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माइलेज, सेफ्टी से लेकर इंजन की लाइफ तक, E20 से जुड़े इन 7 सवालों के एक्सपर्ट ने दिए जवाब

देश में फ्लेक्स फ्यूल की शुरुआत हो चुकी है. इथेनॉल ब्लेंडिंग फ्यूल के इस्तेमाल को लेकर बाजार में काफी सवाल हैं. इसी बीच सरकार ने देश के बड़े ऑटो इंडस्ट्री एक्सपर्ट के साथ प्रेस कॉन्फ्रेंस कर इन सभी का जवाब दिया.

माइलेज, सेफ्टी से लेकर इंजन की लाइफ तक, E20 से जुड़े इन 7 सवालों के एक्सपर्ट ने दिए जवाब
इथेनॉल ब्लेंडिंग पर ऑटो इंडस्ट्री एक्सपर्ट ने आम नागरिक की शंकाएं दूर कीं.
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सरकार की प्रेस कॉन्फ्रेंस में मारुति, टोयोटा, हीरो मोटोकॉर्प और इंजीनियर्स इंडिया लिमिटेड के दिग्गजों ने साफ किया कि E20 पूरी तरह सेफ है. पुरानी कारों (E10) पर भी इसके साइड इफेक्ट नहीं दिखे हैं. एक्सपर्ट्स ने माइलेज में मामूली कमी की बात तो मानी है, लेकिन सेफ्टी, इंजन लाइफ और देश की अर्थव्यवस्था के लिए इसे गेम-चेंजर बताया है. आइए जानते हैं प्रेस कॉन्फ्रेंस में पूछे गए टॉप 7 सवाल और एक्सपर्ट्स के जवाब.

सवाल 1: क्या 2023 से पहले बनी पुरानी गाड़ियों में E20 डालने से इंजन या पार्ट्स खराब हो जाएंगे?

राहुल भारती, मारुति सुजुकी) ने कहा, ग्राहकों को डरने की बिल्कुल जरूरत नहीं है. मारुति सुजुकी के पास एक बड़ा सर्विस नेटवर्क है. हाल ही में हमने 2.84 करोड़ कारों की सर्विसिंग की, जिनमें से 1.5 करोड़ कारें 3 साल से ज्यादा पुरानी थीं. हमारे डेटा में E20 फ्यूल से इंजन में जंग लगने, घिसावट या किसी भी पार्ट के डैमेज होने का एक भी मामला सामने नहीं आया.

सवाल 2: सोशल मीडिया पर देखा जा रहा है कि E20 पेट्रोल की वजह से गाड़ियां रास्ते में बंद हो रही हैं. क्या ये सच है?

विक्रम गुलाटी, टोयोटा ने इसका जवाब देते हुए कहा, "हमने सोशल मीडिया पर चल रहे ऐसे दावों की जांच की है. सच ये है कि समस्या E20 फ्यूल की नहीं, बल्कि अडल्ट्रेटेड फ्यूल की थी. उस गाड़ी के पेट्रोल टैंक में पानी मिला पाया गया. जैसे ही हमने टैंक को साफ किया और स्टैंडर्ड E20 फ्यूल डाला, गाड़ी बिना किसी पार्ट डैमेज के बिल्कुल नॉर्मल चलने लगी. ये केवल मिलावट का मामला है.

सवाल 3: क्या वाकई E20 पेट्रोल से गाड़ी का माइलेज कम हो जाता है? अगर हां, तो कितना?

राहुल भारती, मारुति सुजुकी ने बताया, "इथेनॉल की कैलोरीफिक वैल्यू प्योर पेट्रोल से थोड़ी कम होती है. इसलिए E10 के मुकाबले E20 में माइलेज में 3 से 3.5% की मामूली कमी आ सकती है. लेकिन रियल लाइफ में माइलेज गाड़ी चलाने के तरीके, टायर प्रेशर और बार-बार ब्रेक लगाने पर भी डिपेंड करता है. आने वाले समय में जब गाड़ियां 95 ऑक्टेन के हाई-कंप्रेशन इंजन के साथ आएंगी, तो ये 3% की कमी भी पूरी हो जाएगी.

सवाल 4: टू-व्हीलर्स के इंजन बहुत छोटे होते हैं. क्या उन पर E20 का बुरा असर पड़ रहा है?

हीरो मोटोकॉर्प ने बताया, हम दुनिया की सबसे बड़ी टू-व्हीलर कंपनी है और हम साल में 60 लाख से ज्यादा बाइक्स बेचते हैं. हमने अपने करोड़ों किलोमीटर के सर्विस डेटा को देखा. E20 ईंधन पर चलने वाले टू-व्हीलर्स में खराबी या डैमेज की रेट E10 से रत्ती भर भी ज्यादा नहीं है. टू-व्हीलर पूरी तरह सेफ हैं.

सवाल 5: क्या भारत ने इथेनॉल ब्लेंडिंग प्रोग्राम को जल्दबाजी में लागू किया?

वर्तिका शुक्ला, पूर्व CMD, EIL के अनुसार ये कोई रातों-रात लिया गया फैसला नहीं है. ये एक स्टेप वाइज प्रोसेस है. 2013-14 में हम केवल 1.5% इथेनॉल मिलाते थे. इसके बाद ऑटोमोबाइल कंपनियों, ARAI और सियाम की बड़ी टेस्टिंग के बाद ही देश के 77,000 से ज्यादा रिटेल आउटलेट्स पर आज E20 यूनिफॉर्मली दिया जा रहा है.

सवाल 6: क्या E20 के बाद सरकार अब सीधे E25 लागू करने की तैयारी में है? क्या इंडस्ट्री इसके लिए तैयार है?

विक्रम गुलाटी, टोयोटा के अनुसार, सरकार ने हाल ही में E85 डिस्पेंसिंग स्टेशन लॉन्च किए हैं, जो फ्लेक्स-फ्यूल व्हीकल्स के लिए हैं. फ्यूचर फ्लेक्स-फ्यूल गाड़ियों का है, जो किसी भी रेश्यो के इथेनॉल पर चल सकती हैं. मोनो-फ्यूल का बेस बढ़ाने से पहले हर तरह की टेस्टिंग की जाएगी.

सवाल 7: देश और आम जनता को 20% इथेनॉल ब्लेंडिंग से क्या फायदा हुआ है?

विक्रम गुलाटी, टोयोटा के अनुसार इथेनॉल एक जीरो-कार्बन क्लीन फ्यूल है. सबसे बड़ी बात, हाल ही में जब मिडिल ईस्ट टेंशन के टेंशन की वजह से कच्चे तेल की कीमतें आसमान छू रही थीं, तब देश में 20% इथेनॉल मिक्सिंग ने हमारे आम नागरिक की जेब को बड़ा झटका लगने से बचा लिया. हमने अपनी कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता को कम किया है.

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