8th Pay Commission Update: अगर आप केंद्रीय कर्मचारी या पेंशन का फायदा लेते हैं और अपनी सैलरी या पेंशन बढ़ने का इंतजार कर रहे हैं, तो आपके लिए एक बड़ी खबर है. 8वां केंद्रीय वेतन आयोग अब तेजी से काम कर रहा है और उसने जून 2026 में होने वाली बैठकों का पूरा कार्यक्रम जारी कर दिया है. इसी क्रम में आयोग लखनऊ का दौरा भी करेगा, जहां वो कर्मचारियों और यूनियनों से सीधे बातचीत करेगा, जिससे उनकी मांगों और सुझावों को समझकर आगे की रिपोर्ट तैयार की जा सके.

8th Pay Commission Update
लखनऊ में कब जमेगा आयोग का डेरा?
ऑफिशियल नोटिस की बात करें तो, 8वां वेतन आयोग 22 और 23 जून 2026 को लखनऊ का दौरा करेगा. इस दो दिन के दौरे में आयोग केंद्र सरकार से जुड़े विभागों, संस्थानों, कर्मचारी यूनियनों और अलग-अलग संगठनों से मुलाकात करेगा. इन बैठकों के जरिए ये समझना है कि कर्मचारियों की क्या मांगें हैं, उन्हें वेतन से जुड़ी क्या समस्याएं आ रही हैं और वो आगे क्या उम्मीद कर रहे हैं, जिससे उसी के आधार पर फैसला लिया जा सके.
अपॉइंटमेंट के लिए 10 जून तक का है मौका
अगर आपकी यूनियन या संगठन भी अपनी बात 8वें वेतन आयोग के सामने रखना चाहता है, तो इसके लिए 10 जून 2026 से पहले आयोग की आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर ऑनलाइन अपॉइंटमेंट के लिए अप्लाई करना होगा. ध्यान रखें कि अप्लाई करते समय आपके पास यूनिक मेमो आईडी होना जरूरी है, जो तभी मिलती है जब आपका संगठन वेबसाइट पर बैठक में शामिल होने की जानकारी देता है. आयोग ने ये भी साफ किया है कि बैठक की आखिरी तारीख और जगह की जानकारी सिर्फ उन्हीं संगठनों को दी जाएगी, जिन्हें चुना जाएगा.
दूसरे राज्यों के कर्मचारी अभी न करें जल्दबाजी
वेतन आयोग ने उत्तर प्रदेश के बाहर के राज्यों के संगठनों को सलाह दी है कि वो लखनऊ दौरे के लिए अपॉइंटमेंट ना मांगें. आयोग ने कहा कि दूसरे राज्यों के लिए आने वाले समय में अलग से बैठकें की जाएंगी.
कब आएगी 8वें वेतन आयोग की रिपोर्ट?
8वें वेतन आयोग की सिफारिशों का असर देश के लाखों केंद्र के कर्मचारियों और पेंशन होल्डर्स पर पड़ेगा, क्योंकि इससे उनकी सैलरी, भत्ते और पेंशन का पूरा ढांचा बदल सकता है. सरकार ने आयोग को अपनी रिपोर्ट देने के लिए 18 महीने का समय दिया है. अगर रिपोर्ट समय पर नहीं आती है, तो कर्मचारियों को कुछ राहत देने के लिए बीच में अंतरिम रिपोर्ट भी जारी की जा सकती है. आयोग नवंबर 2025 में तय किए नियमों के अनुसार काम कर रहा है और इसमें देश की आर्थिक स्थिति, विकास कार्यों के लिए पैसे की जरूरत और प्राइवेट सेक्टर की सैलरी जैसे बड़े मुद्दों को ध्यान में रखा जा रहा है. इसलिए अब सभी की नजर जून में होने वाली इन बैठकों पर टिकी हुई है.
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