Ganesh Chaturthi: देशभर में गणेश चतुर्थी का उत्सव बड़े ही उत्साह और भक्ति के साथ मनाया जाने वाला एक महत्वपूर्ण हिंदू त्योहार है, जिसमें पारंपरिक रूप से मिट्टी की मूर्तियों की स्थापना की जाती है, जिन्हें बाद में पानी में विसर्जित कर दिया जाता है. हालांकि, हाल के दिनों में इन विसर्जन अनुष्ठानों के परिणामस्वरूप होने वाले प्रदूषण के बारे में बढ़ती पर्यावरणीय चिंताओं ने लोगों को पर्यावरण के प्रति जागरूक विकल्प तलाशने के लिए प्रेरित किया है. यूं तो अब तक आपने मिट्टी, कागज और अन्य सामग्री की मदद से बनीं प्रतिमाएं देखी होंगी, लेकिन अब लोग खाने की चीजों की मदद से भी बप्पा (Lord Ganesha Idol) का मनमोहक स्वरूप तैयार कर रहे हैं. हाल ही में सोशल मीडिया पर एक ऐसा ही वीडियो छाया हुआ है, जिसमें चॉकलेट और विभिन्न प्रकार के मोटे अनाज से तैयार भगवान गौरी गणेश की प्रतिमा देखने को मिल रही है.
यहां देखें वीडियो
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दरअसल, हाल ही में मुंबई (Mumbai) की सांताक्रूज़ निवासी रिंटू राठौड़ ने इस बार चॉकलेट के साथ-साथ नौ प्रकार के मोटे अनाज और अन्य सामग्री से भगवान श्री गणेश (lord ganesha) की दो फीट की सुंदर प्रतिमा बनाई है, जिसे लोग खूब पसंद कर रहे हैं. बताया जा रहा है कि, बप्पा की यह मूर्ति वृश्चिकासन (Vrischikasana) मुद्रा में है. डिजाइनर राठौड़ ने कहा, 'इस मुद्रा का उल्लेख हमारे पुराणों में मिलता है. मैंने हाल ही में प्राकृतिक चिकित्सा में एक पाठ्यक्रम पूरा किया है, इसलिए मैंने इन दोनों विचारों को मिला दिया है और इस मुद्रा में मूर्ति बनाई है.'
बताया जा रहा है कि, मूर्ति को पाउडर और नौ प्रकार के मोटे अनाज की मदद से तैयार किया गया है, जिसमें सूखे अंजीर, काजू, बादाम, केसर, इलायची, गुड़ और खाने वाले गोंद के पेस्ट शामिल है. बता दें कि, 40 किलोग्राम वजनी इस प्रतिमा को बनाने में करीबन 20 घंटे का समय लगा है. तैयार प्रतिमा को पिघलने से बचाने के लिए उसे एयर कंडीशनर रूम में रखा गया है. बताया जा रहा है कि, रिंटू राठौड़ पिछले 12 वर्षों से चॉकलेट की प्रतिमाएं बना रही हैं. इससे पहले वह खीर जैसी सामग्री का भी इस्तेमाल प्रतिमा बनाने में कर चुकी हैं. उन्होंने आगे बताया कि, '11वें दिन प्रतिमा का दूध में विसर्जन किया जाता है और चॉकलेट युक्त यह दूध परिवार, दोस्तों और बच्चों को वितरित कर दिया जाता है. इस तरह हम सभी रीति-रिवाजों का पालन भी करते हैं और पर्यावरण को नुकसान नहीं पहुंचाते.'
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