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तुर्की को F-35 फाइटर जेट बेचने को क्यों तैयार ट्रंप? खुद 7 साल पहले रूस के डर से लगाया था बैन

ट्रंप ने सात साल पहले तुर्की पर काट्सा के तहत बैन लगा दिया था. लेकिन अब ट्रंप प्रशासन ने यूटर्न ले लिया है और तुर्की को फाइटर जेट बेचने पर सकारात्मक इशारा किया है.

तुर्की को F-35 फाइटर जेट बेचने को क्यों तैयार ट्रंप? खुद 7 साल पहले रूस के डर से लगाया था बैन
अमेरिका को यह डर था कि तुर्की F-35 पर S-400 का इस्तेमाल कर सकता है.
AFP

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप एक बार फिर तुर्की को अपने सबसे एडवांस F-35 फाइटर जेट बेचने के लिए तैयार हो गए हैं. दिलचस्प बात यह है कि यह वही ट्रंप हैं जिन्होंने करीब 7 साल पहले खुद तुर्की पर इस डील को लेकर बैन लगाया था और उसे F-35 प्रोग्राम से बाहर कर दिया था.  नाटो समिट के दौरान तुर्की के राष्ट्रपति रेचेप तैय्यप एर्दोगन के साथ मुलाकात में ट्रंप ने तुर्की पर लगे प्रतिबंधों को हटाने की बात कही है. इसके साथ ही F-35 जेट्स की बिक्री पर भी सकारात्मक फैसला लेने के संकेत दिए हैं.

लेकिन जो तुर्की अमेरिका की आलोचना करता है और उसे फूटी आंख भी नहीं सुहाता है उसे ट्रंप लड़ाकू विमान क्यों देना चाहते हैं? रेशा-रेशा समझते हैं कि आखिर पूरा मामला क्या है और ट्रंप 7 साल पहले क्यों भड़के थे, अब क्यों मान गए हैं और अमेरिकी संसद इस डील में कैसे अडंगा लगा सकती है.?

7 साल पहले ट्रंप ने क्यों लगाया था बैन?

पूरे विवाद की जड़ साल 2019 में शुरू हुई थी, जब तुर्की ने अमेरिका की मर्जी के खिलाफ जाकर रूस से उसका सबसे खतरनाक मिसाइल डिफेंस सिस्टम S-400 खरीद लिया था. तुर्की नाटो का सदस्य देश है, इसलिए अमेरिका और अन्य पश्चिमी देश इस डील से बेहद नाराज थे.

F-35 दुनिया का सबसे एडवांस 'स्टेल्थ' फाइटर जेट है, यानी यह दुश्मन के रडार की पकड़ में नहीं आता. अमेरिका को डर था कि अगर तुर्की के पास F-35 जेट और रूस का S-400 रडार सिस्टम दोनों एक साथ रहे, तो रूस चालाकी से F-35 का डेटा चुरा सकता है.

अमेरिका को लगा कि रूस अपने S-400 सिस्टम के जरिए F-35 की कमजोरियों, उसकी छिपने की क्षमता और मिसाइल से बचने के तरीकों को आसानी से समझ लेगा. अगर रूस को यह पता चल जाता कि F-35 को कैसे ट्रैक करना है, तो अमेरिका की सबसे बड़ी हवाई ताकत बेकार हो जाती.

इसी सुरक्षा खतरे को देखते हुए ट्रंप प्रशासन ने 'काट्सा' (Countering America's Adversaries Through Sanctions Act) कानून के तहत तुर्की पर कड़े प्रतिबंध लगा दिए थे और उसे F-35 बनाने और खरीदने वाले देशों के ग्रुप से बाहर निकाल दिया था.

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Photo Credit: US Dept of State

अब अचानक तुर्की को F-35 बेचने को क्यों तैयार हैं ट्रंप?

7 साल बाद अब पासा पलटता दिख रहा है. ट्रंप ने संकेत दिए हैं कि वह तुर्की से प्रतिबंध हटाने जा रहे हैं और F-35 की बिक्री पर जल्द फैसला करेंगे. इसके पीछे मुख्य रूप से दो बड़ी वजहें मानी जा रही हैं.

अव्वल, तुर्की नाटो का एक बेहद मजबूत और रणनीतिक रूप से अहम सदस्य है. मध्य-पूर्व और यूरोप के मुहाने पर बैठे तुर्की को अमेरिका लंबे समय तक नाराज नहीं रख सकता. ट्रंप चाहते हैं कि तुर्की पूरी तरह रूस के पाले में न चला जाए और नाटो के भीतर एकता बनी रहे.

दूसरा, डोनाल्ड ट्रंप हमेशा से 'अमेरिका फर्स्ट' और बिजनेस को तरजीह देने वाली नीति के लिए जाने जाते हैं. उन्होंने खुद एर्दोगन से मुलाकात के बाद कहा कि दोनों देश व्यापार बढ़ाने पर भी चर्चा करेंगे. F-35 एक बेहद महंगा सौदा है, जिससे अमेरिकी डिफेंस कंपनियों को अरबों डॉलर का फायदा होगा. अमेरिका शायद इस डील के बदले तुर्की पर S-400 के इस्तेमाल को लेकर कुछ कड़ी शर्तें लगाने का बीच का रास्ता निकाल रहा है.

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अमेरिकी संसद में इस डील को कैसे रोका जा सकता है?

भले ही राष्ट्रपति ट्रंप इस डील के लिए हरी झंडी दिखा रहे हों, लेकिन तुर्की के लिए F-35 पाना इतना आसान नहीं है. ट्रंप के सामने अभी भी बड़ी कानूनी और संसदीय अड़चनें हैं.

अमेरिकी कानून के मुताबिक, जब भी सरकार किसी दूसरे देश को बड़े हथियार बेचती है, तो उसकी जानकारी संसद को देनी होती है. अगर अमेरिकी सीनेट और हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स को लगता है कि तुर्की को F-35 देना अमेरिकी सुरक्षा के लिए खतरा है, तो वे इसके खिलाफ एक संयुक्त प्रस्ताव पारित करके डील को ब्लॉक कर सकते हैं.

अमेरिकी संसद के पास 'पॉवर ऑफ द पर्स' होती है. संसद रक्षा बजट या विदेशी सैन्य बिक्री से जुड़े बिलों में ऐसी शर्तें जोड़ सकती है, जो तुर्की को F-35 ट्रांसफर करने के लिए अमेरिकी फंड के इस्तेमाल पर सीधे रोक लगा दें.

चूंकि तुर्की पर प्रतिबंध 'काट्सा' कानून के तहत लगे थे, इसलिए संसद यह शर्त अनिवार्य कर सकती है कि जब तक तुर्की रूस के S-400 सिस्टम को पूरी तरह नष्ट नहीं कर देता या अपने देश से बाहर नहीं निकाल देता, तब तक राष्ट्रपति कानूनी रूप से ये प्रतिबंध नहीं हटा सकते.

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