- बिहार में स्वास्थ्य विभाग में डस्टबिन खरीद का मुद्दा बढ़ता जा रहा है
- आरजेडी नेता तेजस्वी यादव ने इस मामले में मंगल पांडेय पर निशाना साधा है
- उधर, प्रशांत किशोर ने डस्टबिन खरीद पर फिलहाल चुप्पी साध रखी है
बिहार में स्वास्थ्य विभाग की एक पुरानी खरीद अब बड़ा राजनीतिक मुद्दा बनती जा रही है. अस्पतालों के लिए डस्टबिन और दूसरी सामग्री की खरीद में कथित गड़बड़ी को लेकर विपक्ष सरकार पर सवाल उठा रहा है. आरोप है कि करीब 300 करोड़ रुपये से अधिक की खरीद में सामान की कीमत बाजार से काफी ज्यादा रखी गई. इसी को लेकर आरजेडी नेता तेजस्वी यादव ने तत्कालीन स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडेय को सीधे तौर पर जिम्मेदार ठहराते हुए पूरे मामले की जांच की मांग की है। दूसरी ओर जन सुराज के नेता प्रशांत किशोर ने इस मामले में अभी कोई सीधा आरोप लगाने से इनकार किया है. उन्होंने कहा है कि वह पूरे मामले की जानकारी ले रहे हैं और दस्तावेज देखने के बाद अपनी प्रतिक्रिया देंगे.
डस्टबिन खरीद में विपक्ष का क्या आरोप
विवाद सबसे ज्यादा डस्टबिन की कीमत को लेकर है। विपक्ष का आरोप है कि सामान्य बाजार में करीब 1500 रुपये में मिलने वाला डस्टबिन सरकारी अस्पतालों के लिए करीब 15 हजार रुपये से अधिक में खरीदा गया. इसी कीमत के आधार पर विपक्ष ने पूरी खरीद प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं. आरोप है कि जिस सामान को बाजार में कम कीमत पर खरीदा जा सकता था, उसके लिए सरकारी पैसे से कई गुना ज्यादा भुगतान किया गया. इसी वजह से विपक्ष इसे डस्टबिन खरीद का बड़ा घोटाला बता रहा है.
मंगल पांडेय पर हमला
तेजस्वी यादव ने इस मामले को लेकर सरकार पर सीधा हमला किया है. उन्होंने तत्कालीन स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडेय को दोषी ठहराते हुए पूरे मामले की जांच कराने की मांग की है. तेजस्वी का कहना है कि सरकारी पैसे से हुई इतनी बड़ी खरीद में यह पता चलना चाहिए कि सामान की कीमत किसने तय की, खरीद का फैसला किस स्तर पर हुआ और किस कंपनी से सामान खरीदा गया. उनका सवाल है कि अगर बाजार में सामान कम कीमत पर उपलब्ध था तो सरकार ने इतनी ज्यादा कीमत क्यों चुकाई.
स्वास्थ्य विभाग का पक्ष
सरकार और स्वास्थ्य विभाग का पक्ष इससे अलग है. सरकारी पक्ष का कहना है कि जिस सामान को विपक्ष सामान्य डस्टबिन बता रहा है, वह अस्पतालों में मेडिकल कचरे के इस्तेमाल के लिए तैयार किया गया विशेष सामान है. इसलिए इसकी तुलना घर या बाजार में मिलने वाले सामान्य डस्टबिन से करना सही नहीं है. विभाग का कहना है कि अस्पतालों में इस्तेमाल होने वाले सामान की गुणवत्ता और तकनीकी जरूरत अलग होती है. यही इस पूरे विवाद का सबसे बड़ा सवाल भी है. अगर यह सामान्य डस्टबिन नहीं बल्कि अस्पतालों में इस्तेमाल होने वाला विशेष कंटेनर था, तो उसकी वास्तविक कीमत कितनी थी? क्या दूसरे राज्यों या दूसरे सरकारी अस्पतालों में भी ऐसा ही सामान खरीदा गया? कितनी कंपनियों ने टेंडर में हिस्सा लिया? किस कंपनी को काम मिला? कीमत तय करने के लिए किस दर को आधार बनाया गया? और सबसे अहम, क्या सरकार ने बाजार की कीमत की जांच की थी? इन सवालों के जवाब सामने आने के बाद ही तस्वीर साफ होगी.
इस मामले में प्रशांत किशोर का रुख भी राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण है. उन्होंने कहा है कि वह फिलहाल इस मामले की पूरी जानकारी ले रहे हैं. उनका कहना है कि पहले पूरे मामले को समझेंगे और दस्तावेज तथा तथ्य देखने के बाद अपनी प्रतिक्रिया देंगे. प्रशांत किशोर का यह रुख तेजस्वी यादव से अलग है. जहां तेजस्वी ने सीधे मंगल पांडेय को जिम्मेदार बताया है, वहीं प्रशांत किशोर ने पहले तथ्य देखने की बात कही है.
प्रशांत किशोर अब बांकीपुर से विधायक बनकर विधानसभा में पहुंच चुके हैं. ऐसे में सरकार से जुड़े किसी भी विवाद पर उनकी प्रतिक्रिया पर नजर रहेगी. राजनीतिक तौर पर यह मामला इसलिए भी अहम है क्योंकि तेजस्वी यादव और प्रशांत किशोर, दोनों अब सरकार के खिलाफ अपनी-अपनी भूमिका मजबूत करने की कोशिश कर रहे हैं. तेजस्वी ने सीधे हमला बोला है, जबकि प्रशांत किशोर ने तथ्य देखने के बाद बोलने का फैसला किया है. आने वाले दिनों में अगर जांच की मांग तेज होती है, तो डस्टबिन खरीद का यह विवाद बिहार विधानसभा में भी सरकार के लिए एक नया सवाल बन सकता है.
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