- ईरान और अमेरिका-इजरायल के बीच जारी संघर्ष के कारण वैश्विक ऊर्जा संकट और पेट्रोल-डीजल की कमी बढ़ गई है
- बांग्लादेश, श्रीलंका, पाकिस्तान, म्यांमार समेत कई देशों ने ईंधन राशनिंग और वर्क फ्रॉम होम लागू कर दिए हैं
- चीन ने डीजल, गैसोलीन और विमानन ईंधन के निर्यात पर प्रतिबंध लगा दिया है
बांग्लादेश कॉलेज बंद, पाकिस्तान में वर्क फ्रॉम होम, चीन ने डीजल, गैसोलीन और विमानन ईंधन के एक्सपोर्ट पर बैन... ईरान-अमेरिका और इजरायल युद्ध कब थमेगा, ये कहना मुश्किल है. लेकिन ये जंग लंबी चली, तो दुनियाभर में हालात और बिगड़ सकते हैं. ईरान स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से जहाजों पर खतरा बना हुआ है, इसलिए सैकड़ों तेल के जहाज अटके हुए हैं. इसका असर दुनियाभर में देखने को मिल रहे हैं. मिडिल ईस्ट संकट के कारण दुनिया भर में पेट्रोल और डीजल की कमी हो गई है, जिससे कई देशों को अपने ऊर्जा संकट से निपटने के लिए सख्त कदम उठाने के लिए मजबूर हो गए हैं.
ईरान और अमेरिका-इजरायल युद्ध का ये पांचवां सप्ताह है, लेकिन अमेरिका और इजरायल रुकने का नाम नहीं ले रहे हैं. उधर, ईरान का कहना है कि वह अपनी अंतिम सांस तक इस जंग को लड़ेंगे. ऐसे में दुनियाभर में ऊर्जा संकट के बादल मंडरा रहे हैं. कच्चे तेल की कीमत 100 रुपये प्रति बैरेल से ऊपर बनी हुई है. ऐसे में कई देशों ने तेल और डीजल की राशनिंग शुरू कर दी है. कई देशों में पेट्रोल की कीमतें काफी बढ़ गई हैं, तो कुछ देशों ने कोटा फिक्स कर दिया है.

किन देशों ने क्या सख्त कदम उठाए?
बांग्लादेश- भारत के पड़ोसी देश ने ईंधन पर राशनिंग लागू कर दी है. यूनिवर्सिटी बंद कर दी गई हैं, ऑनलाइन क्लासेस चल रही हैं. इतना ही नहीं, यहां तेल डिपो में सेना तक तैनात कर दी गई है. बांग्लादेश में पिछले महीने की शुरुआत में पेट्रोल पंप पर लंबी कतारों के बाद ‘क्यूआर कोड' आधारित ईंधन ‘राशनिंग' प्रणाली लागू की गई थी. सरकार का कहना है कि पश्चिम एशिया में युद्ध के कारण सप्लाई चेन में आई मुश्किल के बीच वह कच्चा तेल प्राप्त करने के लिए रूस के साथ काम कर रही है.
श्रीलंका- मिडिल ईस्ट संकट के बीच श्रीलंका में भी ऊर्जा संकट देखने को मिल रहा है. यहां भी ईंधन की राशनिंग लागू की गई है. यहां निजी वाहन चालकों के लिए 15 लीटर प्रति सप्ताह की लिमिट तय कर दी गई है. वहीं, अब स्कूल सप्ताह में सिर्फ चार दिन ही खुल रहे हैं.
स्लोवेनिया- आम लोगों के लिए ईंधन पर 50 लीटर प्रति दिन की लिमिट तय कर दी गई है, ताकि सभी को पेट्रोल डीजल लंबे समय तक मिल सके. व्यवसायों और किसानों के लिए यह लिमिट 200 लीटर, अनिश्चित काल के लिए की गई है.
फिलीपींस- राष्ट्रीय ऊर्जा आपातकाल घोषित कर दिया गया है. यहां ऊर्जा संकट से बचने के लिए सिर्फ चार दिन ऑफिस खुल रहे हैं. यहां पेट्रोल पंपों के बाहर काफी अफरा-तफरी देखने को मिल रही है.
पाकिस्तान- पाकिस्तान के पास कुछ ही दिनों का कच्चे तेल और एलपीजी का स्टोक बचा है. ऐसे में लाहौर और कराची जैसे औद्योगिक शहरों में पहले ही गैस की सप्लाई कम कर दी गई हैं. इससे टैक्सटाइल से जुड़ी व दूसरी अन्य फैक्ट्रियों में कामकाज चौपट है. वहीं, ऑफिस सिर्फ 4 दिन खुल रहे हैं. स्कूल बंद अभी भी हैं. सरकारी गाडि़यों के लिए भी पेट्रोल-डीजल की लिमिट घटा दी गई है.
म्यांमार- यहां ऑप्शनल ड्राइविंग-डे लागू किया गया है. इसके साथ ही सरकार ने 25 मार्च 2026 से सरकारी ऑफिसों में हर बुधवार वर्क फ्रॉम होम लागू कर दिया है. प्राइवेट कंपनियों को भी जहां संभव हो, घर से काम करने को कहा गया है. राशनिंग नियम के कारण ईंधन हफ़्ते में एक बार या अधिकतम दो बार में खरीदा जा सकेगा.
थाईलैंड- डीजल की कीमत पर लिमिट लगा दी गई है. सरकारी अधिकारियों को घर से काम करने और लंबी यात्रा कम करने की सलाह दी गई है. मार्च की शुरुआत से ही यहां वर्क फ्रॉम होम, सरकारी इमारतों में ऊर्जा खपत कम करना, एयर कंडीशनर का तापमान 26 डिग्री सेल्सियस से कम न रखना जैसे उपाय किये जा रहे हैं.
वियतनाम- मिडिल ईस्ट संकट से निपटने के लिए वियतनाम को अपने ईंधन की कीमतों को बढ़ने से रोकने के लिए अपने इमरजेंसी फंड का इस्तेमाल करना पड़ा है. इसके साथ ही अधिकारियों को घर से काम करने के लिए कहा गया है.
मिस्र- ऊर्जा संकट के बीच ईंधन और बिजली की राशनिंग लागू की गई है, ताकि मुश्किल हालातों का सामना किया जा सके. यहां मॉल, रेस्तरां और रिटेल शॉप रात 9 बजे बंद हो रही हैं. लाइट वाले बिलबोर्ड बंद कर दिए गए हैं. सरकारी इमारतें शाम 6 बजे बंद हो रही हैं.
भारत- सरकार आपूर्ति को प्राथमिकता देने के लिए पाइपलाइन से गैस की सुविधा वाले घरों के लिए एलपीजी सिलेंडर बंद कर रही है. कैरोसीन इस्तेमाल करने की छूट दी गई. राशन की दुकानों के साथ-साथ पेट्रोल पंपों पर भी कैरोसीन दिया जा रहा है. प्रीमियम पेट्रोल और कमर्शियल सिलेंडर की कीमतें भी बढ़ा दी गई हैं. हालांकि, सरकार का कहना है कि पेट्रोल, डीजल और एलपीजी का पर्याप्त भंडार है.

चीन- मिडिल ईस्ट संकट के बीच डीजल, गैसोलीन और विमानन ईंधन के एक्सपोर्ट पर बैन लगा दिया गया है. चीन के पास कच्चे तेल का बड़ा स्टॉक मौजूद है. लेकिन चीन ने भविष्य के संकट को देखते हुए ये कदम उठाया है.
दक्षिण कोरिया- ईंधन की कीमतों पर लिमिट लागू की गई है. 30 वर्षों में पहली बार, स्वैच्छिक ईंधन संरक्षण उपाय लागू किये गए हैं. देश में आने वाले दिनों ऊर्जा संकट और गहरा सकता है.
जापान- मिडिल ईस्ट संकट के बीच जापान सरकार ने अपना सुरक्षित तेल भंडार अब मार्केट में लाने का फैसला किया है. जापान 95% कच्चा तेल खाड़ी देशों से आयात किया जाता है. ऐसे आने वाले समय में देश में ऊर्जा संकट गहरा सकता है.
स्पेन- इस संकट से निपटने के लिए स्पेन ने 5 अरब यूरो का इमरजेंसी पैकेज रिलीज किया है. बिजली और गैस पर टैक्स में कटौती की गई है. परिवहन ऑपरेटरों और किसानों के लिए सब्सिडी की घोषणा की गई है.
जर्मनी- मिडिल ईस्ट संकट के बीच जर्मनी में महंगाई सातवें आसमान पर पहुंच गई है. BASF ने वस्तुओं की कीमतों में 30% तक की वृद्धि की है. इससे देशभर में अफरातफरी का माहौल है.
हॉर्मुज के बाद बाब-अल-मंदेब... बढ़ सकती हैं मुश्किलें
उत्तरी अमेरिका, यूरोप, पश्चिम एशिया और कुछ अन्य एशियाई देशों के कई हिस्सों में पेट्रोलियम उत्पादों की कीमतों में तेजी से वृद्धि हुई है. कुछ इलाकों में बिजली कटौती हो रही है तो कहीं लॉकडाउन जैसी स्थिति उत्पन्न हुई है. ईरान का इजरायल और अमेरिका के साथ संघर्ष जारी है. इस संघर्ष में ईरान समर्थित यमन के हूती विद्रोही भी शामिल हो गए हैं. हूतियों ने इजरायल पर कई मिसाइल हमले किए हैं. स्ट्रेट ऑफ हॉर्मूज के बाधित होने के चलते वैश्विक ऊर्जा संकट पहले ही गहरा चुका है. अब एक और खतरा स्ट्रेट ऑफ बाब-अल-मंदेब पर मंडरा रहा है, जो रेड सी और अदन की खाड़ी के बीच एक महत्वपूर्ण चोक प्वाइंट है.

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ईरान का इजरायल और अमेरिका के साथ संघर्ष जारी है. इस संघर्ष में ईरान समर्थित यमन के हूती विद्रोही भी शामिल हो गए हैं. हूतियों ने इजरायल पर कई मिसाइल हमले किए हैं. स्ट्रेट ऑफ हॉर्मूज के बाधित होने के चलते वैश्विक ऊर्जा संकट पहले ही गहरा चुका है. अब एक और खतरा स्ट्रेट ऑफ बाब-अल-मंदेब पर मंडरा रहा है, जो रेड सी और अदन की खाड़ी के बीच एक महत्वपूर्ण चोक प्वाइंट है. विशेषज्ञों का मानना है कि यदि होर्मुज और बाब अल-मंदेब दोनों जलडमरूमध्य एक साथ प्रभावित होते हैं, तो यह ग्लोबल सप्लाई चेन और अर्थव्यवस्था के लिए बड़ा झटका साबित हो सकता है.
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