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केयूर पाठक

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    बशीर बद्र: कल चांद उन्हें साथ ले गया

    मशहूर शायर बशीर बद्र का गुरुवार को भोपाल में 91 साल की आयु में निधन हो गया. उर्दू के इन नामचीन शायर और शिक्षक को याद कर रहे हैं समीर शेखर और केयूर पाठक.

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    भारत के छात्रों में बढ़ रही है आत्महत्या की प्रवृत्ति, क्या केवल 'लेबर फोर्स' तैयार कर रहे हैं स्कूल-कॉलेज

    भारत के शिक्षण संस्थाओं में छात्र-छात्राओं की हत्या के कारणों और युवाओं के लक्ष्य की पड़ताल कर रहे हैं डॉक्टर केयूर पाठक.

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    'गांधी बड़ा आदमी था, क्योंकि वह छोटा आदमी था'

    महात्मा गांधी के रामराज में विकास का पैमाना क्या था और वो कैसा शासन चाहते थे, बता रहे हैं सुजीत कुमार मिश्र और केयूर पाठक.

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    छठ और चुनाव, बिहार में एक साथ दो उत्सव

    बिहार-यूपी के गांवों से निकलकर आज अपनी वैश्विक पहचान बना चुके छठ पर्व की भावना और बिहार विधानसभा चुनाव पर रंधीर कुमार गौतम और केयूर पाठक की टिप्पणी.

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    'विश्वसनीयता का मानक' है महाभारत के कर्ण का चरित्र

    टीवी सीरियल महाभारत में कर्ण का रोल करने वाले पंकज धीर का 15 अक्तूबर को निधन हो गया. उन्होंने कर्ण का किरदार ऐसे निभाया कि वह अंतिम समय तक उनसे चिपका रहा. कर्ण की चारित्रिक विशेषताओं पर प्रकाश डाल रहे हैं डॉक्टर केयूर पाठक और अरुण कुमार गोंड.

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    आजकल समझदारी न समझे जाने में है!

    इस उत्तर आधुनिक दौर में कला, कलाकार और रचना की समझ पर प्रकाश डाल रहे हैं डॉक्टर केयूर पाठक.

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    शिक्षक होना मनुष्य होना है, इसलिए यह आसान नहीं

    किसी शिक्षक को देवता के रूप में क्यों नहीं देखना चाहिए और मनुष्यता और शिक्षक के बीच के संबंध को बता रहे हैं केयूर पाठक.

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    केवल 'दीवाना' ही नहीं मानसिक रूप से बीमार भी बना रहा है रील

    पढ़िए सोशल मीडिया साइट पर अक्सर देखे जाने वाले रील का हमारे मानसिक स्वास्थ्य पर क्या असर पड़ता है और वो हमारी भावनाओं को किस तरह से प्रभावित करते हैं.

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    प्रोफेसर नंदू राम: दलितों के जीवन को सामाजिक विज्ञान का विषय बनाने वाला प्रोफेसर

    भारत में दलित को समाजशास्त्रीय अध्ययन का विषय बनाने वाले जेएनयू के प्रोफेसर नंदू राम का पिछले दिनों निधन हो गया. उनके योगदान को याद कर रहे हैं डॉक्टर धीरज कुमार और डॉक्टर केयूर पाठक.

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    सोशल मीडिया: लाइक, कमेंट, फॉलोवर और वायरल वीडियो की लत लोगों को बीमार बना रही है

    सोशल मीडिया का अत्यधिक इस्तेमाल आज लोगों में किस तरह के मानसिक विकार पैदा कर रहा है, बता रहे हैं इलाहाबाद विश्वविद्यालय के केयूर पाठक और अरुण कुमार गोंड.

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    ब्लॉग: संस्कृत एक प्राचीन सेतु है

    निश्चय ही संस्कृत दक्षिण और उत्तर के भाषाई खाई के बीच एक पुल की तरह काम कर सकती है. सबसे पुराने लिखित साहित्य के साथ यह भारत को जितने मजबूती से संयुक्त कर सकती है, वह सामर्थ्य अन्य भाषाओं जैसे हिंदी और अंग्रेजी में तो नहीं ही है.

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    सलमान रुश्दी और ‘नाइफ’: समय से आगे का सपना

    प्रख्यात लेखक सलमान रुश्दी के पर हुई जानलेवा हमले के बाद उससे उबरने के बाद का रचनात्मक परिणाम है उनकी पुस्तक ‘नाइफ’- जो मूलतः मजहबी मतान्धता और बोलने की स्वतंत्रता के सन्दर्भ में लिखी गई है.

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    बिहार यात्रा डायरी: बीते कल की गूंज और आज की सच्चाई, इतिहास और संस्कृति की एक खोज

    ऐतिहासिक अवशेष महज खंडहर नहीं होते. ये हमारे वर्तमान की बुनियाद हैं. दुर्भाग्य से इतिहास शेष बचे अवशेष को हम इतिहास में ही धंसते हुए देखते हैं.

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    पुष्पा-2: ‘आदमी चाहे तो पूरी दुनिया की तस्वीर बदल सकता है’

    आदमी सोच सकता है इसलिए उसका अस्तित्व है. जो जितना बड़ा सोच सकता है उसका उतना बड़ा अस्तित्व है. भौतिक अस्तित्व हमेशा चेतना या विचार के अस्तित्व के सामने छोटी सिद्ध होती दिखाई पड़ती है.

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    निर्वस्त्रता को अपना अस्त्र घोषित करतीं ईरानी महिलाएं

    क्या हिंदुस्तान में किसी महिला के नाखून काटने पर या बाल काटने पर यहां के समाज और सत्ता को डर लग सकता है? निश्चय ही यह सवाल ही मजाकिया लगता है! यहां ऐसी घटनाएं खबरों में आकर गायब हो जाएंगी, लोग इन बातों को हंसी-मजाक में उड़ा देंगे. नाख़ून काटने और बाल काटने में कोई अंतर नहीं. दोनों ही शरीर के अतिरिक्त हिस्से हैं जिसकी कटाई छंटाई अपने मनमुताबिक की जाती है. लेकिन यह मजाकिया लगने वाली बातें भी बड़े विद्रोह का माध्यम बन सकती है. अगर महिलाएं बाल काटकर प्रतिरोध कर रही हैं तो इससे समझा जा सकता है कि मजहबी कानूनों से संचालित देशों में इक्कीसवीं सदी में महिलाओं की हैसियत क्या है! दासता जितनी मजबूत होती है, प्रतिरोध के तरीके उतने छोटे और मजाकिया लगते हैं. ईरान की महिलाओं का विद्रोह उसकी दासता की चरम स्थिति को बताता है, इसलिए वहां महिलाओं के विरोध के तरीके भी ऐसे ही हैं.