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2000 रुपए महीने से चलाते थे घर, बिहार के इस कपल ने शहद से कैसे बदली किस्मत, अब कमाई लाखों में

Honey Couple Bihar: पश्चिमी चम्पारण का यह ‘हनी कपल’ उन युवाओं और महिलाओं के लिए प्रेरणा है, जो सीमित संसाधनों के कारण खुद को कमजोर समझते हैं. यह कहानी बताती है कि अगर खेती और उससे जुड़े व्यवसायों को वैज्ञानिक तरीके से अपनाया जाए. बगहा से बिंदेश्वर कुमार की रिपोर्ट

  • सत्येंद्र सिंह और सुमन देवी ने मधुमक्खी पालन से गरीबी से उबरकर लाखों रुपये की कमाई करना शुरू किया
  • शुरुआत में सीमित संसाधनों के साथ 20 मधुमक्खी बॉक्स से शहद उत्पादन की शुरुआत की गई थी
  • आज उनके पास सौ से अधिक बॉक्स हैं और वे पूरी तरह रसायन-मुक्त शहद का उत्पादन करते हैं
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कभी महीने के सिर्फ 2 हजार रुपये में परिवार चलाने की मजबूरी और आज वही दंपति लाखों रुपये महीना कमा रहा है. यह कहानी बिहार के पश्चिम चंपारण के इंडो नेपाल बॉर्डर से सटे कदमहिया गांव की है, एक समय था जब हालात ने घेर लिया था, लेकिन हौसलों ने हार नहीं मानी. सत्येंद्र सिंह और उनकी पत्नी सुमन देवी, जिन्हें आज लोग ‘हनी कपल' के नाम से जानते हैं, कभी गरीबी और संघर्ष से जूझ रहे थे. आज शहद के सहारे उन्होंने न सिर्फ अपनी ज़िंदगी की दिशा बदली है, बल्कि गांव और समाज के लिए प्रेरणा की मिसाल भी बन गए हैं.

संघर्ष और सोच का बदलाव

शुरुआत में सत्येंद्र सिंह आंध्रप्रदेश में एक सुपर बाजार में बिलिंग का काम करते थे. बाद में वे एक निजी स्कूल में शिक्षक बने. पढ़ाने का अनुभव तो था, लेकिन आमदनी इतनी सीमित थी कि बच्चों की पढ़ाई, इलाज और रोजमर्रा के खर्च पूरे करना मुश्किल होता जा रहा था. कई बार हालात ऐसे बन जाते थे कि घर की ज़रूरी ज़रूरतें भी अधूरी रह जाती थीं. इसी संघर्ष भरे दौर में उन्होंने महसूस किया कि अब सिर्फ नौकरी के सहारे भविष्य सुरक्षित नहीं किया जा सकता. इसी तलाश के दौरान उन्हें मधुमक्खी पालन (बी-कीपिंग) के बारे में जानकारी मिली. शुरुआत में यह काम जोखिम भरा लगा, लेकिन सत्येंद्र ने इसे मजबूरी नहीं, बल्कि एक अवसर के रूप में देखा. यही वह मोड़ था, जहां से उनकी सोच और दिशा दोनों बदलने लगीं.

20 बॉक्स से रखी सफलता की नींव

सीमित संसाधनों के बावजूद सत्येंद्र और सुमन देवी ने हिम्मत जुटाई और 20 मधुमक्खी बॉक्स से शहद उत्पादन की शुरुआत की. शुरुआती दिनों में चुनौतियां कम नहीं थीं-मधुमक्खियों की देखभाल, मौसम का असर, शहद निकालने की सही तकनीक और बाजार तक पहुंच बड़ी समस्याएं रहीं. कई बार नुकसान भी उठाना पड़ा, लेकिन दंपति ने हार मानने के बजाय हर गलती से सीखना जारी रखा. उन्होंने सरकारी प्रशिक्षण कार्यक्रमों में हिस्सा लिया, अनुभवी लोगों से सलाह ली और धीरे-धीरे अपने काम को तकनीकी रूप से मजबूत बनाया.

मेहनत, गुणवत्ता और भरोसे की पहचान

लगातार मेहनत का असर जल्द ही दिखने लगा. आज उनके पास 100 से अधिक मधुमक्खी बॉक्स हैं और वे पूरी तरह ऑर्गेनिक सरसों व देसी फूलों से शहद का उत्पादन कर रहे हैं. रसायन-मुक्त और शुद्ध शहद होने के कारण ग्राहकों का भरोसा लगातार उन पर बढ़ता गया. स्वाद के साथ-साथ उनके शहद के औषधीय गुणों ने भी लोगों का ध्यान खींचा, जिससे इसकी मांग स्थानीय बाजार से निकलकर दूसरे राज्यों तक पहुंच गई.

लाखों की कमाई और आत्मनिर्भरता

आज यह ‘हनी कपल' सालाना करीब 6 से 7 लाख रुपये तक की कमाई कर रहा है. उनके शहद की कीमत 600 से 700 रुपये प्रति किलो तक मिलती है. बिहार के साथ-साथ दिल्ली, कोलकाता और असम जैसे बड़े बाजारों में भी उनके उत्पाद की सप्लाई हो रही है. ऑनलाइन माध्यमों से जुड़ने के बाद उनके कारोबार को और रफ्तार मिली है.

महिला सशक्तिकरण की मजबूत मिसाल

इस सफलता की सबसे खास बात यह है कि सुमन देवी ने अपने अनुभव को सिर्फ अपने परिवार तक सीमित नहीं रखा. उन्होंने अब तक 60 से अधिक महिलाओं को मधुमक्खी पालन का प्रशिक्षण दिया है. आज कई महिलाएं अपने घर के पास रहकर ही आमदनी कर रही हैं, जिससे उनका आत्मविश्वास बढ़ा है और समाज में सम्मान भी मिला है. ग्रामीण इलाके में यह पहल महिला सशक्तिकरण की एक मजबूत मिसाल बन चुकी है.

सरकारी सहयोग से मिली मजबूती

दंपति की मेहनत और लगन को देखते हुए सरकारी योजनाओं के तहत उन्हें करीब 4 लाख रुपये का ऋण भी उपलब्ध कराया गया. इस सहयोग से उन्होंने नए बॉक्स खरीदे, उत्पादन क्षमता बढ़ाई और अपने व्यवसाय को और मजबूत किया.

पश्चिमी चम्पारण का यह ‘हनी कपल' उन युवाओं और महिलाओं के लिए प्रेरणा है, जो सीमित संसाधनों के कारण खुद को कमजोर समझते हैं. यह कहानी बताती है कि अगर खेती और उससे जुड़े व्यवसायों को वैज्ञानिक तरीके से अपनाया जाए, तो गांव में रहकर भी सम्मानजनक और स्थायी आमदनी संभव है. कभी दो हजार रुपये में गुजर-बसर करने वाला यह परिवार आज सिर्फ शहद नहीं बेच रहा, बल्कि आत्मनिर्भर भारत, महिला सशक्तिकरण और ग्रामीण उद्यमिता का मीठा संदेश पूरे देश तक पहुंचा रहा है.

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