- नवादा के दृष्टिबाधित रवि राज ने यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा में 20वां स्थान प्राप्त किया है
- रवि राज ने 2024 में 182वां स्थान हासिल कर आईआरएएस में इनकम टैक्स कमिश्नर का पद भी प्राप्त किया था
- लगातार असफलताओं के बाद भी रवि राज ने हार नहीं मानी और मां के सहयोग से लगातार पढ़ाई जारी रखी
मन में लक्ष्य को पूरा करने की जिद हो और उसे पूरा करने के लिए हौसला हो तो कोई भी काम कठिन नही रह जाता है. बिहार के नवादा के दृष्टिबाधित रवि राज ने ऐसा कर दिखाया है. रवि राज खुद नहीं पढ़ सकते और न ही लिख सकते हैं. लेकिन सपनों की रोशनी ने इतिहास रच दिया है. यूपीएससी के सिविल सेवा परीक्षा में रवि राज ने देश भर में 20वां स्थान हासिल किया है. रवि राज को पांचवें अटेम्प्ट में यह कामयाबी मिली है.
यह पहला अवसर नहीं है जब रवि राज को कामयाबी मिली है. 2024 में यूपीएससी की परीक्षा में 182वां स्थान हासिल किया था. तब आईआरएएस में इनकम टैक्स कमिश्नर का पद मिला था. सितंबर 2025 से रवि राज ट्रेनिंग कर रहे हैं. फिलहाल, नागपुर में ट्रेनिंग चल रही है. ताज्जुब कि ट्रेनिंग के दौरान भी रवि राज ने अपनी पढ़ाई जारी रखी. लिहाजा, यह कामयाबी हासिल हुई है. रवि राज ने कहा कि उनकी सफलता में उनके परिवार खासकर मां का अहम योगदान रहा है.

विफलता के बाद भी नही मानी हार
ऐसा नहीं कि रवि राज को यह कामयाबी पल भर में मिली है. तीन परीक्षाओं में लगातार निराशा हाथ लगी है. यूपीएससी की सिविल सेवा परीक्षा के पहले प्रयास में रवि राज ने सिर्फ पीटी पास किया था. दूसरे और तीसरे प्रयास में पीटी भी नहीं निकल पाया. लेकिन चौथे प्रयास में पीटी, मेंस और इंटरव्यू में कामयाबी हासिल कर 182वीं रैंक लेकर आए. इसके बाद भी रवि राज ने पढ़ाई नहीं छोड़ी. लिहाजा, पांचवें प्रयास में 20वीं रैंक मिली.
हालांकि 69वीं बीपीएससी परीक्षा में 490 रैंक मिली था और रवि राज को रेवेन्यू ऑफिसर का पद मिला था. तब दृष्टिबाधित कैटेगरी में रवि राज बिहार में अव्वल रहे थे. लेकिन बीपीएससी में सफलता के बाद भी नौकरी नहीं ज्वाइन की. तब भी छुटटी लेकर यूपीएससी की तैयारी कर रहे थे. इसके बाद यूपीएससी में कामयाबी मिली थी. अब लगातार दूसरी दफा कामयाबी मिली है.
रवि राज की कामयाबी समाज के लिए मिसाल
रवि राज की सफलता समाज के लिए मिसाल है. रविराज की रोशनी चली गई थी. सारी उम्मीद खत्म हो गई थी. चूकिं रवि राज नही खुद से पढ़ सकते थे और न ही लिख सकते थे. ऐसे में रवि राज की मां सहारा बनी. रवि राज का मानना है कि उनकी सफलता में उनकी मां की बराबर की भागीदारी रही है. उसके चलते उनकी मां का जीवन विद्यार्थी जैसा हो गया. घर के काम भी करती थीं और उसकी पढ़ाई के लिए समय निकालती थी. मां के बिना उनकी पढ़ाई नहीं होती थी. हर रोज करीब 10-12 घंटे पढ़ाई करते थे. रवि राज कहते हैं कि मां जब खाना बनाने जाती थी तब वह यूटयूब में वीडियो खोलकर दे देती थी.

बच्चे की तरह करना पड़ता था परवरिश
रवि राज की मां विभा देवी कहती हैं कि दृष्टि बाधित होने के कारण रवि राज की परवरिश बड़े होने पर भी एक बच्चे की तरह करनी पड़ती है. उसके दिनचर्या में भी सहयोग करना पड़ता है. पिता रंजन कुमार सिन्हा कहते हैं कि रवि राज की कामयाबी में उसकी मां का अहम रोल रहा है, जिन्होंने एक मां के साथ रवि राज की दोस्त और गुरु की तरह भूमिका निभाई. रविराज को उसकी मां पढ़कर सुनाती थी. रवि राज सुनता था. फिर रवि राज बोलता था, जिसे उसकी मां लिखती थी. रवि राज के पिता ने कहा कि ट्रेनिंग के दौरान भी रवि राज ने अपने टीचर और सहयोगी की मदद से पढ़ाई जारी रखी. इसके बाद उसे कामयाबी मिली है.
एडिसन के जीवन का रविराज के जीवन पर प्रभाव
रविराज का मानना है कि वह एडिसन जैसा महान व्यक्ति तो नहीं बन पाया, लेकिन उनकी मां ने एडिसन की मां नैंसी मैथ्यूज जैसी परवरिश जरूर की. समाज और स्कूल उन्हें सूरदास समझने लगा था. ऐसे में उनकी मां उनकी आंख बनी. एक रीडर और राइटर के रूप में मदद की. मां पढ़ती थी, वह सुनता था. फिर जब वह पढ़ता था और तब उसकी मां लिखती थी. यह सिलसिला याद करने तक चलता था.
दरअसल, थॉमस अल्वा एडिसन को बचपन से प्रयोग करने की आदत थी. एक बार पक्षियों के उड़ने के रहस्य को जानने के लिए कीड़ों को पीसकर एक सहयोगी को पिला दिया था. इसके चलते सहयोगी की तबियत खराब हो गई थी. इतना ही नहीं, एडिसन अपने स्कूल टीचर से रहस्यमय सवाल पूछा करता था. इसके चलते टीचर उन्हें पागल समझते थे. और उन्हें स्कूल से निकाल दिया. लेकिन एडिसन की मां नैंसी मैथ्यूज एलिअट अपने बेटे की प्रतिभा को जानती थीं. वह बेटे के सवालों का गंभीरता पूर्वक जबाव देकर जिज्ञासा शांत किया करती थीं. लिहाजा, एडिसन ने बल्ब समेत कई अविष्कार किए.

डीएम और सांसद ने दी बधाई
नवादा के जिला पदाधिकारी रवि प्रकाश ने कहा कि यूपीएससी के सिविल सेवा परीक्षा 20वां रैंक लाकर दृष्टिबाधित रवि राज ने एक बार फिर हम सब को गौरवांवित किया है. दूसरी तरफ, सांसद विवेक ठाकुर ने कहा कि प्रतिकूल परिस्थिति में रवि राज ने यह कामयाबी पाई है. रवि राज की सफलता में उनकी मां का अहम योगदान है. नवादा के लिए यह अत्यंत गर्व का विषय है.
परिवार में कौन-कौन हैं?
नवादा जिले के अकबरपुर प्रखंड के महुली गांव निवासी रवि राज के पिता रंजन कुमार सिन्हा एक किसान हैं. मां विभा सिन्हा गृहिणी. मां ग्रेजुएशन तक पढ़ी लिखी हैं. रवि राज दो भाई बहन है. बहन भी दृष्टि बाधित है. रवि राज ने नवादा के ऑक्सफोर्ड पब्लिक स्कूल मिरजापुर से दसवीx, जबकि एसएन इंटर स्कूल पार नवादा से इंटर और एसआरएस कॉलेज से राजनीतिक शास्त्र से ग्रेजुएशन किया है.
रवि राज कहते हैं कि दृष्टि बाधित के कारण परंपरा के मुताबिक न तो उन्हें कोई काम करने की जरूरत की और न किसी नाम की. नाम-सूरदास और काम-भिक्षावृति. लेकिन इतिहास रचना था. मां का साथ मिला, मेहनत की इसलिए कामयाबी मिली.
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