क आ जाता है. Gold ETF में बेहतर लिक्विडिटी और कम स्प्रेड होने के कारण आप जब चाहें मन मुताबिक कीमत पर आसानी से एंट्री-एग्जिट कर सकते हैं. इसके विपरीत, EGR में अभी ट्रेडिंग एक्टिविटी कम होने के कारण इसकी खरीद-बिक्री के दाम में बड़ा अंतर देखने को मिल सकता है. हालांकि, यदि भविष्य में बाजार में EGR की लिक्विडिटी बढ़ती है, तो यह लॉन्ग टर्म का एक बहुत मजबूत ऑप्शन बन सकता है.

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