Renault India ने अपनी ऑल-न्यू डस्टर (Duster) का एक्सपोर्ट शुरू कर दिया है. चेन्नई पोर्ट से 750 SUVs की पहली खेप को साउथ अफ्रीका के लिए रवाना किया गया है. यह सिर्फ एक शुरुआत है, क्योंकि आने वाले समय में भारत में बनी यह शानदार कार दुनिया के कई अन्य देशों की सड़कों पर भी दौड़ती नजर आएगी. आइए जानते हैं कि क्यों यह कार इतनी खास है.
इस बड़ी कामयाबी पर रेनॉल्ट ग्रुप इंडिया के सीईओ स्टीफन देब्लाइस ने कहा कि नई डस्टर का एक्सपोर्ट शुरू होना हमारे लिए एक ऐतिहासिक पल है. यह चेन्नई प्लांट की बेहतरीन क्वालिटी और क्षमता को साबित करता है. भारत में वो सारी खूबियां मौजूद हैं जो इसे दुनिया का सबसे बड़ा ऑटोमोबाइल एक्सपोर्ट हब बना सकती हैं. यहां बेहतरीन इंजीनियर, वर्ल्ड क्लास मैन्युफैक्चरिंग और शानदार लॉजिस्टिक्स सिस्टम मौजूद है.
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2030 तक ₹18,000 करोड़ का बड़ा टारगेट
रेनॉल्ट कंपनी भारत की मैन्युफैक्चरिंग पावर को लेकर बहुत गंभीर है. कंपनी ने एक बहुत बड़ा लक्ष्य तय किया है. रेनॉल्ट का उद्देश्य साल 2030 तक भारत से हर साल 2 बिलियन यूरो (यानी करीब 18,000 करोड़ रुपये) का सालाना एक्सपोर्ट हासिल करना है. इस पूरे मिशन में नई डस्टर सबसे अहम भूमिका निभाने वाली है.
आपको बता दें कि यह नई डस्टर भारत में रेनॉल्ट की पहली ऐसी गाड़ी है जिसे 'रेनॉल्ट ग्रुप मॉड्यूलर प्लेटफॉर्म' (RGMP) पर तैयार किया गया है. यह एक बेहद मॉडर्न और लचीला आर्किटेक्चर है, जिसका मतलब है कि इस प्लेटफॉर्म पर अलग-अलग तरह की इंजन टेक्नोलॉजी और फ्यूल ऑप्शन वाली कारें आसानी से बनाई जा सकती हैं.
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सुरक्षा में नंबर-1: मिली 5-स्टार रेटिंग
ग्लोबल मार्केट में इस कार की मांग होने की एक सबसे बड़ी वजह इसकी मजबूती भी है. नई भारत निर्मित डस्टर ने 'भारत NCAP' (Bharat NCAP) क्रैश टेस्ट में शानदार प्रदर्शन करते हुए सभी वेरिएंट्स के लिए 5-स्टार सेफ्टी रेटिंग हासिल की है. चाहे इंजन कोई भी हो, सुरक्षा के मामले में इस कार से कोई समझौता नहीं किया गया है. यही वजह है कि यह कार भारतीय ग्राहकों के साथ-साथ विदेशी ग्राहकों की सुरक्षा पर भी पूरी तरह खरी उतरती है.
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