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फतेहपुर सीकरी की पहाड़ियों में छिपा है 7 हजार साल पुराना 'खजाना', बचाने के लिए ASI ने जारी किया आदेश

फतेहपुर सीकरी की पहाड़ियों में स्थित 7 हजार साल पुरानी 'चील की गुफा' और 'नाई की गुफा' को बचाने के लिए ASI ने बड़ा कदम उठाया है. पत्थर युग के इन दुर्लभ शैलचित्रों को नष्ट होने से बचाने के लिए इन्हें संरक्षित स्मारक घोषित करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है.

फतेहपुर सीकरी की पहाड़ियों में छिपा है 7 हजार साल पुराना 'खजाना', बचाने के लिए ASI ने जारी किया आदेश
अब चील और नाई की गुफाएं होंगी महफूज.
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आगरा. फतेहपुर सीकरी की पहाड़ियों में छिपी हमारी सात हजार साल पुरानी विरासत अब आखिरकार सुरक्षित होने जा रही है. भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) ने यहां की ऐतिहासिक 'चील की गुफा' और 'नाई की गुफा' को संरक्षित धरोहर घोषित करने की तैयारी कर ली है. इसके लिए शुरुआती नोटिफिकेशन जारी कर 60 दिनों में आपत्तियां मांगी गई हैं, जिसके बाद इन्हें हमेशा के लिए सुरक्षित कर दिया जाएगा.

पत्थरों पर उकेरी जिंदगी की अनमोल दास्तान

सीकरी के रसूलपुर, मदनपुरा, पतसाल और जाजौली इलाकों में फैली ये गुफाएं कोई आम चट्टानें नहीं हैं. ये प्रागैतिहासिक काल (पत्थर युग) से लेकर गुप्त काल के इंसानी जीवन के जीते-जाते गवाह हैं. यहां की दीवारों पर आदिमानवों ने गेरू और प्राकृतिक रंगों से अपनी दुनिया को उकेरा था. मदनपुरा में दांतों वाले हाथी, नीलगाय और सांड के चित्र हैं, तो रसूलपुर की गुफाओं में बेहद खूबसूरत और जटिल अल्पनाएं (डिजाइन) बनी हुई हैं. ये कलाकृतियां हमें मध्य प्रदेश की मशहूर भीमबेटका की याद दिलाती हैं. 

Fatehpur sikri 7000 years old prehistoric rock paintings ASI protection cheel ki gufa rasoolpur

सु्प्रीम कोर्ट के दखल के बाद बची गुफाएं

1980 के दशक में पुरातत्वविद् डॉ. गिरिराज कुमार ने इन 24 अनमोल गुफाओं को खोज निकाला था. लेकिन बीते दशकों में अवैध खनन के काले कारोबार ने इस ऐतिहासिक खजाने को बेरहमी से जख्म दिए. जब सुप्रीम कोर्ट ने माइनिंग पर हथौड़ा चलाया, तब जाकर बची-खुची गुफाओं की सांस में सांस आई. कोर्ट की सख्ती के बाद जो गुफाएं बच गईं, वे भी देखरेख के अभाव में धीरे-धीरे दम तोड़ रही थीं.

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ASI की बैठक गुफाओं को बचाने पर हुआ फैसला

देर आए दुरुस्त आए, अगस्त में दिल्ली में हुई ASI की बैठक में इन गुफाओं को बचाने के प्रस्ताव पर मुहर लगी और 14 अक्टूबर को इसका नोटिफिकेशन जारी हो गया. आगरा सर्किल के इतिहास में पहली बार पत्थर युग की किसी धरोहर को सरकारी सुरक्षा का कवच मिल रहा है. उम्मीद है कि इस कदम से हमारी यह अनमोल विरासत आने वाली पीढ़ियों के लिए बची रहेगी.

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