मोदी सरकार का टीका अभ‍ियान क्या हेडलाइन मैनेजमेंट के लिए ज्यादा?

क्या सारा मकसद 21 जून को एक रिकार्ड बनाना ही था? अगर नहीं था तो फिर 22 जून को सब कुछ ठंडा क्यों पड़ गया? 22 जून को उसका आधा भी उत्साह नहीं दिखा

मोदी सरकार का टीका अभ‍ियान क्या हेडलाइन मैनेजमेंट के लिए ज्यादा?

टीका अभियान को लेकर कुछ सवाल उठ रहे हैं. क्या इसे सफल बनाने के लिए कुछ राज्यों में कुछ दिनों से टीके की रफ्तार कम की गई? ताकि टीका बचा कर 21 जून को लगाया जाए जिससे कि नंबर बड़ा लगे? दूसरा क्या सारा मकसद 21 जून को एक रिकार्ड बनाना ही था? अगर नहीं था तो फिर 22 जून को सब कुछ ठंडा क्यों पड़ गया? 22 जून को उसका आधा भी उत्साह नहीं दिखा. उत्साह नहीं था या टीका नहीं था? 21 जून को चार बजे तक 47 लाख टीके लग चुके थे. 22 जून को करीब 6 लाख 23 लाख टीके ही लग पाए थे. चार बजे तक. इतने लोगों के मरने और अर्थव्यवस्था के तबाह हो जाने के बाद भी अगर इस अभियान को ईवेंट मैनेजमेंट की तरह पेश करना था तब इसका मतलब यही है कि हम कोविड को लेकर हेडलाइन हड़पने की मानसिकता से आगे नहीं बढ़ सके हैं. उसकी भी विडंबना देखिए कि वो हेडलाइन पुरानी पड़ चुकी है.

मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने 21 जून के लिए समां ही बांध दिया था. उत्सव के उत्साह अनुकूल साज-सज्जा की गई थी ताकि वातावरण से भी लगे कि दुनिया का कोई अद्भुत टीका अभियान शुरू हुआ है. राज्य में रिकार्ड बनने जा रहा है. इन सजवाटों से यह सवाल गायब था कि मुफ्त टीका अभियान तो दुनिया में पहले दिन से चल रहा है, भारत में लेट शुरू होने का ऐसा जश्न क्यों मनाया जा रहा है? इतना जोश तो 16 जनवरी को शुरू हुए टीका अभियान को लेकर भी नहीं था. मध्य प्रदेश ने एक दिन पहले से ऐलान कर रखा था कि दस लाख टीका लगाएंगे लेकिन राज्य ने करीब सत्रह लाख टीका लगाने का रिकॉर्ड छू लिया. भारत में अब तब का यह सबसे बड़ा रिकॉर्ड है. लेकिन इस रिकॉर्ड के पीछे का रिकॉर्ड संदिग्ध नज़र आता है. यहां सजा धजा गुब्बारा फट गया है. इस रिकॉर्ड को बना लेने के बाद भी मध्य प्रदेश टीका लगाने के मामले में भारत के राज्यों में सातवें नंबर पर है.

सवाल पूछा जा रहा है कि क्या मध्य प्रदेश ने एक दिन की इस उपलब्धि को हासिल करने के लिए कई दिनों से टीका अभियान को धीमा कर दिया था? आखिर जो राज्य एक दिन में 17 लाख टीके लगा सकता है वह एक दिन पहले 692 डोज़ लगा रहा था. ऐसा क्यों? क्या राज्य ने हर दिन का टीका बचा कर एक दिन लगाया ताकि रिकॉर्ड बन सके? मध्य प्रदेश के मंत्री कहते हैं कि कोई जमाखोरी नहीं हुई है.

CO_WIN की साइट पर जाएंगे तो वहां पर राज्यों के रोज़ाना के रिकार्ड मौजूद हैं. आपको एक चार्ट दिखाना चाहेंगे जिससे पता चलेगा कि मध्य प्रदेश में छह दिन पहले से ही टीका लगाने की संख्या कम होती जा रही है.
- 14 जून को मध्य प्रदेश में 4 लाख 92 हज़ार 633 टीके लगे
- 15 जून को टीके की संख्या 39,874
- 16 जून को 3 लाख 38 हज़ार 847 डोज़ लगे
- 17 जून को 1,24,226 डोज़ और
- 18 जून को 14,862 डोज़ लगे
- 19 जून को 22,006 डोज़ लगे
-  20 जून को 692 डोज़ लगे हैं

यह चार्ट बताता है कि रिकॉर्ड का रिकॉर्ड सही नहीं है. जिस राज्य में 14 जून को करीब पांच लाख डोज़ दी जाती है, वहां अगले कुछ दिनों में डोज़ की संख्या घट कर डेढ़ लाख से भी कम हो जाती है और 20 जून को 692 डोज़ पर आ जाती है. मध्य प्रदेश सरकार अलग से प्रेस रिलीज़ जारी करती है. उसके हिसाब से भी पैटर्न यही है. लेकिन एक सवाल यह भी है कि को-विन पर सारे टीके का पंजीकरण है तो फिर राज्य सरकार का रिकॉर्ड अलग क्यों है?

राज्य के रिकॉर्ड के हिसाब से भी यह बात सामने आती है कि एक दिन के अभियान के लिए टीका अभियान को कितना धीमा किया गया है. को-विन की साइट के अनुसार 14 से 20 जून के बीच मध्य प्रदेश में कुल 10 लाख 33, हज़ार 140 डोज़ दी गई. 7 से 13  जून के बीच मध्य प्रदेश में कुल 11 लाख 46 हजार 386 डोज़ दी गई.

स्क्रोल की सुप्रिया शर्मा ने भी मध्य प्रदेश, यूपी, असम और कर्नाटक जैसे राज्यों का विश्लेषण किया है. सुप्रिया ने लिखा है कि क्या मध्य प्रदेश ने रिकॉर्ड बनाने के लिए पिछले दिनों में डोज़ की संख्या में काफी कमी कर दी? क्योंकि 13 से 16 जून के बीच 2,28,784 के औसत से टीके लगाए गए. 17 से 20 जून के बीच का औसत 40,446 डोज़ प्रति दिन ही था. करीब 82 प्रतिशत की गिरावट आई है.

सुप्रिया के अनुसार अगर मध्य प्रदेश 16 जून के अपने स्तर को बरकरार रखता तो 20 जून तक 13.5 लाख डोज दी जा चुकी होती. जबकि 1 लाख 60 हज़ार डोज़ ही दी जा सकी. तो क्या जानबूझ कर टीका कम किया गया ताकि 21 जून को ज्यादा टीका दे सकें? सोचना चाहिए कि फोकस किस पर है? हेडलाइन के छपने पर या टीकाकरण पर. अगर नहीं तो 21 जून के अगले दिन टीकाकरण की हालत क्यों सुस्त है. मध्य प्रदेश में 21 जून को 5 बजे तक 12,12,439 डोज़ लगाई जा चुकी थी. 22 जून को 5 बजे तक केवल 4563 डोज़ ही लगी थी. दोपहर एक बजे तक 1826 डोज़ ही लगी थी.

मध्य प्रदेश ने दावा किया था कि इस अभियान के लिए 35,000 वैक्सीनेटर तैयार किए गए हैं. क्या आज वो वैक्सीनेटर नहीं थे? क्या आज टीका लगाने वालों को छुट्टी पर भेज दिया गया? जब मेगा अभियान के लिए हज़ारों टीका लगाने वाले स्टाफ लगाए जा सकते हैं तो हर दिन के लिए क्यों नहीं लगाए जा सकते हैं? आज इतना कम टीका क्यों लगा? कर्नाटक में 21 जून को 11 लाख 21 हज़ार डोज़ लगी है. लेकिन आज वहां ऐसी हालत नहीं है. आज कर्नाटक में 21 जून से काफी कम टीके पड़े हैं. कोविन की साइट पर चार बजे तक कर्नाटक में 3 लाख 7 हजार टीके पड़े थे जो कि काफी कम है. कर्नाटक में 20 जून रविवार को 68,000 डोज़ लगी है. 13 जून रविवार को 97,000 डोज़ लगी है. 6 जून रविवार को 1 लाख 26 हज़ार डोज लगी है.

24 मई के बाद कर्नाटक में किसी भी रविवार को 20 जून की तरह इतने कम टीके नहीं लगे हैं. इसका जवाब सरकार दे सकती है कि टीका अभियान के लिए राज्यों को कितने टीके दिए गए थे? क्या 21 जून के लिए अलग से डोज़ दिए गए थे? क्या उतने ही डोज़ अब हर दिन के लिए दिए जाएंगे? दिल्ली में भी रविवार को कम टीके लगे हैं. दिल्ली में 21 जून को मात्र 76,289 डोज़ लगी है. जहां सबसे बेहतर ढांचा था टीका देने का वहां कितने कम टीके लगे हैं. केंद्रीय मंत्री हरदीप पुरी ने सवाल किया है कि 11 लाख डोज़ होते हुए भी दिल्ली में 76,289 टीके क्यों लगे हैं. हरदीप पुरी को हर राज्य का स्टॉक दे देना चाहिए कि 21 जून को किस राज्य के पास कितना स्टॉक था.

आम तौर पर रविवार को कम टीके लगते हैं, क्योंकि छुट्टी रहती है इसके बाद भी सभी राज्यों में रविवार को लेकर एक समान पैटर्न नहीं है. इसलिए रविवार के साथ-साथ उसके पहले के कुछ दिनों का रिकार्ड देखना चाहिए. यूपी में भी रविवार को 8800 टीके लगे हैं लेकिन उसके पहले के दिनों में मध्य प्रदेश की तरह यहां संख्या में 82 प्रतिशत की गिरावट नहीं आती है बल्कि खास बदलाव ही नहीं होता है. उत्तर प्रदेश में यहां 16 जून से 19 के बीच तीन लाख चार लाख टीके दिए जा रहे हैं.

- 16 जून को 3 लाख 64 हजार डोज़ दी गई है
- 17 जून को 4 लाख 3 हजार डोज़ दी गई है
- 18 जून को 4 लाख 59 हजार डोज़ दी गई है
- 19 जून को 4 लाख 41 हजार डोज़ दी गई है
- 21 जून को 7 लाख 25 हज़ार टीके लगाए जाते हैं

उत्तर प्रदेश में मध्य प्रदेश की तरह यहां तीन चार दिन पहले से टीका लगाने की संख्या में कमी नहीं होती है. यहां सवाल उठता है कि 23 करोड़ की आबादी वाले यूपी में सवा सात लाख टीके ही क्यों लगे, सरकार को बताना चाहिए कि टीका अभियान के लिए मध्य प्रदेश और यूपी को कितने टीके दिए गए थे? को-विन की साइट के अनुसार टीका लगाने वाले राज्यों में यूपी का स्थान दूसरा है. यूपी ने कहा था कि हर दिन 6 लाख टीका देने का लक्ष्य तय किया गया है और आज दूसरे दिन यूपी ने चार बजे तक छह लाख का आंकड़ा पार कर लिया. यानी दूसरे दिन भी गति को बरकरार रखा गया.

इस सबके बीच आंध्र प्रदेश में अलग ही खेल है. यहां रविवार को रिकॉर्ड बन गया. देश में सबसे अधिक टीके लग गए. 13 लाख 74 हज़ार डोज़ लगती है. हेडलाइन छप जाती है लेकिन अगले दिन यानी 21 जून को हेडलाइन हवा हो जाती है. आंध्र प्रदेश में 48,785 डोज़ ही लगी. क्या ये कोई नई सनक है कि दस दिन का टीका रोक कर एक दिन दिया जाए ताकि रिकार्ड वगैरह बने. आखिर पौने चौदह लाख टीके लगाने वाला आंध्र प्रदेश अगले ही दिन पचास हज़ार टीके भी नहीं लगा पाता है. इसकी वजह क्या है.

21 जून को 86 लाख डोज़ लगी है. कोविड टास्क फोर्स के चेयरमैन वी के पॉल ने कहा कि 21 जून को सिस्टम को टेस्ट किया गया कि कहां तक जा सकते हैं. टीकाकरण के पुराने सिस्टम और अनुभवों की मदद से 86 लाख लोगों को टीका दे सके. पॉल ने कहा कि 92 प्रतिशत लोग सरकारी केंद्रों पर टीका लगाने गए. 64 प्रतिशत टीका गांवों में लगा है. लेकिन महिलाओं का प्रतिशत कम रहा, 46 प्रतिशत ही. जिसे आगे चल कर ठीक करना है. वी के पॉल ने यह नहीं बताया कि 21 जून के मानक को हासिल करने के लिए भारत के पास कितना टीका है, यह नहीं बताया कि हम एक दिन ही क्यों यह मानक हासिल कर पाए, जल्द से जल्द जब बड़ी आबादी का टीकाकरण करना है तो फिर 21 जून का मानक हर दिन के लिए क्यों नहीं है. लेकिन जब सवाल टीके की उपलब्धता को लेकर पूछा गया तो जवाब घूमा फिरा कर आया.

प्रश्न - वैक्सीन की सप्लाई में गैप न रहे, क्या तैयारी है?
जवाब - हमारे पास वैक्सीनेट करने की क्षमता है. वो क्षमता हमने राज्यों के सहयोग से पिछले अनेक दशकों से तैयार की है. कल राज्यों ने उस क्षमता का प्रदर्शन किया. भारत सरकार ने सहयोग किया. न केवल समय पर डोज़ दिया बल्कि एडवांस विजिबिलिटी दी, अग्रिम जानकारी दी कि अगले पंद्रह दिन में डोज़ मिलेगा. इससे राज्यों की क्षमता बेहतर प्लानिंग बढ़ी है. इसी पलानिंग की वजह से टीकाकरण हुआ. जैसे जैसे वैक्सीन का प्रोडक्शन बढ़ता है वैसे वैसे हमारी क्षमता बढ़ेगी.”


पता था कि आज सवाल होगा कि 21 जून के जैसा अभियान क्यों नहीं है अगले दिन तो स्वास्थ्य मंत्रालय अपने जवाब के साथ तैयार था कि 21 जून को क्षमता का परीक्षण किया गया है. वह टीकारण का परीक्षण अभियान था. अब आप यह सवाल न करें कि अगर कल जितना टीका पहले भी होता तो क्या हम नहीं दे पाते? सवाल आखिर घूम फिर कर टीके की उपलब्धता की संख्या पर आ ही जाता है. कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने आज पार्टी की तरफ से एक श्वेत पत्र जारी किया है. राहुल ने कहा कि एक आयोग का गठन होना चाहिए जो इसकी जांच करे कि कोरोना से लड़ाई में सरकार ने क्या गलती की है ताकि आगे ऐसी गलती न हो और लोगों की जान बच सके. राहुल गांधी ने कहा कि कोविड से जिन परिवारों में मौत हुई है उनके परिजनों को मुआवज़ा देने का रास्ता निकालना ही चाहिए और एक कोविड राहत कोष बनाना चाहिए. सरकार ने डीज़ल और पेट्रोल से चार लाख करोड़ कमाए हैं, उस पैसे से मुआवज़ा दिया जा सकता है.

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राहुल गांधी ने कहा है कि कोविड से लड़ने में जो चूक हुई है उसकी जांच होनी चाहिए. दुनिया के कई देशों में जांच हो रही है. ब्रिटेन और अमरीका जैसे देश में संसद की कमेटी ही सुनवाई कर रही है. उसके सामने कोविड की लड़ाई से जुड़े अहम लोग गवाही दे रहे हैं. ब्राज़ील, दक्षिण अफ्रीका, यूक्रेन में भी कमीशन का गठन किया गया है जो महामारी के मामलों में हुई लापरवाही और भ्रष्टाचार के आरोपों की जांच कर रहा है. जम्मू कश्मीर फिर से चर्चा में है. जिन लोगों को सुरक्षा के लिए खतरा बताया गया, नज़रबंद रखा गया उन्हें बातचीत का न्यौता भेजा गया है.