Viral Video: लंदन में 9 टू 5 वाली नौकरी छोड़कर दुनिया घूमने निकलीं दो विदेशी महिलाओं (Clare & Aurita) का एक वीडियो इस वक्त सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है. इसमें वे इंडिया गेट (India Gate) पर घूमती हुई नजर आ रही हैं और पूछ रही हैं, 'भारत में लोग एक-दूसरे का हाथ पकड़कर क्यों चलते हैं? क्या यह दोस्ती की निशानी है या इसका संबंध किया परंपरा से है? अगर किसी को पता है तो बताएं क्योंकि हमने ऐसा पहली बार देखा है और हम सच में जवाब जानना चाहते हैं.'
9 सेकंड का वीडियो पर छिड़ी बहस
इंस्टाग्राम (nomadiclovers_) पर शेयर किए गए मात्र 9 सेकंड के इस वीडियो ने सोशल मीडिया पर बहस छेड़ दी है. अब तक करीब 2 लाख लोग इस वीडियो को देख चुके हैं और सैकड़ों लोगों ने कमेंट करके अपनी-अपनी राय दी है. ज्यादातर लोगों ने भारतीय के हाथ पकड़कर चलने की बात को दोस्ती और सेफ्टी से जोड़ा है, जबकि कुछ लोगों ने वेस्ट के नजरिए से इंडियन्स को देखने की आदत पर सवाल उठाए हैं. हालांकि दोनों विदेशी पर्यटकों ने इसे कबूल करते हुए बड़ी ही सहजता से जवाब दिया है.
यहां देखें पूरा वीडियो:-
सोशल मीडिया पर लोगों ने दिए ये रिएक्शन्स
एक शख्स ने लिखा, 'क्या यह अजीब नहीं है कि पश्चिम ने हर चीज को इतना ओवरसेयुएलाइज्ड तरीके से देखा है कि अब हाथ पकड़ना भी अजीब लगता है?' इसका जवाब देते हुए महिला पर्यटकों ने कहा, 'सच कहूं तो, आपने जो कहा वह मुझे बहुत पसंद आया. हमें यह अजीब नहीं लगा. यह बस एक सच्ची जिज्ञासा थी. हम दोनों का भी यही मानना है कि पश्चिमी देशों में लोग ऐसी चीजों को अलग नजरिए से देखते हैं और उन्हें बुरा समझते हैं. काश पश्चिमी देशों में लोग एक-दूसरे का इतना ही साथ देते और अपने दोस्तों के लिए सच्चा प्यार दिखाने से डरते नहीं.'
दूसरे शख्स ने कहा, 'भारत में हाथ पकड़कर चलना आम बात है, लेकिन पुरुष दोस्तों के लिए नहीं.' विदेशी महिलाओं ने इसका कारण पूछा तो उसने बताया, 'भारतीय समाज में, अगर दो पुरुष हाथ पकड़कर कहीं जा रहे हैं, तो इसका मतलब है कि वे गे हैं.'
तीसरे शख्स ने कहा, 'एक-दूसरे का हाथ पकड़ना या बाहों में बाहें डालकर चलना गहरी दोस्ती, भरोसे और आपसी मेल-जोल का एक आम और पूरी तरह से दोस्ताना इजहार है.'
चौथे शख्स ने लिखा, 'सिर्फ पक्के दोस्त ही हाथ पकड़कर चलते हैं.' इसके जवाब में महिलाओं ने कहा कि सच कहूं तो, कमेंट्स हमें उम्मीद से ज्यादा यकीन दिला रहे हैं. हमें तो यह सच में बहुत अच्छा लगता है. लेकिन यूरोप में अगर लोग इसे देखते, तो बहुत बुरा मानते.'
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