Human Eye Responds To Light After Death: सोचिए क्या हो अगर कोई इंसान दुनिया छोड़ चुका हो, लेकिन बावजूद इसके उसकी आंखें रोशनी पर रिएक्ट कर रही हों तो? सुनने में ये किसी किसी सस्पेंस फिल्म की कहानी जैसा लगता है, पर वैज्ञानिकों ने ये सच कर दिखाया है. हाल ही में वैज्ञानिकों ने एक ऐसी तकनीक विकसित की है, जिससे मौत के 10 घंटे बाद भी इंसानी रेटिना को एक्टिव रखा जा सकता है.
मरने के बाद आंखों में कैसे लौटी जान? (How Eye Cells Reacted After Death)
वैज्ञानिकों ने एक ऐसा चौंकाने वाला दावा किया है, जिसने मेडिकल साइंस की दुनिया में हलचल मचा दी है. दरअसल, सेंटर फॉर जीनोमिक रेगुलेशन (CRG) के वैज्ञानिकों ने एक नई रिसर्च में पाया कि, सान की मौत के 10 घंटे बाद तक भी उसकी आंखें रोशनी के प्रति प्रतिक्रिया दे सकती हैं. वैज्ञानिकों के मुताबिक, आंखों के पिछले हिस्से में रेटिना (Retina) नाम की एक परत होती है, जिसका काम रोशनी को सिग्नलों में बदलकर दिमाग तक पहुंचाना है, जिससे हम देख पाते हैं.

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मेडिकल साइंस के लिए ऐतिहासिक कदम (A Historic Step for Medical Science)
यूं तो मौत होते ही शरीर में ब्लड सर्कुलेशन रुक जाता है, जिससे रेटिना को ऑक्सीजन मिलना बंद हो जाती है और वो तुरंत काम करना बंद कर देती है, लेकिन सेंटर फॉर जीनोमिक रेगुलेशन (CRG) के वैज्ञानिकों ने लैब में एक ऐसा सिस्टम तैयार किया, जो एक दम शरीर के ब्लड सर्कुलेशन की तरह काम करता है. इस सिस्टम के जरिए उन्होंने डोनेट की गई आंखों के रेटिना तक ऑक्सीजन पहुंचाई, जिसका नतीजा ये हुआ कि मौत के 10 घंटे बाद भी रेटिना ने रोशनी की चमक पर रिस्पॉन्स देना शुरू कर दिया.
Human retinas responding to light even 10 hours after death is a remarkable scientific milestone. Beyond challenging what we know about retinal viability, it could open new possibilities for vision research, drug testing and eventually whole-eye transplantation.…
— Kiran Mazumdar-Shaw (@kiranshaw) July 13, 2026
वैज्ञानिकों की मानें तो इस खोज का मतलब ये नहीं है कि, इंसान मरने के बाद दोबारा देखने लगेगा या फिर उसकी आंखों की रोशनी वापस आ जाएगी. ये खोज उन लोगों के लिए किसी 'वरदान' से कम नहीं है, जो आंखों से जुड़ी किसी भी गंभीर बीमारियों से जूझ रहे हों. पहले आंखों की दवाओं का टेस्ट जानवरों पर किया जाता था, लेकिन अब सीधे इंसानी रेटिना पर नई दवाओं और इलाजों का असर देखा जा सकेगा. इससे वैज्ञानिकों को बढ़ती उम्र में धुंधला दिखने और डायबिटीज के कारण आंखें खराब होने जैसी बीमारियों का तोड़ निकाल पाने में मदद मिलेगी.
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