कुछ दिनों पहले तक एनडीए के सहयोगी के रूप में पहचाने जाने वाले उपेंद्र कुशवाहा की पार्टी राष्ट्रीय लोकसमात पार्टी यानी रालोसपा ने अब यूपीए का दामन थाम लिया है. गुरुवार को दिल्ली में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर उपेंद्र कुशवाहा ने इस बात का ऐलान किया कि वह महागठबंधन के साथ हो गए हैं. इस पर रालोसपा के एक विधायक ने उपेंद्र कुशवाहा पर पार्टी लाइन से अलग जाने का आरोप लगाया है और उन्होंने पार्टी पर अपने दावे को लेकर चुनाव आयोग जाने की भी धमकी दी है.
दरअसल, उपेंद्र कुशवाहा बीते दिनों सीट शेयरिंग को लेकर एनडीए से अपना नाता तोड़ लिया था और गुरुवार को यूपीए का हिस्सा हो गए थे. मगर रालोसपा के दोनों विधायकों सुधांशु शेखर और ललन पासवान तथा विधान पार्षद संजीव श्याम सिंह ने कुशवाहा के इस फैसले का विरोध किया और बागी तेवर भी दिखाए. एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में राजग में रहने की घोषणा करते हुए इन्होंने कहा कि वे राजग में थे और आगे भी रहेंगे. उन्होंने कहा कि रालोसपा राजग से कभी अलग हुई ही नहीं है.
संवाददाता सम्मेलन में रालोसपा के विधान पार्षद संजीव शेखर ने राजग नेतृत्व पर विश्वास व्यक्त करते हुए कहा कि बिहार विधान मंडल में रालोसपा के तीनों सदस्य राजग के साथ हैं और आगे भी रहेंगे. उन्होंने हालांकि राजग नेतृत्व पर सवाल खड़ा करते हुए राजग नेतृत्व से भागीदारी के हिसाब से हिस्सेदारी की भी मांग की. उन्होंने हालांकि यह भी कहा कि राजग उन्हें सरकार में प्रतिनिधित्व दे या नहीं दे परंतु वे राजग को मजबूत करने के लिए काम करते रहेंगे.
इन तीनों नेताओं ने रालोसपा का दावा ठोंकते हुए कहा कि अगर जरूरत पड़ेगी तो वे लोग निर्वाचन आयोग से मिलकर अपनी बात रखेंगे. उन्होंने दावा करते हुए कहा कि रालोसपा के अधिकांश कार्यकर्ता भी उनके साथ हैं. उपेंद्र कुशवाहा पर व्यक्तिवादी राजनीति करने का आरोप लगाते हुए इन नेताओं ने कहा कि वे केवल अपने लाभ की बात करते हैं. उन्हें न पार्टी से मतलब रहा ना ही उन्हें बिहार से मतलब रहा.
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