- बिहार के अंचल अधिकारी अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चले गए हैं, जिससे राज्य की राजस्व व्यवस्था पूरी तरह ठप हो गई है
- अधिकारियों का कहना है कि नए अनुमंडल राजस्व पदाधिकारी पद से उनकी भूमिका कमजोर होगी और काम में भ्रम बढ़ेगा
- इस कारण जमीन की मापी, दाखिल-खारिज और महत्वपूर्ण प्रमाण-पत्रों के सत्यापन जैसे कई कार्य प्रभावित हो रहे हैं
बिहार के प्रशासनिक गलियारों से इस वक्त की सबसे बड़ी खबर सामने आ रही है. राज्य के सभी अंचल अधिकारी (CO) आज से अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चले गए हैं. इस हड़ताल ने पूरे बिहार की राजस्व व्यवस्था की कमर तोड़ दी है. जमीन की मापी से लेकर दाखिल-खारिज (Mutation) तक के सारे काम पूरी तरह ठप पड़ गए हैं, जिससे आम जनता की मुश्किलें बढ़ गई हैं.
हड़ताल का मुख्य कारण: 'नए पद' पर रार
अंचल अधिकारियों के इस उग्र आंदोलन की जड़ में सरकार का एक ताजा फैसला है. सरकार ने राजस्व विभाग में 'अनुमंडल राजस्व पदाधिकारी' के नए पद सृजित करने का निर्णय लिया है. अधिकारियों का तर्क है कि नया पद सृजित करने से अंचल स्तर पर काम कर रहे अधिकारियों की भूमिका कमजोर होगी.
राजस्व विभाग में पहले से ही जिम्मेदारियों का स्पष्ट बंटवारा नहीं है. नया पद आने से 'चेक एंड बैलेंस' के बजाय भ्रम और बढ़ेगा. डर है कि असली फैसले ऊपर से थोपे जाएंगे और अंचल अधिकारी महज कागजी पुतले बनकर रह जाएंगे. इससे काम का बोझ बढ़ेगा और अधिकारी एक-दूसरे पर जिम्मेदारी टालेंगे. हड़ताल पर एक अफसर ने कहा, "सरकार को नए पद बनाने के बजाय खाली पड़े पदों को भरना चाहिए और तकनीकी संसाधनों में सुधार करना चाहिए."
आम जनता पर पड़ रहा है सीधा असर
अंचल अधिकारी राजस्व प्रशासन की रीढ़ होते हैं. इनके काम बंद करने से ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में हाहाकार मचा है. जमीन की रजिस्ट्री के बाद होने वाला म्यूटेशन पूरी तरह रुक गया है. सीमा विवाद सुलझाने के लिए होने वाली मापी (Measurement) बंद है. जमीन के दस्तावेज अपडेट न होने के कारण हजारों लोगों के होम लोन और बिजनेस लोन अटक गए हैं. आय, जाति और निवास जैसे महत्वपूर्ण प्रमाण-पत्रों का सत्यापन नहीं हो पा रहा है.
गुप्त बैठक और आगे की रणनीति
सूत्रों के अनुसार, राजधानी पटना में अंचल अधिकारियों ने एक गुप्त स्थान पर बड़ी बैठक की है. आंदोलन को और तेज करने या सरकार के साथ बातचीत के लिए प्रतिनिधिमंडल भेजने पर चर्चा चल रही है. बैठक को गुप्त इसलिए रखा गया है ताकि किसी भी तरह के प्रशासनिक दबाव या हस्तक्षेप से बचा जा सके.
हालांकि सरकार की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है, लेकिन प्रशासनिक हलकों में चर्चा है कि नया पद राजस्व मामलों में तेजी और बेहतर निगरानी के लिए लाया गया है. बिहार सरकार जल्द ही अधिकारियों को वार्ता के लिए बुला सकती है, क्योंकि यह हड़ताल जितनी लंबी खिंचेगी, सरकार पर राजनीतिक और प्रशासनिक दबाव उतना ही बढ़ेगा.
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