तेल मार्केटिंग कंपनियों ने ATF की कीमतों पर चंद घंटों के भीतर यू-टर्न ले लिया है. पहले जहां कीमतें 100 फीसदी से ज्यादा बढ़ा दी थी, अब सरकार के हस्तक्षेप के बाद उसे महज 8 फीसदी कर दिया गया है. तेल मार्केटिंग कंपनियों ने पहले ATF के दाम 96 हजार से बढ़ाकर 2.7 लाख रुपये/किलोलीटर कर दिया था, इसे अब 1.04 लाख रुपये/लीटर के करीब कर दिया है. इससे पहले आमलोगों के बीच भी एटीएफ की कीमतें दोगुनी से ज्यादा होने को लेकर ऊहापोह वाली स्थिति थी. लोगों के मन में सबसे बड़ा सवाल यही घूम रहा था कि जेट फ्यूल की कीमतें इस हद तक बढ़ने का असर क्या हवाई सफर पर भी पड़ेगा.
अगर कीमतें 100 फीसदी बढ़ी होतीं तो फ्लाइट में सफर काफी हद तक महंगा हो जाता. अब सरकार के हस्तक्षेप के बाद तेल कंपनियों ने बढ़ी हुई कीमतें काफी हद तक वापस ले ली हैं. अब कीमतें करीब 96,000 रुपये/किलोलीटर से महज 8,000 रुपये के करीब ही बढ़ाई गई है, जिससे हवाई यात्रियों पर भी इसका उतना बोझ नहीं डाला जाएगा और सफर अपेक्षाकृत महंगा साबित नहीं होगा.
पेट्रोलियम और नागरिक उड्डयन मंत्रालय का हस्तक्षेप
पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर बताया कि अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों और हॉर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) के बंद होने के कारण 1 अप्रैल को ATF की कीमतों में 100% से अधिक की वृद्धि की संभावना थी. घरेलू यात्रा लागत को सुरक्षित रखने के लिए नागरिक उड्डयन मंत्रालय के परामर्श से केवल आंशिक और चरणबद्ध वृद्धि (सिर्फ ₹15/लीटर) का बोझ ही घरेलू एयरलाइंस पर डाला गया है. विदेशी रूटों को अंतरराष्ट्रीय दरों के अनुसार ही पूरा भुगतान करना होगा.
अब क्या हैं दिल्ली-मुंबई में ATF के दाम?
दिल्ली में ATF की कीमतें 1,04,927 रुपये/लीटर, कोलकाता में ATF की कीमतें 1,09,450 रुपये/लीटर, चेन्नई में ATF की कीमतें 1,09,873 रुपये/लीटर, जबकि मुंबई में ATF की कीमतें अब महज 98,247 रुपये/लीटर होगी.

घरेलू एयरलाइंस पर बहुत कम बोझ, यात्रियों को राहत
घरेलू एयरलाइंस के लिए इस बढ़ोतरी को सीमित रखते हुए केवल 8.5 प्रतिशत तक ही रखा गया है. घरेलू एयरलाइंस अब अन्य ऑपरेटरों (जैसे नॉन-शेड्यूल्ड, एडहॉक और चार्टर) की तुलना में बहुत कम भुगतान करेंगी, जबकि अन्य ऑपरेटटर्स के लिए कीमतें 1,10,703.08 रुपये/किलोलीटर (114.5%) बढ़कर 2,07,341.22 रुपये/किलोलीटर हो गई हैं.
सरकारी हस्तक्षेप और संतुलित दृष्टिकोण
जेट फ्यूल की कीमतें दो दशक पहले ही नियंत्रण मुक्त (Deregulated) कर दी गई थीं और तब से ये अंतरराष्ट्रीय बेंचमार्क कीमतों के अनुसार तय होती हैं. समाचार एजेंसी PTI ने इंडस्ट्री सूत्रों के हवाले से बताया है कि मिडिल ईस्ट युद्ध के कारण वैश्विक ऊर्जा कीमतों में आई भारी तेजी को देखते हुए सरकार और सरकारी तेल कंपनियों ने एक 'कैलिब्रेटेड अप्रोच' (संतुलित दृष्टिकोण) अपनाने का फैसला किया है. जहां विदेशी एयरलाइंस बाजार दरों पर भुगतान करेंगी, वहीं घरेलू एयरलाइंस के लिए कीमतों को नियंत्रित रखा गया है.
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