नीतीश कुमार ने पिछले महीने पटना में हार्दिक पटेल का गर्मजोशी से स्वागत किया था (फाइल फोटो)
पटना:
बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने पाटीदार आंदोलन के नेता हार्दिक पटेल को सूचना दी है कि इस महीने के आखिर में गुजरात में होने वाली रैली में वह भाग नहीं ले सकेंगे. पहले नीतीश ने हार्दिक की रैली में शामिल होने पर सहमति जताई थी.
जेडीयू ने कहा है कि नीतीश ने इसके पीछे वजह बताई है कि चूंकि पड़ोसी राज्य उत्तर प्रदेश समेत कुछ अन्य राज्यों में विधानसभा चुनाव होने हैं, इसलिए वह हार्दिक की रैली में नहीं जा पाएंगे.
हार्दिक पटेल ने गुजरात में पाटीदारों यानी पटेलों के लिए सरकारी नौकरियों और कॉलेजों में आरक्षण की मांग को लेकर राज्य की बीजेपी सरकार के खिलाफ व्यापक आंदोलन का नेतृत्व किया था. उनके खिलाफ देशद्रोह के मुकदमे दर्ज हुए थे, जिसमें उन्हें कई महीने जेल में बिताने पड़े. उन्हें पिछले साल कोर्ट द्वारा गुजरात में छह महीने तक प्रवेश नहीं करने की शर्त पर उन्हें जेल से रिहा किया गया था. यह मियाद 17 जनवरी को पूरी हो रही है.
गुजरात से बाहर राजस्थान में रह रहे हार्दिक ने पिछले महीने पटना में नीतीश कुमार से मुलाकात की थी. नीतीश ने हार्दिक का गर्मजोशी से स्वागत किया था और वादा किया था कि वह 28 जनवरी को उनकी (हार्दिक की) रैली में शामिल होंगे. दोनों के बीच दो घंटे की बैठक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधते हुए एक नारा तय किया गया था- मोदी हराओ देश बचाओ.
नीतीश की पार्टी जेडीयू के नेताओं ने कहा है कि हार्दिक की रैली में शामिल न होने के नीतीश के फैसले का शराबबंदी को लेकर बिहार सीएम की प्रधानमंत्री मोदी द्वारा पिछले हफ्ते की गई तारीफ से कोई लेना देना नहीं है.
गौरतलब है कि नीतीश कुमार इकलौते विपक्षी नेता हैं, जिन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नोटबंदी के फैसले का समर्थन किया.
जेडीयू के वरिष्ठ नेता केसी त्यागी ने कहा, हमने हार्दिक को बताया कि नीतीश कुमार अभी चुनावों को लेकर व्यस्त हैं और रैली 11 मार्च के बाद कभी भी आयोजित की जा सकती है. त्यागी ने बताया कि उनकी पार्टी पंजाब और यूपी में कुछ सीटों पर चुनाव लड़ रही है, इसलिए नीतीश कुमार को वहां चुनाव प्रचार के लिए दौरे करने होंगे. उत्तर प्रदेश, पंजाब और तीन अन्य राज्यों में 11 मार्च को मतगणना होगी.
नीतीश कुमार पहले ऐसे राष्ट्रीय नेता थे जिन्होंने पाटीदारों के लिए हार्दिक पटेल के नेतृत्व वाले आंदोलन का समर्थन किया था. पाटीदार समुदाय गुजरात का प्रभावशाली और संपन्न तबका है. बिहार में सत्तारूढ़ महागठबंधन के घटक दल कांग्रेस के कुछ नेता नीतीश के गुजरात रैली में शामिल न होने को राज्य के अन्य समुदाओं को नाखुश न करने की उनकी मंशा के रूप में देख रहे हैं.
जेडीयू ने कहा है कि नीतीश ने इसके पीछे वजह बताई है कि चूंकि पड़ोसी राज्य उत्तर प्रदेश समेत कुछ अन्य राज्यों में विधानसभा चुनाव होने हैं, इसलिए वह हार्दिक की रैली में नहीं जा पाएंगे.
हार्दिक पटेल ने गुजरात में पाटीदारों यानी पटेलों के लिए सरकारी नौकरियों और कॉलेजों में आरक्षण की मांग को लेकर राज्य की बीजेपी सरकार के खिलाफ व्यापक आंदोलन का नेतृत्व किया था. उनके खिलाफ देशद्रोह के मुकदमे दर्ज हुए थे, जिसमें उन्हें कई महीने जेल में बिताने पड़े. उन्हें पिछले साल कोर्ट द्वारा गुजरात में छह महीने तक प्रवेश नहीं करने की शर्त पर उन्हें जेल से रिहा किया गया था. यह मियाद 17 जनवरी को पूरी हो रही है.
गुजरात से बाहर राजस्थान में रह रहे हार्दिक ने पिछले महीने पटना में नीतीश कुमार से मुलाकात की थी. नीतीश ने हार्दिक का गर्मजोशी से स्वागत किया था और वादा किया था कि वह 28 जनवरी को उनकी (हार्दिक की) रैली में शामिल होंगे. दोनों के बीच दो घंटे की बैठक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधते हुए एक नारा तय किया गया था- मोदी हराओ देश बचाओ.
नीतीश की पार्टी जेडीयू के नेताओं ने कहा है कि हार्दिक की रैली में शामिल न होने के नीतीश के फैसले का शराबबंदी को लेकर बिहार सीएम की प्रधानमंत्री मोदी द्वारा पिछले हफ्ते की गई तारीफ से कोई लेना देना नहीं है.
गौरतलब है कि नीतीश कुमार इकलौते विपक्षी नेता हैं, जिन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नोटबंदी के फैसले का समर्थन किया.
जेडीयू के वरिष्ठ नेता केसी त्यागी ने कहा, हमने हार्दिक को बताया कि नीतीश कुमार अभी चुनावों को लेकर व्यस्त हैं और रैली 11 मार्च के बाद कभी भी आयोजित की जा सकती है. त्यागी ने बताया कि उनकी पार्टी पंजाब और यूपी में कुछ सीटों पर चुनाव लड़ रही है, इसलिए नीतीश कुमार को वहां चुनाव प्रचार के लिए दौरे करने होंगे. उत्तर प्रदेश, पंजाब और तीन अन्य राज्यों में 11 मार्च को मतगणना होगी.
नीतीश कुमार पहले ऐसे राष्ट्रीय नेता थे जिन्होंने पाटीदारों के लिए हार्दिक पटेल के नेतृत्व वाले आंदोलन का समर्थन किया था. पाटीदार समुदाय गुजरात का प्रभावशाली और संपन्न तबका है. बिहार में सत्तारूढ़ महागठबंधन के घटक दल कांग्रेस के कुछ नेता नीतीश के गुजरात रैली में शामिल न होने को राज्य के अन्य समुदाओं को नाखुश न करने की उनकी मंशा के रूप में देख रहे हैं.
NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं
नीतीश कुमार, हार्दिक पटेल, गुजरात, पाटीदार आंदोलन, बिहार, पटना, नरेंद्र मोदी, जेडीयू, Nitish Kumar, Hardik Patel, Gujarat, Bihar, Patna, Narendra Modi, JDU