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AI Impact Summit 2026: Anthropic के CEO ने भारत को बताया दुनिया का सबसे बड़ा टेस्टिंग हब, बेंगलुरु में खुला नया ऑफिस

Anthropic के CEO डारियो अमोदेई ने माना कि AI की वजह से आर्थिक स्तर पर कुछ बदलाव और चुनौतियां भी आ सकती हैं. इसके लिए वे भारत सरकार के साथ मिलकर काम करने को तैयार हैं.

AI Impact Summit 2026:  Anthropic के CEO ने भारत को बताया दुनिया का सबसे बड़ा टेस्टिंग हब, बेंगलुरु में खुला नया ऑफिस
Anthropic के CEO ario Amodei ने कहा कि अगले कुछ सालों में AI इंसानों की सोचने-समझने की क्षमता को भी पीछे छोड़ सकता है.
नई दिल्ली:

Ai impact Summit News: दुनिया की बड़ी AI कंपनी Anthropic के CEO डारियो अमोदेई (Dario Amodei) ने भारत को लेकर एक बहुत बड़ा बयान दिया है. दिल्ली में आयोजित 'इंडिया AI इम्पैक्ट समिट' के दौरान उन्होंने कहा कि भारत अब दुनिया के लिए AI का सबसे बड़ा टेस्टिंग हब बन चुका है. डारियो ने प्रधानमंत्री मोदी का शुक्रिया अदा करते हुए कहा कि भारत में काम करने की जो एनर्जी और जोश उन्होंने देखा है, वैसा दुनिया में और कहीं नहीं है. उनके मुताबिक, भारत की डिजिटल ताकत और यहाँ के डेवलपर्स की काबिलियत पूरी दुनिया के लिए एक मिसाल है.

बेंगलुरु में खुला नया ऑफिस 

भारत के प्रति अपनी गंभीरता दिखाते हुए डारियो ने ऐलान किया कि Anthropic ने अब आधिकारिक तौर पर बेंगलुरु में अपना ऑफिस खोल दिया है. कंपनी ने भारत के कामकाज को संभालने के लिए इरीना घोष को मैनेजिंग डायरेक्टर (MD) नियुक्त किया है, जिनके पास बिजनेस का 30 साल का लंबा अनुभव है. 

डारियो अमोदेई ने खुलासा किया कि उनकी कंपनी के सबसे लोकप्रिय AI मॉडल 'Claude' (क्लॉड) के इस्तेमाल के मामले में अमेरिका के बाद भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा मार्केट बन गया है.

Infosys के साथ मिलाया हाथ

इस समिट के दौरान Anthropic ने देश की दिग्गज IT कंपनी इन्फोसिस (Infosys) के साथ एक बड़ी साझेदारी का ऐलान किया है. इस डील के तहत इन्फोसिस और Anthropic मिलकर बैंकिंग और टेलीकॉम जैसे सेक्टर के लिए खास AI टूल्स तैयार करेंगे. डारियो का मानना है कि इन्फोसिस जैसी कंपनियों के पास काम का जो लंबा अनुभव है, वह AI मॉडल्स को असली दुनिया की मुश्किलों को सुलझाने में मदद करेगा. यह पार्टनरशिप भारतीय इंड्स्ट्री के काम करने के तरीके को पूरी तरह बदल सकती है.

इंसानों से भी ज्यादा समझदार होगा AI

डारियो अमोदेई ने एक हैरान करने वाली बात भी कही. उन्होंने बताया कि जिस तेजी से टेक्नोलॉजी बढ़ रही है, अगले कुछ सालों में AI इंसानों की सोचने-समझने की क्षमता को भी पीछे छोड़ सकता है. उन्होंने इसे 'डेटा सेंटर में मौजूद जीनियस लोगों का देश' कहा है. 

डारियो अमोदेई के अनुसार, यह टेक्नोलॉजी फ्यूचर में बड़ी बीमारियों को जड़ से खत्म करने और गरीबी मिटाने में मददगार साबित हो सकती है. हालांकि, उन्होंने इसके गलत इस्तेमाल और नौकरियों पर पड़ने वाले असर को लेकर अपनी चिंता भी जाहिर की है.

एजुकेशन और खेती में दिखेगा AI का जादू

Anthropic केवल बड़ी कंपनियों के साथ ही नहीं, बल्कि आम लोगों के फायदे के लिए भी काम कर रही है. डारियो अमोदेई ने बताया कि वे भारत के कई बड़े संस्थानों और एनजीओ जैसे स्टेप फाउंडेशन और प्रथम के साथ मिलकर काम कर रहे हैं. इसका मकसद खेती में नई टेक्नोलॉजी लाना, डिजिटल एजुकेशन को बेहतर बनाना और भारत की रीजनल भाषाओं में AI को ज्यादा असरदार बनाना है. इससे गांव के किसान से लेकर स्कूल के बच्चे तक, हर किसी को AI टेक्नोलॉजी का सीधा फयादा मिल सकेगा.

नौकरियों और आर्थिक बदलाव पर रहेगी नजर

CEO डारियो अमोदेई ने माना कि AI की वजह से आर्थिक स्तर पर कुछ बदलाव और चुनौतियां भी आ सकती हैं. इसके लिए वे भारत सरकार के साथ मिलकर काम करने को तैयार हैं. Anthropic अपने खास 'इकोनॉमिक फ्यूचर्स प्रोग्राम' के जरिए यह समझने की कोशिश कर रहा है कि AI से नौकरियों पर क्या असर पड़ रहा है. उन्होंने कहा कि उनका मकसद यह सुनिश्चित करना है कि AI से होने वाली तरक्की का फायदा भारत के हर नागरिक को मिले और आर्थिक बदलाव का यह समय बिना किसी बड़ी परेशानी के निकल जाए.

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