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AI का असर: डिग्री वाले बेहाल, स्किल्ड वर्कर मालामाल, एंथ्रोपिक की स्टडी कर देगी आपको हैरान

Anthropic AI Study: एंथ्रोपिक की रिपोर्ट के अनुसार, AI अब सॉफ्टवेयर डेवलपर्स और वकीलों की जगह ले रहा है. एंट्री-लेवल नौकरियों में 14% की कमी आई है, जबकि फिजिकल लेबर वाले काम पूरी तरह सेफ हैं.

AI का असर: डिग्री वाले बेहाल, स्किल्ड वर्कर मालामाल, एंथ्रोपिक की स्टडी कर देगी आपको हैरान

Anthropic AI Study: अगर आपने पढ़ाई पर बहुत पैसा लगाया है और आज एसी वाले ऑफिस में बैठकर कंप्यूटर पर काम करते हैं, जैसे डेटा देखना, कोड लिखना या फाइलें संभालना. तो थोड़ा अलर्ट हो जाइए. जिस एआई को हम आने वाले समय की चीज समझते थे, वो अब आ चुकी है और अब धीरे‑धीरे इंसानों का काम खुद करने लगी है. एंथ्रोपिक की एक स्टडी में एआई से किन लोगों की नौकरियों पर खतरा है, इसके बारे में बताया है.

एंथ्रोपिक की रिपोर्ट क्या है?

एआई बनाने वाली कंपनी एंथ्रोपिक ने एक रिसर्च पेपर जारी किया है, जिसका नाम है, “Labor market impacts of AI: A new measure and early evidence”. आपको बता दें ति ये कोई अनुमान या फ्यूचर वाली कहानी नहीं है. ये रिपोर्ट असल डेटा पर बेस्ड है, यानी करोड़ों लोगों ने क्लाउड एआई से जो बातें कीं, उनका एनालिसिस.

रिसर्च पेपर की खास बात क्या है?

दरअसल अब तक माना जाता था कि एआई से सबसे ज्यादा खतरा फैक्ट्री वर्कर, लो-स्किल नौकरियों और रूटीन काम करने वालों को है. लेकिन इस रिपोर्ट के अनुसार एआई अब उन लोगों के काम करने के तरीके बदल रहा है, जिन्हें सबसे सेफ माना जाता था.

किन लोगों पर सबसे ज्यादा असर?

Anthropic की इस रिपोर्ट के अनुसार, AI का सबसे ज्यादा असर उन लोगों पर पड़ रहा है जो आम लोगों से 47% ज्यादा सैलरी पाते हैं, जिनके पास ग्रेजुएशन या मास्टर डिग्री है, जो ऑफिस, टेक, रिसर्च, मैनेजमेंट में काम करते हैं. एआई अभी मशीन और कैलकुलेशन वाले काम बहुत जल्दी करता है. लगभग सारा काम खुद ही कर लेता है. लेकिन रोजमर्रा की जिंदगी के कामों में, जहां इंसान जैसी समझ और सोच चाहिए, वहां ये अभी थोड़ा ही मदद कर पाता है. जैसे ईमेल लिखना, फाइल संभालना या टाइम टेबल बनाना. हालांकि ये रिपोर्ट बताती है कि ये तो सिर्फ शुरुआत है. आगे चलकर एआई और समझदार होगा और धीरे-धीरे मुश्किल काम भी करने लगेगा.

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एंथ्रोपिक के आंकड़े बताते हैं कि आज के समय में एआई किन नौकरियों में सबसे ज्यादा इस्तेमाल हो रहा है.

  • कंप्यूटर प्रोग्रामर (74.5%)
  • कस्टमर सर्विस (70.1%)
  • डेटा एंट्री (67.1%)
  • मेडिकल रिकॉर्ड स्पेशलिस्ट (66.7%)
  • मार्केट रिसर्च एनालिस्ट (64.8%)

आगे बढ़ने के लिए नई स्किल्स जरूरी

सीधी बात है एआई आने से पहले लगता था कि वकील, फाइनेंस एक्सपर्ट और सॉफ्टवेयर डेवलपर AI से सेफ रहेंगे. लेकिन अब वहीं नौकरियां सबसे ज्यादा बदल रही हैं. मतलब, सिर्फ पढ़ाई काफी नहीं है. अब आगे बढ़ने के लिए नई स्किल्स सीखना जरूरी हो गया है.

एंट्री लेवल जॉब्स हुईं कम

करियर की शुरुआत में मिलने वाली नौकरियाँ धीरे‑धीरे खत्म हो रही हैं. रिपोर्ट के अनुसार, ChatGPT आने के बाद 22 से 25 साल के युवाओं के लिए अच्छी नौकरियां करीब 14% कम हो गई है. यहां एक बात गौर करने की है कि एंट्री लेवल जॉब्स सिर्फ पैसे के लिए नहीं होतीं, वो काम सीखने का मौका देती हैं, जैसे कोई नया वकील या नया एनालिस्ट शुरू में छोटी जिम्मेदारियों से सीखता है.

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स्टडी के अनुसार, अमेरिका के करीब 30% लोगों की नौकरियों पर AI का कोई खास असर नहीं है. इनमें रसोइए, मैकेनिक, बारटेंडर और डिशवॉशर जैसे काम शामिल हैं. पहले कहा जाता था कि मुकाबला हाई स्किल और लो स्किल नौकरियों के बीच है. अब असली फर्क है डिजिटल काम और फिजिकल काम के बीच में. यही वजह है कि जिस सॉफ्टवेयर इंजीनियर ने लाखों रुपये खर्च करके पढ़ाई की, उसकी नौकरी AI से ज्यादा खतरे में है. जबकि वही बारटेंडर, जो आपकी पार्टी में ड्रिंक्स परोस रहा था, उसकी नौकरी सबसे ज्यादा सेफ है.

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