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This Article is From Nov 13, 2025

Bisfi Election Result: बिस्फी में BJP के फायरब्रांड नेता हरिभूषण ठाकुर की हार, RJD के आसिफ अहमद ने किया चित

मधुबनी जिले की बिस्फी विधानसभा सीट से बीजेपी के फायरब्रांड नेता हरिभूषण ठाकुर बचौल हार गए हैं. हरिभूषण ठाकुर को राजद के आसिफ अहमद ने 8107 वोटों के अंतर से हराया.

Bisfi Election Result: बिस्फी में BJP के फायरब्रांड नेता हरिभूषण ठाकुर की हार, RJD के आसिफ अहमद ने किया चित
बिस्फी के पूर्व विधायक हरिभूषण ठाकुर बचौल, जिन्हें करना पड़ा हार का सामना.
मधुबनी:

Bisfi Vidhan Sabha Result: बिहार के मधुबनी जिले में स्थित बिस्फी विधानसभा सीट से बीजेपी के फायरब्रांड नेता हरिभूषण ठाकुर बचौल को हार का सामना करना पड़ा है. हरिभूषण ठाकुर की पहचान मुखर बयानबाजी के रूप में होती है. पार्टी ने उन्हें बिस्फी से फिर से चुनावी मैदान में उतारा था. लेकिन इस बार राजद के आसिफ अहमद ने हरिभूषण ठाकुर को चित कर दिया. हरिभूषण ठाकुर को कुल 92664 वोट मिले. जबकि राजद के 100771 वोट मिले. आसिफ अहमद ने हरिभूषण ठाकुर बचौल को 8107 वोटों के अंतर से हराया. यहां से जन सुराज के संजय कुमार मिश्रा को 3124 वोट मिले.  

बिस्फी विधानसभा सीट का रिजल्ट देखें.

बिस्फी विधानसभा सीट का रिजल्ट देखें.

 मालूम हो कि बिस्फी मिथिला की सांस्कृतिक और ऐतिहासिक विरासत का एक महत्वपूर्ण केंद्र है. यह मधुबनी संसदीय क्षेत्र का हिस्सा है और इसके अंतर्गत बिस्फी प्रखंड की 28 और रहिका प्रखंड की 12 ग्राम पंचायतें आती हैं. बिस्फी से बीजेपी के फायरब्रांड नेता हरिभूषण ठाकुर बचौल 2020 में विधायक बने थे. 

बिस्फी विधानसभा सीट पर दूसरे चरण में 11 नवंबर को वोटिंग हुई थी. बिस्फी में मतदान का प्रतिशत 62.89 रहा था. अब देखना है कि इस बार बिस्फी की जनता किसे अपना विधायक चुनती है.

बिस्फी में CPI ने 5 बार हासिल की जीत

बिस्फी विधानसभा सीट 1967 में गठित हुई थी और तब से अब तक कुल 14 विधानसभा चुनाव हो चुके हैं. इस क्षेत्र में सीपीआई ने पांच बार, कांग्रेस ने चार बार, आरजेडी और निर्दलीय उम्मीदवारों ने दो-दो बार जीत हासिल की है. अब देखना है कि इस बार यहां क्या होता है.

वर्ष 2020 के विधानसभा चुनाव में पहली बार भाजपा ने यहां सफलता पाई, जब भाजपा उम्मीदवार हरिभूषण ठाकुर ने आरजेडी प्रत्याशी फैयाज अहमद को पराजित किया.

मैथिली कवि विद्यापति का पैतृक गांव

बिस्फी क्षेत्र मिथिला की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक है और 14वीं शताब्दी के महान मैथिली कवि विद्यापति के पैतृक गांव के रूप में ऐतिहासिक महत्व रखता है, जिन्होंने मैथिली साहित्य को समृद्ध किया. इसके अलावा, बिस्फी क्षेत्र प्राचीन विद्वानों जैसे याज्ञवल्क्य और चंद्रेश्वर ठाकुर से जुड़ा हुआ है, जो इसे मैथिली बौद्धिक परंपरा का एक प्रमुख केंद्र बनाते हैं.

क्षेत्र में सौराठ स्थित मिथिला चित्रकला संस्थान, सौराठ सभागाछी, महाकवि विद्यापति की जन्मस्थली बिस्फी और कपिलेश्वर महादेव मंदिर जैसी सांस्कृतिक धरोहरें मौजूद हैं.

मिथिला का बाबाधाम बिस्फी क्षेत्र में

कपिलेश्वर महादेव मंदिर इस क्षेत्र की आध्यात्मिक धरोहर का प्रतीक है. भगवान शिव का भव्य मंदिर कपिल मुनि के नाम पर रखा गया है. कपिल मुनि ने ‘सांख्य दर्शन' को विश्व को दिया था. एक जनश्रुति के अनुसार, राजा जनक प्रतिदिन इस मंदिर में जलाभिषेक करने आते थे, इसलिए इसे ‘मिथिला का बाबाधाम' भी कहा जाता है.

बाढ़ की दश में जूझता है बिस्फी

भौगोलिक दृष्टि से बिस्फी बाढ़-प्रवण मिथिला क्षेत्र में स्थित है. यहां का समतल और उपजाऊ भूभाग कृषि के लिए अनुकूल है, जहां धान, गेहूं और मसूर मुख्य फसलें हैं. हालांकि, सीमित सिंचाई सुविधाओं के कारण यहां के किसान मानसूनी बारिश पर निर्भर हैं. क्षेत्र में सड़क, स्कूल और स्वास्थ्य केंद्र जैसी बुनियादी सुविधाएं अविकसित हैं.

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