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This Article is From Aug 01, 2018

आठ लाख छात्रों के साथ रेलवे ऐसा क्यों कर रही है?

Ravish Kumar
  • ब्लॉग,
  • Updated:
    अगस्त 01, 2018 02:18 am IST
    • Published On अगस्त 01, 2018 02:10 am IST
    • Last Updated On अगस्त 01, 2018 02:18 am IST
रेलवे ख़ुद मानती है कि आठ लाख छात्रों के परीक्षा केंद्र पांच सौ किमी से दूर हैं. यह नहीं बताती कि पांच सौ से पंद्रह सौ या दो हज़ार किमी दूर हैं लेकिन प्रेस विज्ञप्ति में पांच सौ से ज़्यादा दूर लिख देने से दो हज़ार किमी की दूरी वाला भाव चला जाता है. जो रेल का परीक्षा से नहीं जुड़े हैं उन्हें झांसा तो मिल जाता है मगर जो परीक्षा दे रहे हैं उन्हें सच्चाई पता है. यह कहा गया है कि जिनके केंद्र दूर हैं उन्हें बेहतर यातायात की सुविधा वाले शहरों में भेजा जा रहा है. बिहार के सिवान और छपरा से तिरुपति जाना कैसे सरल है और बेहतर यातायात से जुड़ा है, रेल अधिकारी ही बता सकते हैं. सीवान से तिरुपति जाने वाला छात्र आठ घंटे की यात्रा तय कर पटना पहुंचेगा. वहां से आठ घंटे लगातार कोलकाता और अगली ट्रेन के लिए सात आठ घंटे इंतज़ार करेगा. फिर कोलकात से 21 घंटे की यात्रा पर निकलेगा तिरुपति के लिए. इस बीच अगर ट्रेनें लेट होती चली गईं तो उसकी सांस अटक जाएगी. इस तरह वह 21 अगस्त की परीक्षा के लिए 18 अगस्त को सीवान से निकलेगा और 20 अगस्त की रात तिरुपति पहुंचेगा. इसी तरह गोरखपुर वाला मुंबई जाएगा और बेंगलुरु वाला भोपाल आएगा. सीकर वाला अमृतसर जाएगा.

ट्रेन में टिकट नहीं है. टिकट के लिए पैसे का दबाव है. रेलवे को सब नहीं देखता है उसे सब कुछ प्रतिशत में दिखता है इसलिए रेलवे ने बताया कि सिर्फ़ 17% लोगों के ही सेंटर 5 सौ किलोमीटर से दूर दिए जा रहे हैं. मगर रेलवे ने ये नहीं बताया कि 17 प्रतिशत का मतलब आठ लाख है. आठ लाख छात्रों को पांच सौ किलोमीटर से लेकर दो हज़ार किलोमीटर दूरी के सेंटर देने का क्या तुक है? क्या उनके लिए दो चार पांच दिन अतिरिक्त रूप से परीक्षा नहीं हो सकती थी? यह दलील भी विचित्र है कि जिन्होने देरी से फ़ॉर्म भरे हैं, उन्हीं का सेंटर दूर है. वैसे तो मुझे कई छात्रों ने बताया कि उन्होंने शुरू में फ़ॉर्म भरा था मगर उनका सेंटर भी बहुत दूर है. क्या रेलवे ने छात्रों को बताया था कि देरी से भरने का क्या मतलब है? उन्हें फ़ॉर्म पहले दो दिन में ही भर देने चाहिए वरना उनका सेंटर बहुत दूर पड़ सकता था? दो साल से रेलवे इस बात का प्रचार कर रहा है कि दुनिया की सबसे बड़ी ऑनलाइन परीक्षा होने जा रही है और जब परीक्षा होने जा रही है तब उसकी ये हालत है कि रेलवे के पास परीक्षा आयोजित कराने के केंद्र नहीं हैं.

क्या ये केन्द्र बेंगलुरु में भी नहीं है वहां के छात्रों को चंडीगढ़ और भोपाल भेजा जा रहा है. मैं नीचे कुछ छात्रों के मैसेज की कॉपी पोस्ट कर रहा हूं. आप देखिए कि वे किस मानसिक स्थिति से गुज़र रहे हैं. आख़िर 47,56,000 में से 8 लाख को दूर भेजने का क्या मतलब है? रेलवे ने ये बंटवारा क्यों किया? क्या इसलिए कि बहुत से छात्र गरीबी के कारण दूर के सेंटर पर न जा सकें?
 
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एक समस्या और है. दूर सेंटर के कारण जो आसपास की दूसरी परीक्षाएं हैं, यूनिवर्सिटी और नौकरी की, उससे छात्र वंचित हो सकते हैं. मुझे कई छात्रों ने इस बारे में भी लिखा है कि उनकी दूसरी परीक्षाएं छूट जा रही है. इससे उनके अवसरों पर बहुत बुरा असर पड़ रहा है.

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