ईज-ऑफ-बिजनेस के संबंध में जारी नई राष्ट्रीय रैकिंग में कर्नाटक को 13वां स्थान मिला है.
- भारत में स्टार्ट-अप इंडिया को बढ़ावा देने के मामले में अभी भी बेंगलुरु आगे
- कई मोर्चों पर शहर का आकर्षण कमजोर हो गया है
- ईज-ऑफ-बिजनेस के संबंध में जारी नई सूची कर्नाटक को 13वां स्थान
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बेंगलुरु:
कुछ साल पहले तक, "बीइंग बैंगलोर्ड" शब्द का इस्तेमाल कारोबार में नुकसान या नौकरी खोने के संदर्भ में किया जाता था. इलेक्ट्रॉनिक सिटी के होसुर रोड पर चमक-दमक वाले इंफोसिस कैंपस और अन्य हाईटेक फर्म से लेकर सरजापुर रोड के विप्रो कैंपस तक तथा कई बहु-राष्ट्रीय कंपनियों ने बेंगलुरु को परिचालन के लिए चुना.
हालांकि, भारत में स्टार्ट-अप इंडिया को बढ़ावा देने के मामले में अभी भी बेंगलुरु आगे है, लेकिन कई मोर्चों पर इसका आकर्षण कमजोर हो गया है. ईज-ऑफ-बिजनेस के संबंध में जारी नई राष्ट्रीय रैकिंग में कर्नाटक को 13वां स्थान मिला है. तेलंगाना और आंध्रप्रदेश ने इस मामले में बाजी मारी है. आईटी हब हैदराबाद दोनों राज्यों की संयुक्त राजधानी है.
कर्नाटक के उद्योग मंत्री आरवी देशपांडे ने रैंकिंग में पिछड़ने के तथ्य को स्वीकार किया लेकिन अन्य मामलों में बेंगलुरु के आगे रहने पर खुशी जताई. उद्योग मंत्री ने एनडीटीवी को बताया, "यह सही है कि हम 13वें स्थान पर रहे हैं लेकिन यह भी एक तथ्य है कि हम निवेश के मामले में पहले स्थान पर हैं. कर्नाटक को 1 लाख करोड़ से अधिक का निवेश प्राप्त हुआ है. तेलंगाना से लेकर आंध्रप्रदेश और गुजरात जैसे कई राज्य बहुत पीछे हैं." पिछले साल, कारोबारी सुगमता की सूची में कर्नाटक को 9वां स्थान मिला था.
वहीं, कर्नाटक की कांग्रेस सरकार ने विश्व बैंक के परामर्श पर उद्योग मंत्रालय द्वारा तैयार की गई रैंकिंग के मापदंडों पर सवाल खड़े किए. देशपांडे ने कॉर्पोरेट वृद्धि के लिए भ्रष्टाचार को प्रमुख बाधा करार देते हुए कहा, "औद्योगिक विकास, इंफ्रास्ट्रक्चर की तुलना में अधिक तेज था, जिसकी गति को बरकरार नहीं रखा जा सका." देशपांडे ने कहा, "भ्रष्टाचार कैंसर की तरह है लेकिन कर्नाटक कई राज्यों से बेहतर है."
स्टार्ट-अप में निवेश करने वाली महिला उद्यमी डॉ. सोम सिंह ने कहा कि जो लोग बेंगलुरु के पिछड़ने की वजह को समझना चाहते हैं, उन्हें शहर के अनियंत्रित ट्रैफिक पर एक नजर डाल लेना चाहिए. डॉ. सिंह ने बदहाल ट्रैफिक की स्थिति पर तंज कसते हुए कहा, "पहले लोग घर से काम करना चाहते थे. अब ट्रैफिक में काम कर रहे हैं. बेंगलुरु शहर के दो हिस्सों कोरामंडल से हेबल जाने में उतना ही समय लगता है जितना कि बेंगलुरु से कोलकाता और कोलकाता से बेंगलुरु वापस आने में."
उद्यमियों की चिंताओं से जुड़ा एक और अन्य बिंदु भी है, उनका कहना है, "कर्नाटक में छोटे-मोटे व्यवसाय स्थापित करने में सरकार की दखलअंदाजी बहुत ज्यादा है."
हालांकि, भारत में स्टार्ट-अप इंडिया को बढ़ावा देने के मामले में अभी भी बेंगलुरु आगे है, लेकिन कई मोर्चों पर इसका आकर्षण कमजोर हो गया है. ईज-ऑफ-बिजनेस के संबंध में जारी नई राष्ट्रीय रैकिंग में कर्नाटक को 13वां स्थान मिला है. तेलंगाना और आंध्रप्रदेश ने इस मामले में बाजी मारी है. आईटी हब हैदराबाद दोनों राज्यों की संयुक्त राजधानी है.
कर्नाटक के उद्योग मंत्री आरवी देशपांडे ने रैंकिंग में पिछड़ने के तथ्य को स्वीकार किया लेकिन अन्य मामलों में बेंगलुरु के आगे रहने पर खुशी जताई. उद्योग मंत्री ने एनडीटीवी को बताया, "यह सही है कि हम 13वें स्थान पर रहे हैं लेकिन यह भी एक तथ्य है कि हम निवेश के मामले में पहले स्थान पर हैं. कर्नाटक को 1 लाख करोड़ से अधिक का निवेश प्राप्त हुआ है. तेलंगाना से लेकर आंध्रप्रदेश और गुजरात जैसे कई राज्य बहुत पीछे हैं." पिछले साल, कारोबारी सुगमता की सूची में कर्नाटक को 9वां स्थान मिला था.
वहीं, कर्नाटक की कांग्रेस सरकार ने विश्व बैंक के परामर्श पर उद्योग मंत्रालय द्वारा तैयार की गई रैंकिंग के मापदंडों पर सवाल खड़े किए. देशपांडे ने कॉर्पोरेट वृद्धि के लिए भ्रष्टाचार को प्रमुख बाधा करार देते हुए कहा, "औद्योगिक विकास, इंफ्रास्ट्रक्चर की तुलना में अधिक तेज था, जिसकी गति को बरकरार नहीं रखा जा सका." देशपांडे ने कहा, "भ्रष्टाचार कैंसर की तरह है लेकिन कर्नाटक कई राज्यों से बेहतर है."
स्टार्ट-अप में निवेश करने वाली महिला उद्यमी डॉ. सोम सिंह ने कहा कि जो लोग बेंगलुरु के पिछड़ने की वजह को समझना चाहते हैं, उन्हें शहर के अनियंत्रित ट्रैफिक पर एक नजर डाल लेना चाहिए. डॉ. सिंह ने बदहाल ट्रैफिक की स्थिति पर तंज कसते हुए कहा, "पहले लोग घर से काम करना चाहते थे. अब ट्रैफिक में काम कर रहे हैं. बेंगलुरु शहर के दो हिस्सों कोरामंडल से हेबल जाने में उतना ही समय लगता है जितना कि बेंगलुरु से कोलकाता और कोलकाता से बेंगलुरु वापस आने में."
उद्यमियों की चिंताओं से जुड़ा एक और अन्य बिंदु भी है, उनका कहना है, "कर्नाटक में छोटे-मोटे व्यवसाय स्थापित करने में सरकार की दखलअंदाजी बहुत ज्यादा है."
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