मिडिल-ईस्ट में जारी युद्ध ने पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था को हिलाकर रख दिया है. कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतें रॉकेट की रफ्तार से भाग रही हैं, जिसका सबसे बड़ा असर भारत पर पड़ रहा है. लेकिन चौंकाने वाली बात यह है कि जहा पूरी दुनिया में पेट्रोल-डीजल के दाम 50% तक बढ़ गए हैं, वहीं भारत में सरकार ने टैक्स घटाकर आम आदमी को इस महंगाई के झटके से राहत दी है.
सिर्फ 1 महीने में 78% महंगा हुआ तेल, आंकड़े देख चौंक जाएंगे आप
पेट्रोलियम मंत्रालय (PPAC) के ताजा आंकड़े बताते हैं कि भारतीय बास्केट के लिए कच्चे तेल की कीमतें उम्मीद से कहीं ज्यादा बढ़ गई हैं.फरवरी 2026 में औसत कीमत $69.01 प्रति बैरल थी.24 मार्च 2026 तक औसत कीमत उछलकर $123.15 प्रति बैरल पर पहुंच गई.24 मार्च को कच्चे तेल की कीमत $147.24 प्रति बैरल के रिकॉर्ड स्तर को छू गई .इसका मतलब है कि फरवरी के मुकाबले मार्च में औसत कीमतों में $54.14 (78.45%) का भारी-भरकम इजाफा हुआ है.

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सरकार ने क्यों घटाई एक्साइज ड्यूटी? जानें असली वजह
कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों की वजह से तेल कंपनियों (OMCs) पर भारी दबाव था. कंपनियों को पेट्रोल पर करीब ₹24 प्रति लीटर और डीजल पर ₹30 प्रति लीटर का बड़ा नुकसान हो रहा था. अगर सरकार कदम न उठाती, तो पेट्रोल-डीजल की कीमतें आसमान छूने लगतीं. आम जनता को राहत देने और देश में महंगाई (Inflation) को काबू में रखने के लिए सरकार ने एक्साइज ड्यूटी कम करने का फैसला लिया, ताकि कच्चे तेल की बढ़ी हुई कीमतों के असर को खत्म किया जा सके.
दुनिया भर में तेल की 'आग', हरदीप सिंह पुरी ने बताया हाल
पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने X (ट्विटर) पर दुनिया भर के हालात शेयर किए हैं. उन्होंने बताया कि पिछले एक महीने में पूरी दुनिया में ईंधन के दाम बढ़े हैं...
- दक्षिण-पूर्व एशियाई देश: 30% से 50% की बढ़ोतरी हुई है.
- उत्तरी अमेरिका: 30% का उछाल आया है.
- यूरोप: 20% की बढ़ोतरी हुई है.
- अफ्रीकी देश: 50% तक बढ़ गए दाम.
पीएम मोदी का फैसला, देशवासियों की सुरक्षा या सरकारी खजाना?
पेट्रोलियम मंत्री हरदीप पुरी के मुताबिक, सरकार के पास दो विकल्प थे. या तो बाकी देशों की तरह भारत में भी तेल की कीमतें भारी मात्रा में बढ़ा दी जातीं, या फिर सरकार खुद इस नुकसान को झेलती. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जनता के हितों को सर्वोपरि रखते हुए खुद सरकारी खजाने पर बोझ उठाने का फैसला किया. यह ठीक वैसा ही फैसला है जैसा पिछले 4 सालों में रूस-यूक्रेन युद्ध के समय से लिया जाता रहा है.
सरकार ने सिर्फ टैक्स घटाया ही नहीं, बल्कि यह भी सुनिश्चित किया कि घरेलू तेल का फायदा बाहर न जाए. अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तेल की ऊंची कीमतों को देखते हुए सरकार ने निर्यात टैक्स (Export Tax) लगा दिया है. अब कोई भी रिफायनरी अगर दूसरे देशों को तेल एक्सपोर्ट करती है, तो उसे भारी टैक्स देना होगा. इससे यह सुनिश्चित होगा कि भारत के पास पर्याप्त तेल भंडार रहे और घरेलू बाजार में सप्लाई कम न हो.
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