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This Article is From Jan 19, 2015

सेंट्रल हॉल से मनोरंजन भारती : बीजेपी में बेदी की इंट्री की पूरी कहानी

Manoranjan Bharti, Saad Bin Omer
  • Blogs,
  • Updated:
    जनवरी 19, 2015 21:36 pm IST
    • Published On जनवरी 19, 2015 18:53 pm IST
    • Last Updated On जनवरी 19, 2015 21:36 pm IST

किरण बेदी अब दिल्ली चुनाव में बीजेपी का चेहरा हैं, मगर अब सब सवाल पूछ रहे हैं कि आखिरकार यह संभव कैसे हुआ। अब आपको बताता हूं कि प्रेस क्लब ऑफ इंडिया और राजनीति के गलियारे की गॉसिप क्या कहती है।

प्रेस क्लब के पत्रकारों को लगता है कि देश की राजनीति वही चलाते हैं और उनसे बड़ा राजनीति का जानकार और कोई नहीं। बकौल सेंट्रल हॉल की गॉसिप को मानें तो बीजेपी आम आदमी पार्टी की उस पोस्टर से परेशान थी, जिसमें केजरीवाल बनाम जगदीश मुखी लिखा हुआ था। यही नहीं आम आदमी पार्टी  दिल्ली का चुनाव केजरीवाल बनाम प्रधानमंत्री बनाने की कोशिश में जुटी हुई थी।

ऐसे में बीजेपी की परेशानी साफ समझ में आती है। इन चीजों के बाद बीजेपी में इस बात पर गहराई से विचार होने लगा कि किसी न किसी को दिल्ली के चुनाव का चेहरा बनाना पड़ेगा। हालांकि बीजेपी ने महाराष्ट्र, हरियाणा, जम्मू कश्मीर और झारखंड में लोगों के सामने कोई चेहरा पेश नहीं किया था। मगर यह दिल्ली है और सामने केजरीवाल को देखते हुए बीजेपी ने तय किया कि कोई चेहरा चुनना पड़ेगा, जिसके बाद नामों पर विचार शुरू हुआ।

केजरीवाल के सामने जगदीश मुखी संभव नहीं था, हर्षवर्धन का कद स्वास्थ्य मंत्रालय ने छीन कर पहले ही छोटा कर दिया था। प्रदेश अध्यक्ष सतीश उपाध्याय पर केजरीवाल पहले ही हमला कर कागज बांट चुके थे।

राजनीतिक गॉसिप की मानें तो केंद्रीय मानव संसाधनमंत्री स्मृति ईरानी के नाम पर भी चर्चा हुई, मगर बीजेपी के पास आकड़े नहीं थे कि यह दांव सही बैठेगा या नहीं। तब पार्टी ने सर्वे का सहारा लिया, यह पता लगाने की कोशिश की गई कि किस नेता की क्या लोकप्रियता है। नतीजों के बाद भी बीजेपी की उलझन खत्म नहीं हुई।

फिर एक नाम सामने आया किरण बेदी का। बीजेपी के बड़े नेता इस पर गंभीरता से विचार करने लगे। कुछ शीर्ष नेताओं की इस पर राय ली गई। एक बड़े मंत्री ने आशंका जताई कि किरण बेदी अपने विवादित बयानों से कहीं हमारे लिए मुसीबत न बन जाए।

मगर केजरीवाल के खेल में उन्हीं के मोहरे से उन्हें ही मात देने के लिए किरण बेदी का चेहरा एक दम फिट बैठता था। एक तो अन्ना का साथ निभाना और केजरीवाल के साथ न जाना उन वोटरों को लुभा सकता था, जो केजरीवाल के धरना राजनीति को पसंद नहीं करते थे।

एक बार यह तय होते ही किरण बेदी से संपर्क साधा गया जिन्होंने पहले प्रधानमंत्री से मुलाकात की बात कही। उस बैठक के बाद यह तय हुआ कि किरण बेदी की बीजेपी में शानदार ढंग से इंट्री कराई जाए। यही वजह है कि उस प्रेस कॉन्फ्रेंस में दिल्ली बीजेपी के तमाम नेताओं के अलावा बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह और वित्तमंत्री अरुण जेटली भी मौजूद थे।

एक बात गौर करने वाली है कि जिन और नेताओं ने बीजेपी ज्वांइन किया है, सबकी तस्वीर अमित शाह के साथ छपी मगर किरण बेदी की नरेंद्र मोदी के साथ... संदेश साफ था कि बेदी ही बीजेपी का चेहरा है। इसी संदेश को समझते हुए बीजेपी दफ्तर के बाहर जो पोस्टर लगे ,उसमें किरण बेदी के चेहरे के सामने सभी चेहरे छोटे लग रहे थे। तो यह था ऑपरेशन किरण बेदी बकौल सेंट्रल हॉल और प्रेस क्लब के गॉसिप के हवाले से...

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