- बिहार की किशनगंज पुलिस ने मंजर आलम की हत्या का मामला मात्र चौबीस घंटे में सुलझा लिया
- मृतक मंजर आलम के भाई संजर आलम ने अपनी पुरानी रंजिश के चलते हत्या की साजिश रची थी
- आरोपियों ने मंजर आलम को डंडे से पीट-पीटकर हत्या की और मोबाइल फोन नष्ट कर सबूत मिटाने की कोशिश की
बिहार के किशनगंज की पुलिस कितनी मुस्तैद है, इस बात का अंदाजा इसी बात से लगा लीजिए कि उसने सुपारी और हत्याकांड का मामला महज 24 घंटे में सुलझा लिया. पुलिस कने जांच तेज करते हुए हत्यारे भाई को धर दबोचा. पुलिस ने बहादुरगंज थाना क्षेत्र के झिलझिली गांव के 46 साल के मंजर आलम की सुपारी और हत्या का मामले में उसके भाई समेत अन्य आरोपियों को गिरफ्तार किया है.
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पुलिस के हत्थे चढ़े 5 आरोपी
इस मामले में 5 आरोपी पुलिस के हत्थे चढ़ चुके हैं. हत्या में इस्तेमाल दो मोटरसाइकिल, मोबाइल फोन और डंडा भी जब्त कर लिया गया है. बता दें कि 3 फरवरी की रात निशान्दरा के पास सड़क किनारे एक शव मिलने की सूचना पुलिस को मिली थी. शव की पहचान मंजर आलम के रूप में हुई. उनकी पत्नी परवीन बेगम के आवेदन पर मामले दर्ज किया गया.

सुपारी देकर करवाई सगे भाई की हत्या
जांच में चौंकाने वाला खुलासा हुआ है. पता चला है कि मृतक और उसके सगे भाई संजर आलम के बीच पुरानी रंजिश थी. संजर ने इसी रंजिश में अपने साथी मोहम्मद मुनवर को 3 लाख रुपये की सुपारी देकर भाई की हत्या करवा दी. आरोपियों ने मंजर आलम को सुनसान जगह ले जाकर डंडे से पीट-पीटकर मार डाला. सबूत मिटाने के लिए मोबाइल नष्ट किया और शव नदी में फेंकने की कोशिश की, लेकिन पुलिस ने घटनास्थल से ही महत्वपूर्ण साक्ष्य जुटा लिए.
न्यायिक हिरासत में भेजे गए सभी आरोपी
गिरफ्तार सभी आरोपी बहादुरगंज थानाक्षेत्र के रहने वाले हैं. गिरफ्तार आरोपियों में मृतक मंजर का भाई संजर आलम भी शामिल है, जो इस हत्याकांड का मुख्य साजिशकर्ता हैं. उसके साथ ही मो. मुनवर आलम (21 वर्ष), बाबू आलम (28 वर्ष), शहबाज आलम (27 वर्ष), नफीस आलम (27 वर्ष) को गिरफ्तार किया गया है. अपराध कबूल करने के बाद सभी को न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है. पुलिस जल्द चार्जशीट दाखिल करेगी. किशनगंज के पुलिस कप्तान संतोष कुमार ने कहा कि यह घटना पारिवारिक रंजिश की खतरनाक हद और किशनगंज पुलिस की मुस्तैदी का जीता-जागता उदाहरण है.
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