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This Article is From Jul 07, 2020

दूसरे अस्पताल में शिफ्ट करते वक्त हुई कोरोना मरीज की मौत तो सड़क किनारे शव छोड़कर भागा एंबुलेंस ड्राइवर

मौत से पहले मरीज को दूसरे अस्पताल में शिफ्ट करने के लिए ले जाया जा रहा था. लेकिन मौत हो जाने के बाद एंबुलेंस का ड्राइवर शव को वहीं जमीन पर छोड़कर भाग खड़ा हुआ.

दूसरे अस्पताल में शिफ्ट करते वक्त हुई कोरोना मरीज की मौत तो सड़क किनारे शव छोड़कर भागा एंबुलेंस ड्राइवर
भोपाल में एक अस्पताल के बाहर हुई घटना.
  • भोपाल के एक अस्पताल के बाहर हुई घटना
  • मरीज को दूसरे अस्पताल में करना था शिफ्ट
  • मौत हो जाने पर शव छोड़कर भागा एंबुलेंस ड्राइवर
भोपाल:

मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है. यहां पर कोरोनावायरस से जान गंवाने वाले शख्स का शव एक अस्पताल के बाहर सड़क किनारे छोड़ देने का मामला सामने आया है. सोमवार को यहां एक हॉस्पिटल के बाहर एक मरीज की मौत हो गई थी. मौत से पहले मरीज को दूसरे अस्पताल में शिफ्ट करने के लिए ले जाया जा रहा था. लेकिन मौत हो जाने के बाद एंबुलेंस का ड्राइवर शव को वहीं जमीन पर छोड़कर भाग खड़ा हुआ.

बता दें कि 59 साल के वाजिद अली को किडनी में समस्या के चलते भोपाल के पीपुल्स अस्पताल में भर्ती कराया गया था. लेकिन पिछले कुछ दिनों में उन्हें सांस संबंधी परेशानियां आने लगीं. डॉक्टरों को आशंका हुई कि उन्हें न्यूमोनिया हो गया है. सोमवार की शाम उनके कोरोनावायरस से संक्रमित होने की पुष्टि हो गई. कोरोना सामने आने के बाद उन्हें कोविड-19 के लिए निर्धारित किए गए चिरायु अस्पताल में शिफ्ट किया गया था.  आरोप है कि उनकी मौत होने के बाद एंबुलेंस ड्राइवर, जिसे उन्हें दूसरे अस्पताल में शिफ्ट कराने ले जाना था, वो शव को वहीं सड़क किनारे जमीन पर छोड़कर भाग गया. 

उनके बेटे आबिद अली ने NDTV से बातचीत में बताया कि उनके पिता का सैंपल रविवार को कलेक्ट किया गया था, जो सोमवार को पॉजिटिव निकला. उनकी तबियत जनवरी से ही खराब थी. पीपुल्स अस्पताल में उनको 23 जून को भर्ती कराया गया था. जब उन्हें इस अस्पताल से शिफ्ट किया गया था वो अभी जिंदा थे. आबिद ने कहा, 'मुझे नहीं पता कि एंबुलेंस में क्या हुआ लेकिन जब जिला प्रशासन को उन्हें चिरायु में शिफ्ट करना था और एंबुलेंस भी भेजा, तो उन्हें सड़क पर ऐसे छोड़ क्यों दिया? इसमें दोनों अस्पतालों की गलती है, उन्होंने हमें कोई जानकारी नहीं दी.'

इस घटना का एक वीडियो सामने आया है, जिसमें पीपीई किट पहने हुए कुछ स्वास्थ्य कर्मचारी शव को उठाकर स्ट्रेचर पर रख रहे हैं. 

घटना की सीसीटीवी फुटेज भी सामने आई है, जिसमें देखा जा सकता है कि एंबुलेंस में मरीज को अस्पताल लेकर आए हुए स्वास्थ्यकर्मी शव को गाड़ी से उतारकर अस्पताल के सामने छोड़कर जा रहे हैं.

दोनों अस्पतालों के तरफ से आई है सफाई

पीपुल्स हॉस्पिटल के मैनेजर उदय शंकर दीक्षित ने बताया कि 'प्रोटोकॉल और IDSP के निर्देशों के अनुसार, चिरायु अस्पताल से एक एंबुलेंस चिरायु अस्पताल पहुंची. लेकिन लगभग एक घंटे 40 मिनट के बाद हमें बताया गया कि वो उन्हें वापस भेज रहे हैं. तबतक हम ICU सील करके फ्यूमिगेशन की प्रक्रिया शुरू कर दी थी. अभी यह प्रक्रिया चालू ही थी, तभी एंबुलेंस फिर वापस आई. उन्होंने पहले हमारा स्ट्रेचर लेने की कोशिश की लेकिन हमारे विरोध करने पर शव को वहीं सड़क के किनारे छोड़कर चले गए. जिसके बाद हमने अपने स्टाफ को पीपीई किट पहनकर मरीज की जांच करने की कोशिश की, लेकिन तबतक उनकी मौत हो चुकी थी.'

चिरायु अस्पताल के निदेशक अजय गोयनका ने कहा कि 'पीपुल्स अस्पताल के डॉक्टरों ने उनके अस्पताल में फोन किया और एम्बुलेंस की मांग की. उन्होंने हमें बताया कि मरीज़ की दोनों किडनी खराब है, उसका डायलिसिस चल रहा है और उसके हार्ट में भी दिक्कत है लेकिन उसकी हालत 'स्थिर है'. इसलिए हमने ऑक्सीजन वाली एम्बुलेंस भेजने का फैसला किया. ड्राइवर ने मरीज को लिया लेकिन जैसे ही वो वीआईपी रोड के पास पहुंचा तो उसे लगा कि उसकी हालत बिगड़ रही है और वह गंभीर है, ऐसे में ट्रैफिक के कारण चिरायु अस्पताल तक पहुंचने में लगभग 45 मिनट लगेंगे, इसलिए पीपुल्स अस्पताल में डॉक्टरों से बात करने के बाद, वो बीच रास्ते में ही लौटकर वापस पीपुल्स अस्पताल पहुंचा.'

'पीपुल्स अस्पताल ने उन्हें सीपीआर और दूसरे इलाज से बचाने की कोशिश की, इस बीच हमारी वेंटिलेटर से लैस एम्बुलेंस 20-25 मिनट में वहां पहुंच गई, लेकिन तबतक उनकी मौत हो गई. हम वहां से उन्हें अपने अस्पताल के शवगृह में ले गए. किसी की कोई चूक नहीं थी मुझे नहीं पता कि पीपुल्स अस्पताल अब हंगामा क्यों खड़ा कर रहा है.'

भोपाल के कलेक्टर अविनाश लवानिया ने पीपल्स अस्पताल से स्पष्टीकरण मांगा है. उन्होंने NDTV से बातचीत में कहा, 'हमने अस्पताल से पूछा है कि आप मरीज़ को स्थिर किए बिना किसी दूसरे अस्पताल में कैसे रेफर कर सकते हैं? इसके अलावा, उन्हें 23 तारीख से वहां भर्ती कराया गया था, ऐसे में वो कोरोना संक्रमित नहीं हों इसे सुनिश्चित करने के लिए किस प्रोटोकॉल का पालन किया? कोई कैसे एक अस्पताल में हफ्ते भर से ज्यादा भर्ती रहने के बावजूद अचानक कोरोना पॉजिटिव हो गया. उनके लक्षण दिखाते थे कि क्या उनकी स्थिति इतनी खराब हो गई है. हमने स्पष्टीकरण मांगा है.'

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