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Dominos Pizza Survival Story: 'गत्ते' वाले स्वाद से लेकर बड़ी पिज्जा कंपनी तक, डोमिनोज के फर्श से अर्श की वो कहानी जिसे हार्वर्ड पढ़ाता है

Dominos Pizza Survival Story: कभी गत्ते वाले स्वाद के लिए जाने वाली डोमिनोज कंपनी ने अपनी शानदार प्लानिंग. ऐड कैंपेन के जरिए ग्राहकों के दिलों में जगह बनाई.

Dominos Pizza Survival Story: 'गत्ते' वाले स्वाद से लेकर बड़ी पिज्जा कंपनी तक, डोमिनोज के फर्श से अर्श की वो कहानी जिसे हार्वर्ड पढ़ाता है
Dominos Pizza Survival Story: आज डोमिनोज दुनिया की सबसे बड़ी पिज्जा चेन है, जिसने पिज्जा हट जैसी बड़ी कंपनियों को पीछे छोड़ दिया है.

Dominos Pizza Survival Story: एक आसान सा सवाल... आपके रिश्तेदार या परिवार के सदस्य पिज्जा खाने के लिए प्लान करते हैं तो सबसे पहले क्या सवाल दिमाग में आता है? आपका जवाब होगा कि पास में डोमिनोज का आउटलेट कहां पर है. पिज्जा मतलब डोमिनोज. अगर दूसरी कंपनी का पिज्जा खा लें तो कुछ ना कुछ तो अधूरा लगता है. स्वाद जो डोमिनोज के पिज्जा में है वो कहीं और नहीं है. पर डोमिनोज की ये जर्नी इतनी आसान नहीं थी. साल 2008 में एक समय ऐसा आया कि कंपनी पर ताला लगने ही वाला था 

शेयर बाजार में मंदी का दौर था और पिज्जा की दुनिया में डोमिनोज की हालत पतली थी. न्यूयॉर्क स्टॉक एक्सचेंज पर कंपनी के शेयर गिरते ही जा रहे थे. समस्या स्वाद से जुड़ी थी. सोशल मीडिया पर लोग इसके पिज्जे को गत्ते के स्वाद का बता रहे थे. कंपनी पर दोहरी मार पड़ रही थी. रेवेन्यू लगातार गिर रहा था. पर साल 2009 में कंपनी ने वो किया जिसके बारे में कोई सोच नहीं सकता था. बंद होने की कगार पर खड़ी डोमिनोज आज पूरे विश्वभर में सभी की मनपंसदीदा पिज्जा कंपनी बनी हुई है और रेवेन्यू हर साल रिकॉर्ड तोड़ रहा है. यहां तक की हार्वर्ड में भी इस सफलता की कहानी को पढ़ाया जाता है.

एनडीटीवी इंडिया पर आप उन कंपनियों के बारे में जानेंगे, जिन्होंने बंद होने की कगार पर पहुंचे अपने कारोबार को दुनिया के सामने मिसाल के रूप में खड़ा कर दिया. चलिए शुरू करते हैं.  

डोमिनोज की शुरुआत

साल 1960 में अमेरिका के मिशिगन में टॉम मोनाघन और उनके भाई ने एक छोटा सा पिज्जा स्टोर खरीदा, नाम था डोमिनिक'स. फाइनेंशियल प्रेशर के चलते भाई ने अपना हिस्सा बेच दिया और टॉम अकेले रह गए. साल 1965 में इसका नाम बदलकर डोमिनोज पिज्जा रखा. 1970–80 के दशक में डोमिनोज ने फ्रैंचाइजी मॉडल अपनाया, जिससे वो अमेरिका के बाहर दूसरे देशों में पहुंचा.

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30 मिनट फ्री डिलिवरी 

डोमिनोज को लोगों तक इसकी 30 मिनट फ्री डिलिवरी पॉलिसी ने पहुंचाया. हालांकि इसके स्वाद को लेकर अभी भी नेगेटिव माहौल बना हुआ था, जिसके चलते इसकी शुरुआती दौर में ग्रोथ कम रही. साल 2008 में कंपनी की इसी कमजोरी ने सबसे बड़ी मुश्किल खड़ी कर दी.  

द 'पिज्जा टर्नअराउंड'

2009 में डोमिनोज ने एक अनोखा फैसला लिया. उन्होंने द पिज्जा टर्नअराउंड नाम से एक ऐड कैंपेन शुरू किया, जिसमें उन्होंने अपनी गलती सभी के सामने मानी. टीवी ऐड में उन्होंने ग्राहकों को बताया कि लोग उनके पिज्जा को दुनिया का सबसे खराब पिज्जा बोल रहे थे. यहां तक कि कंपनी के शेफ खुद कैमरे पर आए और मान लिया कि अब तक उनका पिज्जा अच्छा नहीं था. डोमिनोज ने केवल माफी मांगकर बात खत्म नहीं की, बल्कि अपनी 50 साल पुरानी रेसिपी को पूरी तरह बदल दिया. उन्होंने नई सॉस, नया क्रस्ट और शानदार चीज के साथ दोबारा शुरुआत की. उनकी इस सच्चाई और मेहनत का असर हुआ. लोगों को उनकी ईमानदारी पसंद आई और नए स्वाद ने भी ग्राहकों का दिल जीत लिया. ये एक रिस्की कदम था, लेकिन ये पूरी तरह कंपनी के फायदे में गया.

टेक्नोलॉजी का लिया सहारा

डोमिनोज ने फील किया कि फ्यूचर केवल स्वाद में नहीं, बल्कि कितनी आसानी से टेस्टी पिज्जा ग्राहकों तक पहुंच रहा है, इसका है. उन्होंने खुद को एक पिज्जा बेचने वाली टेक कंपनी के रूप में री-ब्रांड किया. उन्होंने दुनिया को पिज्जा ट्रैकर दिया, जिससे ग्राहक घर बैठे देख सकते थे कि उनका पिज्जा ओवन में है या रास्ते में. नतीजन आज आप ट्वीट करके, स्मार्ट टीवी से, या यहां तक कि बिना कुछ बोले भी डोमिनोज ऑर्डर कर सकते हैं.

डोमिनोज का ग्लोबर रेवेन्यू

आज डोमिनोज दुनिया की सबसे बड़ी पिज्जा चेन है, जिसने पिज्जा हट जैसी बड़ी कंपनियों को पीछे छोड़ दिया है. स्टॉक एनालिसिस के अनुसार डोमिनोज पिज्जा ने साल 2025 में दुनिया भर से करीब 4.9 बिलियन अमेरिकी डॉलर की कमाई की. कंपनी का फाइनेंशिल ईयर 28 दिसंबर 2025 को खत्म हुआ. ये कमाई पिछले साल यानी 2024 के मुकाबले लगभग 5 फीसदी ज्यादा थी, जिससे पता चलता है कि कंपनी लगातार आगे बढ़ रही है. इस कमाई में डोमिनोज के अपने स्टोर्स की सेल, फ्रैंचाइज़ी से मिलने वाले पैसे, सप्लाई‑चेन का बिजनेस और दुनियाभर के देशों में चल रहे सभी काम शामिल हैं.

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कंपनी के शेयर ने भरी उड़ान

डोमिनोज के आज दुनियाभर में 20,500 से ज्यादा स्टोर्स हैं. 2008 में जिस कंपनी का शेयर 3 डॉलर का था, वो आज साल 2026 में 320 डॉलर के पार पहुंच गया, यानी नेटफ्लिक्स और गूगल से भी शानदार रिटर्न.

भारत में डोमिनोज का मैजिक

भारत में डोमिनोज को बहुत पसंद किया जाता है. अमेरिका के बाद भारत ही इसका सबसे बड़ा बाजार है. यहां डोमिनोज को जुबिलेंट फूडवर्क्स कंपनी चलाती है. साल 2023-24 में डोमिनोज ने भारत से ₹5,000 करोड़ से भी ज्यादा कमाई की. पूरे देश में इसके 2,000 से ऊपर स्टोर हैं, जिससे साफ है कि लोगों के दिल में डोमिनोज बसा हुआ है.

भारत में डोमिनोज की सफलता का राज

डोमिनोज ने भारतीयों के टेस्ट को देखते हुए पनीर मखनी, इंडी चिकन टिक्का और चोको लावा केक जैसे प्रोडक्ट्स निकाले, जो भारतीयों की जुबान पर चढ़ गए. एक बात और डोमिनोज केवल मेट्रो शहरों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि छोटे शहरों में भी इसने पिज्जा की नई इबारत लिखी.

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