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This Article is From Nov 05, 2017

हामिद अंसारी ने नीतीश पर साधा निशाना, कहा- कल तक जो प्रेमी थे आज बागी हो गए

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार श्रोता बनकर पूर्व उप राष्ट्रपति को सुनते रहे, पूर्व सांसद सैय्यद शाहबुद्दीन की पहली पुण्यतिथि पर कार्यक्रम आयोजित

हामिद अंसारी ने नीतीश पर साधा निशाना, कहा- कल तक जो प्रेमी थे आज बागी हो गए
पूर्व उप राष्ट्रपति हामिद अंसारी (फाइल फोटो).
  • हामिद अंसारी ने सैय्यद शहाबुद्दीन के कई संस्मरण सुनाए
  • कहा- समाज को सहेजकर साथ रखने के लिए सभी वर्गों को विचार करना होगा
  • मुचकुन्द दुबे ने कहा- शाहबुद्दीन जीनियस थे और विदेश सेवा संकुचित स्पेस था
पटना: बिहार की धरती में बागी भी पैदा होते हैं और प्रेमी भी पैदा होते हैं.  लेकिन अक्सर  देखा ये गया है कि बागी प्रेमी हो गए, प्रेमी बागी हो गए.  ये बिहार की खासियत है. यह कहना है पूर्व उप राष्ट्रपति हामिद अंसारी का.  वे शनिवार को पूर्व सांसद सैय्यद शाहबुद्दीन की पहली पुण्यतिथि पर पटना के चैंबर ऑफ कॉमर्स के कार्यक्रम में बोल रहे थे.  

जिस समय अंसारी बोल रहे थे उस समय मुख्यमंत्री नीतीश कुमार भी वहां मौजूद थे. लेकिन वे इस कार्यक्रम में मंच पर नहीं थे, बल्कि श्रोता बनकर अंसारी को सुन रहे थे. हामिद अंसारी ने कहा कि बिहार और बिहारियों में कई विशेषताएं होती हैं. मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पर चुटकी लेते हुए उन्होंने कहा कि कल तक जो प्रेमी थे आज बागी हो गए. उन्होंने आज़ादी की लड़ाई का जिक्र करते हुए बिस्मिल अज़ीमाबादी का उल्लेख किया कि उन्होंने आज़ादी की लड़ाई में सरफ़रोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में है कहा था, जिसके लिए उनकी गिरफ़्तारी हुई और उस समय कोर्ट के जज ने भी सुनकर उन लाइनों को कैसे सुधारा.

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इस अवसर पर अंसारी ने विदेश सेवा में सैय्यद शहाबुद्दीन के साथ बिताए समय के कई संस्मरण सुनाए. अंसारी ने अपने भाषण में सामाजिक समग्रता पर कहा कि ये अब ऑप्शन की बात नहीं बल्कि लाजिमी हैं.  लेकिन समाज को सहेजकर और साथ रखने के लिए राजनैतिक, अकादमिक सभी वर्ग के लोगों को इस पर विचार करना होगा.  

VIDEO : अल्पसंख्यकों में असहजता

भारत के विकास में किसकी कितनी साझेदारी विषय पर बोलते हुए पूर्व विदेश सचिव मुचकुन्द दुबे ने सैय्यद शाहबुद्दीन के कई संस्मरण सुनाए. उन्होंने बताया कि कैसे विदेश सेवा में चयन होने के बाबजूद वाम दलों में सक्रियता के कारन ज्वाइनिंग में विलम्ब हुआ. दुबे ने कहा कि शाहबुद्दीन एक जीनियस थे और विदेश सेवा उनके लिए संकुचित स्पेस था. इसलिए राजनीति में जाना उनके लिए एक तार्किक कदम था. कार्यक्रम में मंच पर परवीन अमानुल्लाह भी मौजूद थे.
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