बिहार के औरंगाबाद शहर में मंगलवार को तनाव रहा
- बिहार के औरंगाबाद शहर में मंगलवार को तनाव रहा
- एक वीडियो में BJP सांसद सुशील क्रिया की प्रतिक्रिया की बात कर रहे हैं
- औरंगाबाद के डीजी का लोगों से आग्रह, अफवाहों पर ध्यान न दें
क्या हमारी AI समरी आपके लिए उपयोगी रही?
हमें बताएं।
पटना:
बिहार के औरंगाबाद शहर में मंगलवार को तनाव रहा लेकिन वहां सुरक्षा बलों की भारी तैनाती की वजह से कोई अप्रिय घटना नहीं हुई. हालांकि एक वीडियो सामने आया हैं जहां स्थानीय भाजपा सांसद सुशील सिंह क्रिया की प्रतिक्रिया की बात कर रहे हैं.
नीतीश को तेजस्वी से क्यों कहना पड़ा; सुनो बाबू, अभी राजनीति में लंबा करियर है...
वहीं औरंगाबाद के डीजी गुप्तेश्वर पांडे ने कहा कि मैं लोगों से आग्रह करता हूं कि अफवाहों पर ध्यान न दें. आरोपियों को प्रशासन नहीं बख्शेगा. इस मामले में 125 से ज्यादा लोगों को गिरफ्तार किया गया है और गिरफ्तारियां भी की जाएंगी. उन्होंने कहा कि स्थिति सामान्य हो गई है.
मंगलवार सुबह से सुरक्षा बल के जवान औरंगाबाद में वरिष्ठ अधिकारियों के नेतृत्व में मार्च करते रहे. सोमवार को सुरक्षा बलों के सामने ही एक समुदाय के लोगों के दुकान को जैसे आग के हवाले किया गया. उसके बाद राज्य सरकार कोई मौक़ा नहीं ले रही थी. कर्फ्यू नहीं लगाया गया लेकिन सड़कें सन्नाटे में डूबी रहीं.
इस हिंसा के पीछे भाजपा की अंदरूनी राजनीति और ख़ासकर स्थानीय भाजपा सांसद सुशील सिंह की भूमिका संदिग्ध बतायी जा रही हैं. हालांकि सोमवार को जब हिंसा जारी थी तब विपक्ष के नेता तेजस्वी यादव के ये मामला उठाने पर नीतीश कुमार ने ये सफ़ाई दी थी.
सांप्रदायिक तनाव फैलाने का आरोप : मोदी के मंत्री अश्विनी चौबे के बेटे अरिजित की तलाश में जुटी पुलिस
इस बार नीतीश कुमार को हिंसा की उम्मीद थी, लेकिन औरंगाबाद के स्थानीय सांसद के सामने लोगों के दुकान को जैसे आग लगाई गई. वैसे में नीतीश को असल खतरा विरोधियों से ज़्यादा भाजपा जैसे सहयोगी से हैं जो वोट के लिए अब धर्म की आड़ में हिंसा से परहेज़ नहीं करते.
नीतीश को तेजस्वी से क्यों कहना पड़ा; सुनो बाबू, अभी राजनीति में लंबा करियर है...
वहीं औरंगाबाद के डीजी गुप्तेश्वर पांडे ने कहा कि मैं लोगों से आग्रह करता हूं कि अफवाहों पर ध्यान न दें. आरोपियों को प्रशासन नहीं बख्शेगा. इस मामले में 125 से ज्यादा लोगों को गिरफ्तार किया गया है और गिरफ्तारियां भी की जाएंगी. उन्होंने कहा कि स्थिति सामान्य हो गई है.
मंगलवार सुबह से सुरक्षा बल के जवान औरंगाबाद में वरिष्ठ अधिकारियों के नेतृत्व में मार्च करते रहे. सोमवार को सुरक्षा बलों के सामने ही एक समुदाय के लोगों के दुकान को जैसे आग के हवाले किया गया. उसके बाद राज्य सरकार कोई मौक़ा नहीं ले रही थी. कर्फ्यू नहीं लगाया गया लेकिन सड़कें सन्नाटे में डूबी रहीं.
इस हिंसा के पीछे भाजपा की अंदरूनी राजनीति और ख़ासकर स्थानीय भाजपा सांसद सुशील सिंह की भूमिका संदिग्ध बतायी जा रही हैं. हालांकि सोमवार को जब हिंसा जारी थी तब विपक्ष के नेता तेजस्वी यादव के ये मामला उठाने पर नीतीश कुमार ने ये सफ़ाई दी थी.
सांप्रदायिक तनाव फैलाने का आरोप : मोदी के मंत्री अश्विनी चौबे के बेटे अरिजित की तलाश में जुटी पुलिस
इस बार नीतीश कुमार को हिंसा की उम्मीद थी, लेकिन औरंगाबाद के स्थानीय सांसद के सामने लोगों के दुकान को जैसे आग लगाई गई. वैसे में नीतीश को असल खतरा विरोधियों से ज़्यादा भाजपा जैसे सहयोगी से हैं जो वोट के लिए अब धर्म की आड़ में हिंसा से परहेज़ नहीं करते.
NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं