- पटना के बापू सभागार में खान सर के कार्यक्रम में छात्रों को पढ़ाई और स्वरोजगार के महत्व पर प्रेरित किया गया.
- एक छात्र ने खून से नीम की लकड़ी पर उकेरी तस्वीर भेंट की, जिसने सभी को भावुक कर दिया.
- खान सर ने छात्रों को सही मार्गदर्शन से पढ़ाई और स्वरोजगार दोनों में सफलता पाने की सलाह दी.
पटना के बापू सभागार में आयोजित प्रसिद्ध शिक्षक खान सर के कार्यक्रम पढ़ाई और स्वरोजगार में एक भावुक कर देने वाला पल देखने को मिला. इस कार्यक्रम में सैकड़ों छात्र-छात्राएं शामिल हुए थे, जो विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे हैं. सेमिनार का मुख्य उद्देश्य छात्रों को पढ़ाई के साथ-साथ स्वरोजगार की दिशा में भी प्रेरित करना था.
'हम भी नीम जैसे हैं...'
कार्यक्रम के दौरान एक छात्र ने खान सर को एक खास उपहार भेंट किया, जिसने पूरे सभागार को भावुक कर दिया. यह उपहार एक तस्वीर थी, जिसे छात्र ने अपने खून से बनाया था. खास बात यह रही कि यह तस्वीर नीम की लकड़ी पर उकेरी गई थी. जब खान सर ने यह तस्वीर देखी, तो उन्होंने पहले छात्र की मेहनत और सोच की सराहना की. उन्होंने कहा कि नीम का पेड़ बहुत खास होता है. उन्होंने मुस्कुराते हुए कहा, हम भी नीम जैसे हैं, स्वाद में भले कड़वे लगते हैं, लेकिन बीमारी ठीक करने का काम करते हैं.
'ऐसा मत करिए, हम टेंशन में आ जाएंगे...'
हालांकि, जैसे ही छात्र ने बताया कि उसने यह तस्वीर अपने खून से बनाई है, माहौल अचानक भावुक हो गया. वहां मौजूद सभी छात्र-छात्राएं यह सुनकर हैरान रह गए. इस पर खान सर ने तुरंत छात्र को समझाया कि ऐसा करना ठीक नहीं है. उन्होंने कहा, ऐसा मत करिए, हम टेंशन में आ जाएंगे. इसके बाद उन्होंने छात्र को गले लगाकर उसका हौसला बढ़ाया. यह पल वहां मौजूद सभी लोगों के लिए बेहद भावुक और यादगार बन गया.

अपने संबोधन में खान सर ने छात्रों को सही दिशा में मेहनत करने की सलाह दी. उन्होंने कहा कि अगर छात्र सही मार्गदर्शन के साथ पढ़ाई करें, तो वे न सिर्फ नौकरी हासिल कर सकते हैं, बल्कि आगे चलकर अपना खुद का व्यवसाय भी शुरू कर सकते हैं. उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि आज के समय में शिक्षा पहले से कहीं ज्यादा सुलभ हो गई है.
कार्यक्रम के दौरान जब उनसे राजनीतिक सवाल पूछे गए, तो उन्होंने विनम्रता से उसे टाल दिया. उन्होंने कहा कि वे इस समय छात्रों के बीच हैं और शिक्षा से जुड़े मुद्दों पर ही बात करना पसंद करेंगे. राजनीति पर वही लोग बात करें, जो उसमें सक्रिय हैं.
अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर अपनी राय रखते हुए उन्होंने दुनिया में बढ़ते तनाव और युद्ध की स्थिति पर चिंता जताई. उन्होंने कहा कि भारत हमेशा से शांति का संदेश देने वाला देश रहा है और हमें युद्ध नहीं, बल्कि भगवान बुद्ध के मार्ग पर चलना चाहिए.
इसके अलावा उन्होंने बढ़ती महंगाई, खासकर एलपीजी गैस की कीमतों पर भी बात की. उन्होंने कहा कि फिलहाल गैस की कोई कमी नहीं है, लेकिन महंगाई का असर आम लोगों, खासकर छात्रों पर साफ दिख रहा है. खाने-पीने की चीजों की कीमत बढ़ने से छात्रों का खर्च बढ़ गया है.
कार्यक्रम के अंत में खान सर ने अपने सामाजिक प्रयासों की भी जानकारी दी. उन्होंने बताया कि उन्होंने एक अस्पताल की शुरुआत की है और जल्द ही एक ब्लड बैंक भी शुरू किया जाएगा. इसका उद्देश्य जरूरतमंद लोगों को कम खर्च में इलाज और समय पर रक्त उपलब्ध कराना है.
कुल मिलाकर, पढ़ाई और स्वरोजगार' कार्यक्रम न सिर्फ छात्रों के लिए प्रेरणादायक रहा, बल्कि इसमें कई भावुक और सीख देने वाले पल भी देखने को मिले.
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