- बेगूसराय के राघवेंद्र कुमार ने गरीबी और पिता के निधन के बाद भी सरकारी नौकरी प्राप्त कर परिवार का सहारा बनाया
- लगातार विफलताओं के बावजूद उन्होंने चौथे प्रयास में BPSC परीक्षा पास कर असिस्टेंट कमिश्नर बनकर सफलता हासिल की
- राघवेंद्र ने कोचिंग में रुचि बढ़ने पर BPSC की मन लगाकर तैयारी की
Success Story Bihar: बिहार के बेगूसराय जिले के राघवेंद्र कुमार की सफलता की कहानी किसी सुपरहिट बॉलीवुड फिल्म से कम नहीं है. अत्यधिक गरीबी और कमजोर आर्थिक पृष्ठभूमि को मात देकर राघवेंद्र ने वह मुकाम हासिल किया है, जिस पर आज न केवल उनका परिवार बल्कि पूरा गांव गर्व महसूस कर रहा है. पहले अमीन की सरकारी नौकरी और फिर BPSC की कठिन परीक्षा पास कर सेल टैक्स असिस्टेंट कमिश्नर बनने तक का उनका सफर हर प्रतियोगी छात्र के लिए एक बड़ी प्रेरणा है.
पिता के निधन के बाद आर्थिक तंगी, फिर अमीन बनकर संभाला परिवार
बेगूसराय जिले के रिफाइनरी थाना क्षेत्र अंतर्गत केशावे गांव निवासी अमरनाथ सिंह के पुत्र राघवेंद्र कुमार का जीवन शुरुआती दौर से ही संघर्षों से भरा रहा. पिता के निधन के बाद घर की आर्थिक स्थिति काफी खराब हो गई थी. राघवेंद्र ने साल 2014 में मैट्रिक और 2016 में इंटरमीडिएट की परीक्षा पास की. परिवार को सहारा देने के लिए उन्होंने सबसे पहले सरकारी अमीन के पद पर नौकरी जॉइन की. नौकरी मिलने के बाद भी उन्होंने अपने बड़े सपनों को टूटने नहीं दिया और पढ़ाई पर अपना पूरा ध्यान केंद्रित रखा.

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लगातार विफलताओं से नहीं हारे, चौथे प्रयास में पास की BPSC
राघवेंद्र ने साल 2019 में पटना के कंकड़बाग में रहकर BPSC की तैयारी शुरू की थी. हालांकि, उनका यह सफर आसान नहीं रहा. उन्होंने 65वीं, 66वीं, 67वीं और 68वीं BPSC परीक्षाओं में भाग लिया, लेकिन सफलता हाथ नहीं लगी. इसके बाद 69वीं BPSC के दौरान अमीन के पद पर कार्यरत रहने और व्यस्तता के कारण वह परीक्षा में शामिल नहीं हो सके. लगातार असफलता मिलने के बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी और अपने चौथे प्रयास 70वीं BPSC में शानदार सफलता हासिल करते हुए सीधे सेल टैक्स में असिस्टेंट कमिश्नर के पद पर चयनित हुए.
"मैं एक एक्सीडेंटल स्टूडेंट था": ऐसे जागी BPSC की रुचि
अपनी सफलता के बारे में बात करते हुए राघवेंद्र बताते हैं, "मैं एक तरह से एक्सीडेंटल स्टूडेंट था, मेरी कोई प्रॉपर पूर्व तैयारी नहीं थी. सामान्य अध्ययन पढ़ने के लिए जब मैं एक कोचिंग संस्थान में गया, तो वहां मेरी विषय में रुचि बढ़ी. जब मैंने BPSC का सिलेबस देखा, तो मुझे विश्वास हुआ कि इसे सही रणनीति से किया जा सकता है." उन्होंने आगे बताया कि उनके एक मित्र विकास जी (जो BPRO के पद पर चयनित हुए थे) उनकी सबसे बड़ी प्रेरणा बने. एक सामान्य पृष्ठभूमि के मित्र को सफल होते देख राघवेंद्र को भरोसा हुआ कि वे भी यह कर सकते हैं.
गांव पहुंचने पर घुड़सवारों, बैंड-बाजे और काफिले के साथ ऐतिहासिक स्वागत
असिस्टेंट कमिश्नर के पद पर चयन के बाद जब राघवेंद्र हाल ही पहली बार अपने पैतृक गांव केशावे पहुंचे, तो पूरा इलाका जश्न के माहौल में डूब गया. गांव के बाहर ही दर्जनों चार पहिया वाहनों, ढोल-नगाड़ों और घुड़सवारों के साथ उनका अभूतपूर्व स्वागत किया गया. एक खुली कार में सवार होकर राघवेंद्र जुलूस में शामिल हुए, जहां आगे-आगे बैंड-बाजा और घुड़सवार चल रहे थे. रास्ते में जगह-जगह लोगों ने काफिले को रोककर राघवेंद्र को माला पहनाई और जमकर आतिशबाजी की. इस स्वागत समारोह का वीडियो और तस्वीरें सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही हैं.
नए अभ्यर्थियों के लिए गुरुमंत्र: सोशल मीडिया से दूरी और निरंतर मेहनत
BPSC और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे युवाओं को संदेश देते हुए राघवेंद्र ने कहा कि अभ्यर्थियों को पढ़ाई के दौरान सोशल मीडिया से पूरी तरह दूरी बनाकर रखनी चाहिए और केवल अपनी मेहनत पर भरोसा करना चाहिए. उन्होंने कहा कि राज्य सरकार लगातार विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए रिक्तियां निकाल रही है, इसलिए यदि छात्र ईमानदारी से सही दिशा में मेहनत करेंगे तो उन्हें सफलता जरूर मिलेगी.
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