'मेक इन इंडिया' का मंत्र जाप करने वाले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी खुद ताइवान के कारखानों से ढलकर इंडिया आ रहे हैं और दक्षिणी दिल्ली के ग्रेटर कैलाश की एक पाश मॉर्केट में बिकने के लिए दुकान की खिड़की पर रखे गए हैं। मोदी पर सारे बाज़ार की नज़र है कि वह उसके लिए कुछ नया और पहले से बड़ा बाज़ार बनाएंगे, लेकिन यह बाज़ार तो मोदी का भी बाज़ार बनाने में लगा है। जब इस फ्रेम में नरेंद्र मोदी को देखा तो उत्सुकता हुई कि कौन खरीद रहा होगा, अभी तक प्रधानमंत्री के कितने फ्रेम बिके होंगे। चार महीने से यह सवाल अटका पड़ा था, आज दुकान के भीतर चला ही गया।
हां जी, आप सही कह रहे हैं... दीवाली के समय हमने गिफ्ट आइटम के रूप में मोदी जी को लॉन्च किया था... लॉन्च किया था! जी। यह क्या काम है...? यह 'गोल्ड लीफ' का काम है। हिन्दी में मैं कैसे लोगों को समझाऊंगा। क्या यह असली सोना है...? मैं बस इन सवालों से फ्रेम में कैद प्रधानमंत्री मोदी का इम्तिहान ले रहा था। दुकानदार ने कहा कि यह सोने का वर्क है। पहली बार किसी नेता की ऐसी सजावटी मूर्ति हमने बनवाई है। तभी ध्यान आया कि मैं पहले भी इस दुकान में कई बार आ चुका हूं। खरीदने नहीं, जिज्ञासा की शांति के लिए। इस दुकान में सोने के वर्क से बनी कई कलाकृतियां हैं, जो समाज के कुलीन तबके के बीच काफी लोकप्रिय हैं। सोने के वर्क वाली हनुमान चालीसा है तो देवी-देवताओं की बेहतरीन कलाकृतियां भी। मंदिरों-गुरुद्वारों को भी सोने के वर्क पर उकेरा गया है। देखने में ये हल्के चमकीले पत्ते की तरह लगते हैं।
दाम...? दुकानदार साहब थोड़ा मुस्कुराए और संकोच करते हुए बताने लगे कि साढ़े छह हज़ार। पहले साढ़े सात हज़ार था। बिका भी या यूं ही सजा हुआ है...? काफी बिका है, लेकिन हज़ार से कुछ कम बिका है। गुजरात से एक पार्टी आई थी, जो एक ही बार में तीन सौ फ्रेम ले गई। हम मोदी जी के फ्रेम को सोने-चांदी की दुकानों में भी देते हैं। वहां लोग आते हैं तो गिफ्ट आइटम के तौर पर खरीद ले जाते हैं। बीजेपी या नमो फैन्स खरीदते होंगे...? हां जी, कोई समाजवादी तो नहीं खरीदेगा न। दुकानदार ने कहा कि फ्रेम को गौर से देखिए। चश्मा सचमुच का लगा है। फील आती है कि मोदी जी देख रहे हैं।
लेकिन यह बताइये कि मोदी जी बनकर कहां से आए हैं। जी, ताइवान से। ताइवान से! हां, यह काम या तो चीन में होता है या ताइवान में। भारत के सुनार यह काम नहीं कर सकते...? दुकानदार ने कहा, नहीं जी, यह काम भारत में होता तो हम बाहर से नहीं मंगाते। अच्छा तो सबसे पहले मोदी जी का ही 'मेक इन इंडिया' करना होगा। मेरी इस बात पर ठहाके लग पड़े। लेकिन बीजेपी के नेता इस फ्रेम को खरीदने से पहले एक बार ज़रूर सोच लें, क्या वे 'मेक इन इंडिया' वाले प्रधानमंत्री मोदी का 'मेक इन ताइवान' फ्रेम लगाना पसंद करेंगे। एक बार सोच लेने में हर्ज क्या है।
This Article is From Dec 17, 2014
रवीश कुमार की कलम से : मेड इन ताइवान मोदी
Ravish Kumar, Vivek Rastogi
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Updated:दिसंबर 18, 2014 18:49 pm IST
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Published On दिसंबर 17, 2014 18:39 pm IST
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Last Updated On दिसंबर 18, 2014 18:49 pm IST
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