
समस्तीपुर:
समस्तीपुर जिले के निरपुर गांव के जीवास पंडित दिहाड़ी मजदूरी करते हुए बड़ी मुश्किल से परिवार का गुजर-बसर करते हैं। एनडीटीवी की टीम जब उनसे मिलने उनकी छोटी सी झोपड़ी पहुंची तो वो काफी तनाव में दिखे। उन्होंने एनडीटीवी से कहा, 'यहां गांव के 50 फीसदी लोग गरीब हैं। हर दिन कमाई नहीं हो पाती, मुखिया ने सरकारी योजना का पैसा लूट लिया। मुखिया घूस लेता है।'
जीवस पंडित कहते हैं, गरीबों की किसी को फिक्र नहीं, इसलिए इस बार गरीब एकजुट होकर वोट करेंगे। हम अपने गांव में सभी इकट्ठा होकर किसको वोट देना है ये तय करेंगे, हमारा वोट इस बार बंटेगा नहीं।'
जीवास मंडित के पड़ोसी भोला पासवान कहते हैं, महंगाई ने गरीबों की कमर तोड़ दी है और काम मिलना मुश्किल होता जा रहा है। उन्होंने एनडीटीवी से कहा, 'प्याज 80 रुपये किलो हो गया है, दाल 100 रुपये किलो हो गया है। गरीब आदमी क्या खाएगा।'
पास की शोभा देवी भी नेताओं से काफी नाराज दिखाई दीं। एनडीटीवी ने जब उनसे पूछा कि क्या इस बार उनके जैसे गरीब लोगों की मुश्किलें चुनाव में मुद्दा होंगी इस गांव में तो उन्होंने कहा, 'हम एक वोट के मालिक हैं, चुनाव में जो अच्छा होगा वो तय करेंगे।
निरपुर गांव में आम गरीब वोटरों को लुभाने की कवायद तेज है। इस चुनाव क्षेत्र में साल 2000 के बाद से जेडीयू या आरजेडी के उम्मीदवार जीते हैं। मुस्लिम और यादव वोट यानी एमवाई फैक्टर यहां इस बार भी आम होगा। आरजेडी उम्मीदवार अख्तरुल इस्लाम शाहीन डरे हुए हैं कि कहीं लालू यादव के बीफ वाले बयान का उन्हें खामियाजा ना उठाना पड़े।
जब एनडीटीवी ने उनसे पूछा कि उनके राजनीतिक विरोधी लालू यादव के बीफ वाले बयान को चुनावी मुद्दा बना रहे हैं तो वो घबरा गए। उन्होंने कहा, 'बीजेपी हमेशा से इस तरह विवादित मसले उठाती रही है। मैं इस पर और ज्यादा कुछ नहीं कहना चाहता। हमारे नेताजी ने इस पर सफाई दे दी है।'
पास के मुस्लिम बहुल धर्मपुर बस्ती में मुस्लिम मतदाता चुनावी सरगरमी पर कड़ी नजर रख रहे हैं। वो कहते हैं, लोकसभा चुनाव में मुस्लिम वोट बंट गया था। इस बार ऐसा नहीं होगा। दादरी कांड पर जारी राजनीति की गूंज यहां भी सुनाई देती है।
मोहल्ला निवासी शाहिद कहते हैं, 'सबसे अहम चुनावी मुद्दा आपसी भाईचारा मजबूत करना है, सांप्रदायिक तनाव नहीं होना चाहिए, दादरी मेंजो हुआ वो अच्छा नहीं हुआ।'
उधर बीजेपी इस इलाके में जेडीयू और आरजेडी के बीच के अंतर्विरोध को चुनावी मुद्दा बनाया है। लालू के मुस्लिम-यादव वोट बैंक पर पार्टी सबसे ज्यादा हमला कर रही है। पार्टी की उम्मीदवार रेणु कुशवाहा कहती हैं, 'लालू को ना हिन्दू पर भरोसा है और ना मुस्लिम पर। वो कहते हैं हिन्दू बीफ खाता है। क्या वो मुसलमान के लिए ऐसा कह सकते हैं? यहां के चुनाव में यादव भी अब समझ गए हैं कि लालू सिर्फ बातों के सौदागर हैं, उससे पेट नहीं भरता।'
बीजेपी ने इलाके में पूरी ताकत लगा दी है। रेणु कुशवाहा कहती हैं, 'यहां के लोगों बीजेपी को छोड़ सबकी सरकार बनवाई है। इस बार बीजेपी के विकास के एजेंडे पर उनको अगर समर्थन मिला तो बिहार का भविष्य बदलेगा। अब देखना अहम होगा कि समस्तीपुर सीट के लिए इस कांटे की लड़ाई में आम वोटर इस बार किसका साथ देते हैं।
जीवस पंडित कहते हैं, गरीबों की किसी को फिक्र नहीं, इसलिए इस बार गरीब एकजुट होकर वोट करेंगे। हम अपने गांव में सभी इकट्ठा होकर किसको वोट देना है ये तय करेंगे, हमारा वोट इस बार बंटेगा नहीं।'
जीवास मंडित के पड़ोसी भोला पासवान कहते हैं, महंगाई ने गरीबों की कमर तोड़ दी है और काम मिलना मुश्किल होता जा रहा है। उन्होंने एनडीटीवी से कहा, 'प्याज 80 रुपये किलो हो गया है, दाल 100 रुपये किलो हो गया है। गरीब आदमी क्या खाएगा।'
पास की शोभा देवी भी नेताओं से काफी नाराज दिखाई दीं। एनडीटीवी ने जब उनसे पूछा कि क्या इस बार उनके जैसे गरीब लोगों की मुश्किलें चुनाव में मुद्दा होंगी इस गांव में तो उन्होंने कहा, 'हम एक वोट के मालिक हैं, चुनाव में जो अच्छा होगा वो तय करेंगे।
निरपुर गांव में आम गरीब वोटरों को लुभाने की कवायद तेज है। इस चुनाव क्षेत्र में साल 2000 के बाद से जेडीयू या आरजेडी के उम्मीदवार जीते हैं। मुस्लिम और यादव वोट यानी एमवाई फैक्टर यहां इस बार भी आम होगा। आरजेडी उम्मीदवार अख्तरुल इस्लाम शाहीन डरे हुए हैं कि कहीं लालू यादव के बीफ वाले बयान का उन्हें खामियाजा ना उठाना पड़े।
जब एनडीटीवी ने उनसे पूछा कि उनके राजनीतिक विरोधी लालू यादव के बीफ वाले बयान को चुनावी मुद्दा बना रहे हैं तो वो घबरा गए। उन्होंने कहा, 'बीजेपी हमेशा से इस तरह विवादित मसले उठाती रही है। मैं इस पर और ज्यादा कुछ नहीं कहना चाहता। हमारे नेताजी ने इस पर सफाई दे दी है।'
पास के मुस्लिम बहुल धर्मपुर बस्ती में मुस्लिम मतदाता चुनावी सरगरमी पर कड़ी नजर रख रहे हैं। वो कहते हैं, लोकसभा चुनाव में मुस्लिम वोट बंट गया था। इस बार ऐसा नहीं होगा। दादरी कांड पर जारी राजनीति की गूंज यहां भी सुनाई देती है।
मोहल्ला निवासी शाहिद कहते हैं, 'सबसे अहम चुनावी मुद्दा आपसी भाईचारा मजबूत करना है, सांप्रदायिक तनाव नहीं होना चाहिए, दादरी मेंजो हुआ वो अच्छा नहीं हुआ।'
उधर बीजेपी इस इलाके में जेडीयू और आरजेडी के बीच के अंतर्विरोध को चुनावी मुद्दा बनाया है। लालू के मुस्लिम-यादव वोट बैंक पर पार्टी सबसे ज्यादा हमला कर रही है। पार्टी की उम्मीदवार रेणु कुशवाहा कहती हैं, 'लालू को ना हिन्दू पर भरोसा है और ना मुस्लिम पर। वो कहते हैं हिन्दू बीफ खाता है। क्या वो मुसलमान के लिए ऐसा कह सकते हैं? यहां के चुनाव में यादव भी अब समझ गए हैं कि लालू सिर्फ बातों के सौदागर हैं, उससे पेट नहीं भरता।'
बीजेपी ने इलाके में पूरी ताकत लगा दी है। रेणु कुशवाहा कहती हैं, 'यहां के लोगों बीजेपी को छोड़ सबकी सरकार बनवाई है। इस बार बीजेपी के विकास के एजेंडे पर उनको अगर समर्थन मिला तो बिहार का भविष्य बदलेगा। अब देखना अहम होगा कि समस्तीपुर सीट के लिए इस कांटे की लड़ाई में आम वोटर इस बार किसका साथ देते हैं।
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