बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार (फाइल फोटो)
पटना:
बढ़ते हुए पेट्रोल और डीजल के दाम पर बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का कहना है कि इनकी कीमतें बहुत ज्यादा नहीं होनी चाहिए. हालांकि नीतीश का मानना है कि अगर पेट्रोल-डीजल के दाम ऊपर गए हैं, तो ये नीचे भी आएंगे. नीतीश कुमार सोमवार को अपने जनसंवाद कार्यक्रम के बाद संवादाता सम्मलेन को संबोधित कर रहे थे. पेट्रोलियम पदार्थों को जीएसटी के अंतर्गत लाए जाने की केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री धर्मेंद्र प्रधान की सलाह को लेकर नीतीश फिलहाल इसे लागू करने में बहुत उत्सुक नहीं दिखे. नीतीश का कहना है कि राज्यों को पेट्रोलियम पदार्थों पर टैक्स से जो आय होती है, उससे विकास की बहुत सारी परियोजनाएं चलती हैं, जिस पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है.
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हालांकि नीतीश कुमार ने इस पर तुरंत सफाई भी दी कि इस मुद्दे पर वह पहले अपने सहयोगी बीजेपी से बात करेंगे. नीतीश का कहना है कि वह एक मिनट में अपनी राय नहीं बना सकते हैं. वहीं बिहार के वित्त मंत्री सुशील मोदी ने कहा कि पेट्रोलियम पदार्थों को जीएसटी के अंतर्गत लाने का प्रस्ताव उसके संविधान में ही है, लेकिन ये कब शामिल किया जाएगा, इसकी कोई तारीख नहीं दी गई है. लेकिन अगर अधिकांश राज्य तैयार हो जाए तो इस पर निर्णय जल्दी भी हो सकता है.
VIDEO : 2014 के बाद सबसे महंगा हुआ पेट्रोल
केंद्र में मनमोहन सरकार के दौरान या बीजेपी के साथ एक बार फिर गठबंधन बनाने से पहले जेडीयू पेट्रोल और डीजल के दामों में वृद्धि होने पर सबसे मुखर विरोध करती थी, लेकिन पार्टी के नेता मानते हैं कि बदली परिस्थितियों में पार्टी के पास शांत रहने के अलावा कोई विकल्प नहीं है.
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हालांकि नीतीश कुमार ने इस पर तुरंत सफाई भी दी कि इस मुद्दे पर वह पहले अपने सहयोगी बीजेपी से बात करेंगे. नीतीश का कहना है कि वह एक मिनट में अपनी राय नहीं बना सकते हैं. वहीं बिहार के वित्त मंत्री सुशील मोदी ने कहा कि पेट्रोलियम पदार्थों को जीएसटी के अंतर्गत लाने का प्रस्ताव उसके संविधान में ही है, लेकिन ये कब शामिल किया जाएगा, इसकी कोई तारीख नहीं दी गई है. लेकिन अगर अधिकांश राज्य तैयार हो जाए तो इस पर निर्णय जल्दी भी हो सकता है.
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केंद्र में मनमोहन सरकार के दौरान या बीजेपी के साथ एक बार फिर गठबंधन बनाने से पहले जेडीयू पेट्रोल और डीजल के दामों में वृद्धि होने पर सबसे मुखर विरोध करती थी, लेकिन पार्टी के नेता मानते हैं कि बदली परिस्थितियों में पार्टी के पास शांत रहने के अलावा कोई विकल्प नहीं है.
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