कर्ज का जंजाल कितना जानलेवा हो सकता है, इसकी एक खौफनाक तस्वीर गोपालगंज में देखने को मिली है. यहां एक मुर्गा व्यवसायी ने सूदखोरों के आतंक से तंग आकर कीटनाशक खाकर जान देने की कोशिश की. पीड़ित फिलहाल अस्पताल में जिंदगी और मौत के बीच जंग लड़ रहा है.
क्या है पूरा मामला?
मामला नगर थाना क्षेत्र के मठिया गांव का है. पीड़ित का नाम जावेद कुरैशी है. वह गोपालगंज शहर में मुर्गा का व्यवसाय करता है. पीड़ित जावेद के भाई नसीरुद्दीन ने बताया कि उनके 25 वर्षीय भाई जावेद कुरैशी ने व्यवसाय को चलाने और मां की बीमारी के इलाज के लिए बाजार से 50 हजार रुपए सूद पर पैसे लिए थे. रोजाना 500 रुपए सूद की दर थी. दो-तीन साल तक लगातार सूद के पैसे भरने के बावजूद वह 50 हजार की रकम नहीं जमा कर पाया. वह कई फीसदी ज्यादा इंटरेस्ट रेट की वजह से सूद की राशि ही चुकाने में बेचैन था.
कर्ज चुकाने के लिए कई कर्ज
पीड़ित परिजनों ने आगे बताया कि जब उनका भाई लगातार सूद के पैसा भरने के बावजूद भी जब पूरी रकम वापस नहीं कर पाया तो सूदखोर महाजन का दबाव बढ़ने लगा. वह दबाव और धमकी के बाद उधार के पैसे को भरने के लिए दूसरे सूदखोर से ज्यादा इंटरेस्ट पर पैसे लिया और फिर तीसरे और चौथे सूदखोर से पैसे लिए.
कर्ज के मकड़जाल में फंसा
उधार के पैसे को भरने के लिए दूसरा उधार और फिर तीसरा उधार लेते उसका सूद 50 हजार की मूलधन से बढ़कर करीब 10 लाख रुपए हो गया. इसके बाद भी वह सूदखोरों के महाजाल से बाहर नहीं निकल पाया. बल्कि पैसे के मकड़जाल में फंसता चलता गया. पीड़ित की पत्नी ने बताया कि जिस मां की बीमारी में इलाज के लिए पैसे लिए, उस मां की भी इलाज के दौरान मौत हो गई. सूद का पैसा तीन साल में बढ़कर दस लाख रुपए हो गया.
अब जब कई देनदारों ने उसके ऊपर पैसे के वापसी का दबाव बनाना शुरू कर दिया. तो उनके डर और धमकी की वजह से रविवार को 25 वर्षीय पीड़ित जावेद ने घर में रखें कीटनाशक दवाई खाकर सुसाइड करने की कोशिश की. सुसाइड करने की नियत से जहर वाली गोली खाते ही उसकी हालत बिगड़ने लगी, जिसके बाद परिजनों ने आननफानन में उसे मॉडल अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड में भर्ती कराया है. पीड़ित की हालत नाजुक है और डॉक्टर के देखरेख में उसका इलाज किया जा रहा है.
डॉक्टर्स ने दी ये जानकारी
ड्यूटी पर मौजूद चिकित्सक ने बताया कि पॉयजनिंग का केस आया है. पीड़ित का ट्रीटमेंट किया जा रहा है. हालत स्थिर करने की कोशिश की जा रही है.
पीड़ित के भाई नसीरुद्दीन ने बताया कि आज भी घर में डर और दहशत का माहौल है. उन्हें हमेशा डर रहता है कि कोई सूदखोर घर धमक जाएगा और सरेआम गाली गलौज करने लगेगा. परिजनों के मुताबिक दस लाख की इतनी बड़ी रकम उन्होंने अभी तक नहीं देखी है. फिर कैसे वे सूद के पैसे को वापस करेंगे. पीड़ित के घर वालों को सूदखोरों का डर इतना है कि वे उनका नाम सार्वजनिक करने से कतरा रहे है.
NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं