NDTV Fuel & Future Summit 2026: इंडियन शुगर एंड बायो-एनर्जी मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन (ISMA) के डायरेक्टर जनरल दीपक बल्लानी ने इथेनॉल प्रोडक्शन से जुड़ी एक आम गलतफहमी के बारे में बात की. उन्होंने उस दावे को गलत बताया है, जिसमें कहा जाता है कि एक लीटर इथेनॉल बनाने में 10 हजार लीटर पानी लगता है.
NDTV फ्यूल एंड फ्यूचर समिट 2026 में एक पैनल चर्चा के दौरान बल्लानी ने कहा कि एक बार जब गन्ना इथेनॉल बनाने वाली यूनिट में पहुंच जाता है, तो एक लीटर इथेनॉल बनाने के लिए सिर्फ 3 से 5 लीटर पानी की जरूरत होती है.
उन्होंने कहा, 'मैं एक बात पर बात करना चाहता हूं क्योंकि यह मीडिया, खासकर सोशल मीडिया पर भी चर्चा का विषय है और वह है पूरी प्रक्रिया और पानी का इतना ज्यादा इस्तेमाल.'
बल्लानी ने आगे कहा, 'उदाहरण के लिए, अगर पानी के इस्तेमाल की बात करें, तो जब गन्ना फैक्ट्री या डिस्टिलेशन प्लांट में पहुंचता है, तो एक लीटर इथेनॉल बनाने में सिर्फ 3 से 5 लीटर पानी ही इस्तेमाल होता है. 10,000 लीटर वाली बात कहां से आई, मुझे नहीं पता.'
उन्होंने ये बातें इथेनॉल और बायोफ्यूल पर हो रही एक बड़ी चर्चा के दौरान कहीं, जिसमें पैनल के सदस्यों ने पूरे देश में फ्लेक्स-फ्यूल के इस्तेमाल को बढ़ाने की सस्टेनेबिलिटी पर बातचीत की.
यह चर्चा भारत के एनर्जी ट्रांजिशन (ऊर्जा बदलाव) में इथेनॉल और बायोफ्यूल की भूमिका पर हो रही व्यापक बातचीत का हिस्सा थी. इस पैनल में ग्लोबल बायोफ्यूल्स अलायंस के डायरेक्टर जोशुआ वाइक्लिफ, मोटरस्क्राइब्स के फाउंडर और एडिटर विक्रम गौर, और इंडियन शुगर एंड बायो-एनर्जी मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन (ISMA) के डायरेक्टर जनरल दीपक बल्लानी शामिल थे.
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