- बेगूसराय कोर्ट ने छह साल पुरानी ट्रिपल मर्डर केस में विकास कुमार को फांसी की सजा सुनाई है
- विकास कुमार ने दीपावली की रात अपने भाई, भाभी और भतीजी की गोली मारकर हत्या कर दी थी
- कोर्ट ने आईपीसी की धारा 302, 307 और आर्म्स एक्ट के तहत विकास कुमार को दोषी माना है
बेगूसराय कोर्ट ने आज अपने ऐतिहासिक फैसले में ट्रिपल मर्डर के दोषी को फांसी की सजा सुनाई है. बेगूसराय कोर्ट के इतिहास में यह तीसरा ऐतिहासिक फैसला है जब कोर्ट ने किसी मुजरिम को फांसी की सजा सुनाई है. यह फैसला एक ऐसे अपराधी के खिलाफ आया है जिसने अपने सगे भाई, भाभी और भतीजे की एक साथ गोली मारकर हत्या कर दी थी. उसने अपने दूसरे भतीजे को मारने की कोशिश भी की थी लेकिन वह किसी तरह भागने में कामयाब रहा था. इस घटना को अपराधी ने उस दिन अंजाम दिया था जब पूरा देश दीपावली मना रहा था.
6 साल पहले घटी इस घटना में आए इस फैसले के बाद लोगों के जेहन में यह घटना फिर ताजा हो गईं है. आज से छह साल पहले मचहा गांव में विकास कुमार ने संपत्ति के लिए अपने भाई भाभी और भतीजा की गोली मारकर हत्या कर दी थी. इस घटना में विकास कुमार ने अपने दूसरे भतीजे पर भी गोली चलाई थी लेकिन वो किसी तरह भाग कर अपनी जान बचाई थी.
क्या है मामला?
आज से 6 साल पहले 27 अक्टूबर 2019 को पूरा देश दीपावली के दीयों से जगमगा रहा था. उसी दिन मचहा गांव में विकास कुमार के सिर पर खून सवार था. जमीन के लालच में उसने अपने ही सगे भाई कुणाल कुमार, भाभी कंचन देवी और मासूम भतीजी सोनम कुमारी की अंधाधुंध गोलियां बरसाकर हत्या कर दी. हत्यारा यहीं नहीं रुका, उसने अपने भतीजे शिवम कुमार के सीने में भी पिस्टल सटाकर दो बार ट्रिगर दबाया. लेकिन, किस्मत से गोली खत्म हो गई थी और शिवम वहां से भागकर अपनी जान बचाने में सफल रहा. इसी शिवम की गवाही आज इस केस में इंसाफ का सबसे बड़ा आधार बनने जा रही है. जस्टिस ब्रजेश कुमार सिंह की अदालत ने साक्ष्यों और गवाहों के आधार पर विकास कुमार को आईपीसी की धारा 302 (हत्या), 307 (हत्या का प्रयास) और 27 आर्म्स एक्ट के तहत दोषी पाया.

सजा पर शिवम ने क्या कहा?
शिवम बाल-बाल बच गया था. उसने कहा कि आज मैं बहुत खुश हूं क्योंकि मेरे माता-पिता और बहन की हत्यारे मेरे चाचा को आज कोर्ट ने फांसी की सजा सुनाई है. घटना के बारे में शिवम बताते हैं कि 2019 की बात है रात 11 बजे के लगभग मेरे अंकल ने मेरे घर में घुसकर मेरे माता-पिता और बहन की हत्या कर दी. मुझे भी मारने की कोशिश की लेकिन गोली नहीं चली. हम किसी तरह जान बचाकर वहां से भाग गए. घटना के दिन हम घर के बाहर पटाखे फोड़ रहे थे तभी गोली चलने की आवाज सुनाई दी तो हम घर के अंदर गए तो देखा कि मेरे चाचा गोली चला रहे हैं. संपत्ति के लालच में मेरे चाचा ने दूसरे चाचा-चाची की भी हत्या कर दी थी. मेरे भी माता-पिता और बहन की हत्या जमीन के लालच में की. कोर्ट ने आज उनको मौत की सजा सुनाई है मैं बहुत खुश हूं आज मुझे इंसाफ मिल गया.
अपने ही परिवार के 5 लोगों की हत्या
विकास कुमार अपने ही परिवार के 5 लोगों की हत्या कर चुका है. 2012 में चाचा की हत्या के मामले में उसे आजीवन कारावास की सजा हुई थी. इसके बाद 2017 में चाची की हत्या कर दी. 2019 में फिर अपने भाई, भाभी और भतीजी की गोली मारकर हत्या कर दी थी. सरकारी वकील राम प्रकाश यादव ने बताया कि ऐसे लोगों का समाज में रहना कलंक की बात है. कोर्ट ने इस घटना को रेयरेस्ट ऑफ द रेयर माना है और इसलिए फांसी की सजा सुनाई है.

फर्जी बेल ऑर्डर भी तैयार किया था
विकास कुमार ने सिर्फ खून-खराबा ही नहीं किया, बल्कि अदालत की आंखों में धूल झोंकने की भी कोशिश की थी. 2013 में चाचा की हत्या के आरोप में वह जेल में था. जब हाईकोर्ट ने उसकी जमानत अर्जी खारिज कर दी, तो उसने शातिर दिमाग का इस्तेमाल कर 17 अक्टूबर 2014 को हाईकोर्ट का एक फर्जी बेल ऑर्डर तैयार करवाया और जेल से बाहर निकल गया. इस फर्जीवाड़े की जानकारी हाईकोर्ट को मिली तो 29 अप्रैल 2015 को कोर्ट ने इसे गंभीरता से लिया और मामले की CBI जांच के आदेश दिए. सीबीआई की जांच में फर्जीवाड़ा साबित हुआ, लेकिन बाहर रहने के दौरान ही उसने 2017 और 2019 की हत्याओं को अंजाम दे डाला. 2019 में दीपावली की रात पिस्टल से 16 गोली चलाकर भाई, भाभी और भतीजी की हत्या करने के बाद विकास भागकर देवघर चला गया. लेकिन जांच कर रही पुलिस ने टेक्निकल सर्विलांस के आधार पर उसे देवघर से गिरफ्तार कर लिया.
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