छत्तीसगढ़ के सरगुजा जिले में जो इलाका केवल कोयला खदान के तौर पर जाना जाता रहा, उसे बड़े पैमाने पर पौधरोपण करके हरे-भरे इलाके में बदला जा रहा है. अदाणी एंटरप्राइजेज ने पारसा ईस्ट और कांता बासन (PEKB) खदान के 568 हेक्टेयर क्षेत्र में 16 लाख से ज्यादा पेड़-पौधे लगाए हैं. इस हरियाली प्रोजेक्ट ने यह साबित कर दिया है कि कोयला निकालने के बाद भी खदान की जमीन को फिर से पहले जैसा सुंदर बनाया जा सकता है. कंपनी के अधिकारियों ने बताया कि कंपनी राजस्थान राज्य विद्युत उत्पादन निगम लिमिटेड (RVUNL) के लिए 'डेवलपर और ऑपरेटर' के रूप में इस खदान का संचालन करती है.
40 लाख से ज्यादा पेड़ लगाने का लक्ष्य
कंपनी का लक्ष्य इस दशक के अंत (2030) तक पेड़ों की संख्या को बढ़ाकर 40 लाख (4 मिलियन) से अधिक करना है, ताकि खनन वाली जमीन को सुधारा जा सके और क्षेत्र में बायोडायवर्सिटी यानी जैव विविधता को बढ़ावा मिले.
इस कार्यक्रम के तहत, खनन गतिविधियों के लिए काटे गए हर 1 पेड़ के बदले 40 पेड़ लगाए जा रहे हैं. यहां के स्थानीय पेड़ जैसे साल, महुआ, तेंदू, अमलतास और सिद्धा के पौधे फिर से रोपे गए हैं, और कंपनी के अनुसार इनमें से लगभग 88 प्रतिशत पौधे सुरक्षित और जीवित हैं.
केंद्र सरकार ने भी की तारीफ
केंद्रीय कोयला मंत्रालय ने लिंक्डइन (LinkedIn) पर एक पोस्ट में PEKB कोयला खदानों में किए गए इस सुधार को प्रतिबद्धता का एक शानदार उदाहरण बताया है.
मंत्रालय ने कहा, 'कोयला निकालने के बाद किसी खदान का सफर खत्म नहीं होता, बल्कि यहां से पर्यावरण को सुधारने और सकारात्मक बदलाव की शुरुआत होती है. छत्तीसगढ़ के सरगुजा में स्थित पारसा ईस्ट और कांता बासन (PEKB) खदान इस प्रतिबद्धता का एक बेहतरीन उदाहरण है.'
पोस्ट में आगे कहा गया कि कभी सक्रिय खनन स्थल रही यह जगह अब एक हरे-भरे इलाके में बदल चुकी है, जो यह दिखाती है कि जिम्मेदार खनन और पर्यावरण संरक्षण दोनों एक साथ चल सकते हैं. 'आज PEKB खदान इस बात का जीता-जागता सबूत है कि खदान बंद होने के बाद भी एक हरे-भरे और बेहतर भविष्य का रास्ता खुल सकता है.'
एक नर्सरी भी तैयार की, जहां 5 लाख पौधे
अदाणी ग्रुप ने इस इलाके में एक 3.5 हेक्टेयर की नर्सरी भी तैयार की है, जिसमें लगभग 5 लाख पौधे हैं. साथ ही, कंपनी ने इस क्षेत्र में साल (Sal) के जंगलों को दोबारा उगाने में सफलता हासिल की है.
अधिकारियों ने बताया कि कंपनी ने सरगुजा, कोरिया, बलरामपुर और सूरजपुर वन प्रभागों में 4,000 हेक्टेयर से अधिक जमीन पर क्षतिपूरक वनीकरण (कम्पेंसेटरी अफॉरेस्टेशन) किया है. इसके अलावा, वनीकरण, वन्यजीव प्रबंधन और अन्य पर्यावरण उपायों के लिए छत्तीसगढ़ सरकार के पास 259 करोड़ रुपये से अधिक की राशि जमा की गई है.
उन्होंने बताया कि जमीन को सुधारने का यह प्रयास एक बड़े कार्यक्रम का हिस्सा है, जिसमें खनन के साथ-साथ पर्यावरण सुधार और शिक्षा, स्वास्थ्य व आजीविका से जुड़े सामुदायिक विकास के काम शामिल हैं. कंपनी वन और पर्यावरण मंजूरी की सभी शर्तों का पालन करती है और राज्य व केंद्र सरकारों को नियमित रूप से अपनी रिपोर्ट सौंपती है.
पर्यावरण से जुड़े इन प्रयासों के अलावा, अदाणी नेचुरल रिसोर्सेज खनन क्षेत्र के स्थानीय समुदायों को शिक्षा, स्वास्थ्य और आजीविका विकास से जुड़े कार्यक्रमों के जरिए लगातार मदद दे रहा है.
(Disclaimer: New Delhi Television is a subsidiary of AMG Media Networks Limited, an Adani Group Company.)
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