विज्ञापन
This Article is From Feb 01, 2026

बजट से पहले के सन्नाटे का शोर समझिए, क्‍यों मार्केट के लिए 'नॉन-इवेंट' होकर भी सरप्राइज कर सकती है सरकार

Bdget 2026: सरकार ने सीमित गुंजाइश में काम किया है. मोतीलाल ओसवाल के अनुसार, कम उम्मीदें अपने आप में एक पॉजिटिव हो सकती हैं, क्योंकि ऐसे माहौल में अगर बजट कुछ चुनी हुई पॉजिटिव घोषणाएं कर दे, तो उन्हें मार्केट बेहतर तरीके से रेट कर सकता है.

बजट से पहले के सन्नाटे का शोर समझिए, क्‍यों मार्केट के लिए 'नॉन-इवेंट' होकर भी सरप्राइज कर सकती है सरकार
Non-Event Budget या Market Mover? ब्रोकरेज हाउस क्यों सतर्क हैं
  • यूनियन बजट 2026 से पहले बाजार में अपेक्षित हलचल नहीं दिख रही और इसे ‘नॉन–इवेंट बजट’ माना जा रहा है.
  • पिछले 15 साल के आंकड़े बताते हैं कि बजट वाले दिन निफ्टी की औसत हलचल सिर्फ 0.19 फीसदी रही है.
  • सरकार राजकोषीय अनुशासन बनाए रखते और डिफेंस पर अधिक ध्यान देते हुए पूंजीगत व्यय में सीमित वृद्धि कर सकती है.

यूनियन बजट 2026 ठीक पहले बाजार ऐसा दिख रहा है, जैसे किसी बड़ी हलचल से पहले का सन्नाटा हो. मिडिल क्‍लास, टैक्‍सपेयर्स, युवा, महिलाएं, किसान... हर वर्ग अलग-अलग उम्‍मीदें लगाए हुए है, वहीं दूसरी ओर मार्केट सहमा-सा है. आर्थिक विशेषज्ञ और ब्रोकरेज हाउस इसे ‘नॉन–इवेंट बजट' के रूप में देख रहे हैं. फिर भी डर कम और जिज्ञासा ज्यादा है. उनके मुताबिक, इस बार दांव बड़े टैक्स ब्रेक या मेगा राहत पैकेज पर नहीं, बल्कि इस बात पर लगा है कि क्या वित्त मंत्री बिना शोर मचाए ही खेल की दिशा बदल सकती हैं. डेटा कहता है कि पिछले डेढ़ दशक में बजट डे खुद शायद ही कभी बाजार को हिला पाया है, लेकिन उसके बाद वाला हफ्ता कई बार असली चाल दिखा चुका है. ऐसे में जब जेफरीज से लेकर मोतीलाल ओसवाल तक, इस बजट को ‘लो-इम्पैक्ट इवेंट' मान रहे हैं, सवाल ये है कि क्या कम उम्मीदें ही 'ट्रंप कार्ड' बन सकती हैं और क्या शांत दिखने वाला बजट, बाजार को सबसे ज्यादा चौंका देने वाला साबित होगा?

पिछले 15 साल के आंकड़े बताते हैं कि बजट वाले दिन निफ्टी की औसत हलचल सिर्फ 0.19 फीसदी रही है, जबकि बजट के बाद वाले हफ्ते में रिटर्न इससे सात गुना तक ज्यादा रहे हैं.

​​ग्रोथ सपोर्ट के अलावा और क्‍या-क्‍या तय है?

ब्रोकरेज हाउस जेफरीज (Jefferies) उम्मीद कर रहा है कि सरकार, राजकोषीय अनुशासन की राह से बहुत नहीं हटेगी और फिस्कल कंसोलिडेशन जारी रहेगा, चाहे भले ही रफ्तार कुछ धीमी हो.  जेफरीज का मानना है कि कैपिटल एक्सपेंडिचर करीब 10 फीसदी या उससे थोड़ा ज्यादा बढ़ सकता है, जिसमें डिफेंस पर ज्‍यादा फोकस रहेगा, जबकि नॉन-डिफेंस कैपेक्स 5 से 10 फीसदी की सीमित ग्रोथ दिख सकती है. यानी ग्रोथ सपोर्ट रहेगा, लेकिन किसी जोरदार प्रोत्साहन पैकेज जैसी बड़ी घोषणा की उम्मीद नहीं है.

कम उम्‍मीदों में भी क्‍यों छिपी है गुड न्‍यूज?

मोतीलाल ओसवाल (Motilal Oswal) का भी कमोबेश ऐसा ही मानना है. रिपोर्ट के मुताबिक, निवेशकों की उम्मीदें पहले से ही कम हैं और मार्केट, सरकार से किसी बड़े या ‘स्वीपिंग' कदम की उम्मीद नहीं कर रहा. ब्रोकरेज का मानना है कि सरकार ने फिस्कल टारगेट, जियो-पॉलिटिकल टेंशन और ग्लोबल लिक्विडिटी जैसे दबावों के बीच सीमित गुंजाइश में काम किया है. उनके अनुसार, कम उम्मीदें अपने आप में एक पॉजिटिव हो सकती हैं, क्योंकि ऐसे माहौल में अगर बजट कुछ चुनी हुई पॉजिटिव घोषणाएं कर दे, तो उन्हें मार्केट बेहतर तरीके से रेट कर सकता है.

कोई रिफॉर्म आया तो असर ग्रैजुअल होगा 

एमके ग्‍लोबल (Emkay Global) ने बजट को साफ तौर पर 'लो–इम्पैक्ट इवेंट' बताया है. फर्म का कहना है कि ग्रोथ को सपोर्ट करने वाले ज्यादातर बड़े फैसले पिछले साल ही उठाए जा चुके हैं, जैसे कि इनकम टैक्‍स रिफॉर्म, GST 2.0 रिफॉर्म, इसलिए नई बड़ी घोषणाओं की गुंजाइश सीमित है. एमके का आकलन है, 'कोई भी नया रिफॉर्म अगर आया भी, तो वह ग्रैजुअल होगा, जिसका असर लंबी अवधि में दिखेगा. सेक्टर-लेवल स्टॉक परफॉर्मेंस के लिए अब ज्‍यादा अहम यह रहेगा कि कैपिटल एक्सपेंडिचर किन सेक्टरों में और किस कंपोजिशन के साथ जाता है, न कि कुल रकम कितनी है.'

कंसॉलिडेशन मोड में बाजार, लेकिन...

तकनीकी एनालिसिस के मोर्चे पर बजाज ब्रोकिंग (Bajaj Broking) का अनुमान है कि अभी बाजार कंसॉलिडेशन मोड में है और अगले हफ्ते बजट, RBI पॉलिसी और ग्लोबल संकेतों की वजह से वोलैटिलिटी ऊंची बनी रह सकती है. उनके मुताबिक निफ्टी 25,000–25,500 की रेंज में फंसा रह सकता है और कोई साफ दिशा तभी बनेगी जब यह इस दायरे से निर्णायक रूप से (Decisively) ऊपर या नीचे निकलेगा.

मार्केट के लिए स्थिरता वाला विकल्‍प

पॉजिटिव इकोनॉमिक सर्वे के बाद हफ्ते के बीच में कुछ मजबूती जरूर दिखी, लेकिन बजट से पहले विदेशी निवेशकों की बिकवाली, रुपये की कमजोरी और ग्लोबल लिक्विडिटी को लेकर आशंकाओं ने सेंटिमेंट फिर दबा दिया. उनके अनुसार, घरेलू बुनियादी कारक बाजार को नीचे से सहारा दे रहे हैं, लेकिन बाहरी अनिश्चितताएं इसे ऊपर जाने से रोक रही हैं, इसलिए एक शांत, बड़े सरप्राइज से रहित बजट फिलहाल बाजार के लिए बुरा नहीं, बल्कि स्थिरता वाला विकल्प हो सकता है.
 

पूरी स्टोरी पढ़ें

NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं

फॉलो करे:
Union Budget 2026, Union Budget 2026 LIVE, Budget 2026 Impact On Stocks, Budget2026
Listen to the latest songs, only on JioSaavn.com