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Property Registration in Delhi: 4 साल पहले GPA पर मकान खरीदा था, रजिस्ट्री नहीं करवाई, अब बेचना है, क्या करें?

दिल्ली में जनरल पावर ऑफ अटॉर्नी (GPA) पर प्रॉपर्टी खरीदने वालों के लिए सरकार ने नियम बेहद सख्त कर दिए हैं. धोखाधड़ी और राजस्व चोरी रोकने के लिए अब सीधे रजिस्ट्री पर पाबंदी है. अगर आपके पास भी सालों पुराना GPA है, तो जानिए कैसे आप नए नियमों के तहत अपने फ्लैट या मकान की पक्की रजिस्ट्री करा सकते हैं.

Property Registration in Delhi: 4 साल पहले GPA पर मकान खरीदा था, रजिस्ट्री नहीं करवाई, अब बेचना है, क्या करें?
दिल्ली में अपने जीपीए पर फ्लैट खरीदी थी, तो उसकी अब रजिस्ट्री करा सकते हैं.
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General Power of Attorney Rules: दिल्ली में कुल 1,731 अनधिकृत कॉलोनियों में से 1,511 कॉलोनियों को रेगुलराइज कर दिया गया है, जिससे वहां रहने वाले लगभग 45 लाख लोगों को सीधे तौर पर मालिकाना हक मिलने का रास्ता साफ हो गया है. हालांकि, इसके साथ ही प्रॉपर्टी की पक्की रजिस्ट्री कराना भी लोगों के लिए एक सिरदर्द बन गया है. दरअसल, इन कॉलोनियों में सभी प्रपोर्टी की खरीद-फरोख्त  जनरल पावर ऑफ अटॉर्नी (GPA) के तहत हुई थी. दरअसल, दिल्ली सरकार ने राजस्व की चोरी, धोखाधड़ी और संपत्ति के आपसी विवादों पर लगाम लगाने के लिए GPA के जरिए होने वाले सीधे ट्रांसफर और रजिस्ट्री पर पूरी तरह से रोक लगा दी है.

सुप्रीम कोर्ट और दिल्ली सरकार के मौजूदा नियमों के मुताबिक, GPA केवल एक अधिकार पत्र है. इससे आपको संपत्ति का कानूनी मालिकाना हक ट्रांसफर नहीं होता. ऐसे में 4 साल पहले ओखला के गफ्फार मंजिल में फ्लैट खरीदने वाले रफीक अहमद काफी परेशान हैं. उन्हें अब अपना फ्लैट बेचना है. दरअसल, उन्होंने सिर्फ पावर ऑफ अटॉर्नी के भरोसे लाइफटाइम की कमाई लगाकर फ्लैट खरीदी थी, वह अब असमंजस में हैं. इस बीच सरकार ने जीपीए के तहत प्रॉपर्टी की खरीद और बिक्री पर पूरी तरह से रोक लगा दी है. इसके साथ ही दिल्ली के मुख्यमंत्री के सख्त निर्देश के बाद अब राजधानी के सभी सब रजिस्ट्रार कार्यालयों में GPA को लेकर बेहद कड़ी स्क्रूटनी लागू कर दी गई है. 

ये हैं रजिस्ट्री के नए नियम

  • इस पूरे मामले पर सिविल वकील सोनाली किशोर का कहना है कि जीपीए पर सरकार की ओर से रोक लगाने से घबराने की जरूरत नहीं है. दरअसल, सरकार के नए नियमों के तहत आप कुछ जरूरी कानूनी कदम उठाकर अपने आशियाने की पक्की रजिस्ट्री करा सकते हैं. 
  • ब्लड रिलेशन के बिना सीधी रजिस्ट्री बंद: अगर पावर ऑफ अटॉर्नी माता-पिता, पति-पत्नी, भाई-बहन या बच्चों जैसे करीबी खून के रिश्तेदारों के अलावा किसी अन्य तीसरे व्यक्ति के नाम पर है, तो सब रजिस्ट्रार उसे सीधे रजिस्टर नहीं करेगा.
  • कलेक्टर ऑफ स्टांप की जांच: गैर रिश्तेदारों वाले ऐसे सभी मामलों को अनिवार्य रूप से कलेक्टर के पास भेजा जाएगा. कलेक्टर 30 दिनों के भीतर इस बात की गहन जांच करेगा कि कहीं इस GPA के पीछे भारी रकम का लेन-देन करके सरकारी स्टैंप ड्यूटी और सेल डीड को छिपाने का प्रयास तो नहीं किया गया है.
  • पूरी स्टैंप ड्यूटी अनिवार्य: यदि जांच में यह साबित होता है कि यह वास्तव में एक कमर्शियल खरीद-बिक्री थी, तो आपको सरकार की ओर से तय की गई पूरी स्टैंप ड्यूटी चुकानी होगी, जिसके बाद ही रजिस्ट्री को मंजूरी मिल पाएगी.

 ऐसे कराएं अपनी प्रॉपर्टी की रजिस्ट्री

अगर आपकी प्रॉपर्टी किसी फ्रीहोल्ड या सरकार की ओर से मान्यता प्राप्त पक्की कॉलोनी में है और आपके पास सिर्फ GPA है, तो सीधे रजिस्ट्री कराने का कोई शॉर्टकट नहीं है. इसके लिए नीचे दिए गए कानूनी प्रक्रिया का पालन करना होगा. 

  1. मूल विक्रेता को ढूंढें: आपको उस व्यक्ति को खोजना होगा, जिसके नाम पर वह प्रॉपर्टी आज भी सरकारी रिकॉर्ड या पुरानी सेल डीड में दर्ज है.
  2. प्रॉपर सेल डीड : मूल विक्रेता की सहमति लेकर आपको सब रजिस्ट्रार ऑफिस में एक नई और फ्रेश 'सेल डीड' बनवानी होगी.
  3. स्टैंप ड्यूटी का भुगतान: इस पूरी प्रक्रिया के दौरान आपको प्रॉपर्टी की मौजूदा सरकारी सर्कल रेट या कीमत के हिसाब से पूरी स्टांप ड्यूटी और रजिस्ट्रेशन फीस सरकार को चुकानी होगी.

मूल विक्रेता के न मिलने या मौत होने पर ये है कानूनी रास्ता

अक्सर देखा जाता है कि सालों पुरानी प्रॉपर्टी के मामले में मूल विक्रेता या तो मिलता नहीं है, या फिर उसकी मौत हो चुकी होती है. वहीं, कई बार ऐसे मामले भी सामने आते हैं कि मूल विक्रेता सहयोग नहीं करता है. ऐसी पेचीदा स्थिति में आपके पास दो विकल्प हैं. 

 उत्तराधिकारियों से संपर्क

 यदि मूल विक्रेता की मृत्यु हो चुकी है, तो उसके कानूनी वारिसों को ढूंढें और उन्हें नई सेल डीड साइन करने के लिए राजी करें.

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 अदालत का दरवाजा खटखटाएं

 यदि वारिस सहयोग न करें या मूल विक्रेता मना कर दें, तो आपको किसी प्रॉपर्टी वकील के जरिए सिविल कोर्ट में 'डिक्लेरेटरी सूट' करना होगा.  इस दौरान अदालत में  सबूत पेश करने के बाद जब कोर्ट आपके पक्ष में आदेश जारी करेगा, तो उसी आदेश के आधार पर सब रजिस्ट्रार आपकी पक्की रजिस्ट्री करेगा.

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