बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री और हम पार्टी के अध्यक्ष जीतन राम मांझी अपने बयान के कारण सुर्ख़ियां में बने रहने की आदत से वह अपने सहयोगियों के लिए परेशानी का कारण बने रहते है. ताज़ा घटनाक्रम में जीतन राम मांझी ने महागठबंधन के मुख्यमंत्री पद का चेहरा बनने की इच्छा जतायी हैं क्योंकि तेजस्वी यादव को अनुभव की कमी है. मांझी ने ऐसा बयान कोई पहली बार नहीं दिया है और उनके सहयोगी भी उनके बड़बोलेपन के कारण हमेशा सफ़ाई देते रहते हैं. लेकिन मांझी ने यह बयान महागठबंधन की बैठक के दो दिन के अंदर दिया है जब उन्हें मीडिया को ब्रीफ़ करने का ज़िम्मा दिया गया था. हालांकि उस ब्रीफ़िंग में मांझी ने कोई ऐसा बायन नहीं दिया लेकिन गुरुवार को उन्होंने अपनी इच्छा मीडिया के सामने जाहिर कर दिया.
मांझी के इस बयान पर आरजेडी के वरिष्ठ नेता शिवानंद तिवारी ने कहा कि 'जीतन बाबू' अधीर हो रहे हैं. महागठबंधन का नेतृत्व कौन करेगा या बहुमत मिलने पर कौन मुख्यमंत्री बनेगा यह मीडिया में तय नहीं होता है, इसको महागठबंधन के सभी घटक दल आपस में बैठकर तय करेंगे. शिवानंद ने कहा कि अभी दो-तीन दिन पहले महागठबंधन की बैठक हुई थी. उस बैठक में जीतन बाबू भी मौजूद थे. अगर उनके मन में कोई बात थी तो उसको उस बैठक में रखकर सुलझा लिया जाना चाहिए था. वहां इस विषय पर आप मौन रहे. अब मीडिया के ज़रिए सवाल उठाकर जीतन बाबू विरोधियों को मौक़ा दे रहे हैं कि वे हमारा उपहास उड़ाएं.
क्या तेजस्वी यादव अब बिहार में महागठबंधन के नेता नहीं रहे?
शिवानंद ने कहा, 'इससे सिर्फ महागठबंधन का ही उपहास नहीं उड़ रहा है बल्कि जीतन बाबू भी उपहास का पात्र बन रहे हैं. जीतन बाबू महागठबंधन के सम्मानित नेता हैं. उनसे नम्रतापूर्वक मैं अनुरोध करता हूं कि इस प्रकरण में उन्हें जो कुछ भी कहना हो, महागठबंधन के भीतर कहें. इस विषय को सार्वजनिक विवाद का विषय न बनाएं'.
क्या तेजस्वी यादव होंगे बिहार में महागठबंधन का चेहरा?
NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं